राजनीति और जनसेवा के बीच की बारीक रेखा को जब कोई जनप्रतिनिधि अपनी कार्यशैली से स्पष्ट कर देता है, तो वह जनता की नजरों में एक मिसाल बन जाता है। उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले के पलिया विधानसभा क्षेत्र से एक ऐसा ही वाकया सामने आया है, जिसने प्रशासनिक गलियारों से लेकर आम जनता के बीच खासी चर्चा बटोर ली है। तेज बारिश और खराब मौसम की परवाह किए बिना क्षेत्रीय विधायक सीधे धान मंडी पहुंच गए और एक आदिवासी किसान की अटकी हुई उम्मीदों को राहत दी।
बारिश और प्रशासनिक सुस्ती के बीच अचानक पहुंचे विधायक
घटना पलिया कृषि उत्पादन मंडी समिति की है। यहाँ थारू जनजाति समुदाय से आने वाले एक साधारण किसान सुभाष राना, जो कि निझोटा गांव के रहने वाले हैं, अपनी मेहनत की कमाई यानी धान की फसल से भरी ट्रॉली लेकर पहुंचे थे। लेकिन, स्थानीय स्तर पर कुछ प्रशासनिक अड़चनों और नियमों के फेर में उनकी ट्रॉली को रोक लिया गया था। किसान अपनी फसल बेचने के लिए परेशान था, लेकिन उसकी सुनने वाला कोई नहीं था।
जब इस बात की भनक पलिया के भारतीय जनता पार्टी के विधायक रोमी साहनी को लगी, तो उन्होंने पलक झपकते ही मौके पर जाने का फैसला किया। उस वक्त बाहर मूसलाधार बारिश हो रही थी, लेकिन विधायक ने मौसम की रुकावट को दरकिनार किया और सीधे मंडी परिसर के लिए रवाना हो गए।
भीगते हुए मंडी परिसर में उतरे विधायक, अधिकारियों को लगाई फटकार
जैसे ही विधायक रोमी साहनी की गाड़ी मंडी गेट पर रुकी, वहां मौजूद लोगों में हलचल मच गई। विधायक छाता लेने या बारिश थमने का इंतजार किए बिना सीधे अपनी गाड़ी से बाहर निकले और भारी बारिश में ही भीगते हुए उस धान से भरी ट्रॉली के पास पहुंचे, जिसे रोका गया था।
मौके पर मौजूद अधिकारियों और कर्मचारियों को जब विधायक ने अपनी आंखों के सामने किसान को परेशान होते देखा, तो उनका गुस्सा फूट पड़ा। उन्होंने तुरंत सभी संबंधित अधिकारियों को तलब किया और दो टूक शब्दों में नाराजगी जताई। विधायक ने कड़े तेवर दिखाते हुए अधिकारियों से सवाल किया कि आखिर किस अधिकार के तहत एक गरीब किसान की फसल को रोका गया है।
थारू समाज के अधिकारों पर दिया जोर
मौके पर मौजूद किसानों और अधिकारियों की भीड़ के बीच विधायक रोमी साहनी ने बेहद स्पष्ट संदेश दिया। उन्होंने जोर देकर कहा कि थारू समाज और क्षेत्र का हर एक किसान अपनी मेहनत की फसल को बेचने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र है। वे अपनी उपज को राज्य के भीतर या बाहर, जहां उन्हें उचित दाम मिले, वहां बेचने का अधिकार रखते हैं।
विधायक ने कड़े निर्देश देते हुए कहा:
"थारू समाज के किसानों की ट्रॉलियों को रोकने का किसी को कोई अधिकार नहीं है। अन्नदाता की मेहनत का अपमान या उनका उत्पीड़न किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अगर भविष्य में किसी भी किसान को इस तरह से परेशान किया गया, तो संबंधित अधिकारी या कर्मचारी के खिलाफ सीधी और कड़ी कार्रवाई की जाएगी।"
तत्काल प्रभाव से छुड़ाई गई ट्रॉली
विधायक के कड़े रुख और ऑन-द-स्पॉट हस्तक्षेप का असर तुरंत देखने को मिला। अधिकारियों ने बिना कोई और देरी किए किसान सुभाष राना की धान से भरी ट्रॉली को तुरंत मुक्त कर दिया। इसके साथ ही मंडी प्रशासन को यह भी निर्देश दिए गए कि आगे से क्षेत्र के किसी भी किसान को अपनी उपज बेचने में कोई कागजी या प्रशासनिक बाधा का सामना न करना पड़े।
इस पूरी घटना का एक वीडियो भी तेजी से सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें विधायक बारिश में भीगते हुए अधिकारियों को फटकार लगाते और किसान का पक्ष मजबूती से रखते हुए नजर आ रहे हैं। आम जनता और स्थानीय किसानों ने विधायक के इस जमीन से जुड़े और तुरंत एक्शन लेने वाले अंदाज की जमकर सराहना की है।
जनप्रतिनिधियों से ऐसी ही उम्मीद करती है जनता
धान खरीद के इस सीजन में अक्सर किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए लंबी लाइनों, पोर्टल की समस्याओं या बिचौलियों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में, यदि जनप्रतिनिधि खुद आगे आकर ढीले प्रशासनिक तंत्र को दुरुस्त करें, तो अन्नदाता की आधी मुश्किलें वैसे ही खत्म हो जाती हैं। पलिया की इस घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि सत्ता और पद का असली इस्तेमाल जनता की तकलीफों को दूर करने के लिए ही होना चाहिए।