दक्षिण एशिया के भू-राजनीतिक मानचित्र पर एक बार फिर हिंसा की आग सुलग उठी है। अफगानिस्तान और पाकिस्तान की साझा सीमा पर हालात एक बार फिर से बेहद तनावपूर्ण हो गए हैं। पूर्वी नूरिस्तान प्रांत में दोनों पक्षों के बीच हुई एक खूनी और भीषण झड़प में कम से कम 28 लड़ाकों के मारे जाने की आधिकारिक पुष्टि हुई है। इस सनसनीखेज सैन्य कार्रवाई के दौरान अफगान सुरक्षा बलों ने करीब 30 संदिग्ध लड़ाकों को जिंदा गिरफ्तार करने में भी बड़ी सफलता हासिल की है। यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब दोनों पड़ोसी देशों के बीच कूटनीतिक और सामरिक रिश्तों में लंबे समय से बर्फ जमी हुई थी और सीमावर्ती इलाकों में लगातार तनाव गहराता जा रहा था।
नूरिस्तान के जंगलों में गूंजी गोलियों की तड़तड़ाहट
प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह पूरा संघर्ष अफगानिस्तान के रणनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील माने जाने वाले नूरिस्तान प्रांत के पहाड़ी और जंगलों वाले इलाके में हुआ। स्थानीय चश्मदीदों और खुफिया सूत्रों से मिल रही जानकारियों के मुताबिक, पाकिस्तान की तरफ से भारी हथियारों से लैस लड़ाकों के एक बड़े समूह ने अफगान सीमा में घुसपैठ की कोशिश की थी। जैसे ही इस संदिग्ध गतिविधि की भनक अफगान सीमा सुरक्षा बलों को लगी, उन्होंने तुरंत मोर्चा संभाल लिया।
देखते ही देखते यह घुसपैठ की कोशिश एक भीषण युद्ध में तब्दील हो गई। दोनों तरफ से अत्याधुनिक हथियारों का खुलकर इस्तेमाल किया गया। गोलियों की तड़तड़ाहट और मोर्टार के धमाकों से पूरा सीमावर्ती इलाका दहल उठा। अफगान बलों ने पेशेवर और रणनीतिक बढ़त का फायदा उठाते हुए घुसपैठियों को चारों तरफ से घेर लिया। इस निर्णायक कार्रवाई में पाकिस्तान की ओर से आए 28 लड़ाके मौके पर ही ढेर हो गए, जबकि कई अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए।
30 लड़ाके गिरफ्तार, सुरक्षा एजेंसियों की कड़ी पूछताछ जारी
इस सैन्य ऑपरेशन का सबसे अहम पहलू यह रहा कि अफगान सुरक्षा बलों ने महज जवाबी कार्रवाई तक खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि घेराबंदी करते हुए करीब 30 लड़ाकों को जीवित दबोचने में कामयाबी हासिल की। पकड़े गए इन सभी आरोपियों को अज्ञात सुरक्षित ठिकानों पर ले जाया गया है, जहां देश की खुफिया और आतंकवाद-रोधी एजेंसियां इनसे बेहद कड़ाई से पूछताछ कर रही हैं।
एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि इस बड़े हमले के पीछे किस संगठन का हाथ था और क्या इन्हें किसी बाहरी देश या एजेंसी का प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष समर्थन प्राप्त था। गिरफ्तार किए गए इन लड़ाकों के पास से भारी मात्रा में विदेशी हथियार, गोला-बारूद, संचार उपकरण और आपत्तिजनक दस्तावेज भी बरामद किए गए हैं, जो सीमा पार से चल रही किसी बड़ी साजिश की ओर इशारा करते हैं।
दोनों देशों के बीच क्यों बढ़ रहा है तनाव?
अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच डूरंड लाइन (Durand Line) को लेकर दशकों पुराना विवाद है। हाल के महीनों में यह तनाव और अधिक बढ़ गया है। काबुल में बैठी हुकूमत का आरोप है कि उसकी जमीन का इस्तेमाल पड़ोसी देश के खिलाफ हो रहा है, या फिर पाकिस्तान अपनी आंतरिक असफलताओं और सुरक्षा चुनौतियों का ठीकरा अफगान धरती पर फोड़ने की कोशिश कर रहा है।
दूसरी ओर, इस्लामाबाद लगातार यह दावा करता रहा है कि अफगान सीमा क्षेत्र का इस्तेमाल देश विरोधी तत्व अपनी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए कर रहे हैं। इस ताजा खूनी संघर्ष के बाद दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संवाद पूरी तरह से चरमरा गया है। सीमा पर तैनात सैन्य टुकड़ियों को हाई अलर्ट पर रखा गया है ताकि किसी भी संभावित दुस्साहस का तुरंत और मुंहतोड़ जवाब दिया जा सके।
अंतर्राष्ट्रीय समुदाय की नजर और क्षेत्रीय स्थिरता पर असर
इस ताजा सैन्य भिड़ंत ने एक बार फिर मध्य और दक्षिण एशिया की सुरक्षा पर गंभीर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। अमेरिका और पश्चिमी देशों की सेनाओं के इस क्षेत्र से हटने के बाद से ही सीमाई इलाकों में अराजकता का माहौल लगातार बढ़ता जा रहा है। यदि इन झड़पों को समय रहते कूटनीतिक माध्यमों से नहीं रोका गया, तो यह संघर्ष एक बड़े क्षेत्रीय युद्ध का रूप भी ले सकता है, जिससे आम नागरिकों का जीवन भारी संकट में पड़ जाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि दोनों देशों को युद्ध के रास्ते को छोड़कर बातचीत की मेज पर आना चाहिए, हालांकि मौजूदा हालातों को देखते हुए निकट भविष्य में ऐसा होना बेहद मुश्किल नजर आ रहा है। फिलहाल, नूरिस्तान और आसपास के पूरे इलाके में कर्फ्यू जैसे हालात हैं और स्थानीय लोग इस खौफ के साये में जीने को मजबूर हैं कि न जाने कब अगली गोलीबारी शुरू हो जाए।