उत्तर प्रदेश के ताजनगरी आगरा से एक ऐसा सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने सर्राफा और धातु कारोबारियों के होश उड़ा दिए हैं। कारोबार में भरोसे का फायदा उठाकर किस तरह शातिर दिमाग लोग बड़े पैमाने पर चूना लगाते हैं, इसकी बानगी न्यू आगरा थाना क्षेत्र में देखने को मिली है। पुलिस ने चांदी खरीदने के नाम पर व्यापारियों को झांसे में लेने और बदले में कागज की गड्डियां थमाने वाले एक शातिर गिरोह के दो गुर्गों को धर दबोचा है। इस कार्रवाई के दौरान पुलिस के हाथ जो बरामदगी लगी है, उसने भी कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
चांदी के कारोबार की आड़ में सुनियोजित ठगी
घटना की जड़ें काफी गहरी हैं। जानकारी के मुताबिक, इटावा जिले के सैफई अंतर्गत आने वाले भगवती पुर के रहने वाले इरशाद अली का चांदी का कारोबार है। उनका व्यापार गाजियाबाद के गोविंदपुरम स्थित एक फर्म के साथ चल रहा था। इसी व्यापारिक सिलसिले के दौरान वर्ष 2026 में उनकी मुलाकात अमन वर्मा और सचिन वर्मा नामक दो व्यक्तियों से हुई। इन दोनों ने कारोबार को आगे बढ़ाने और बड़े पैमाने पर चांदी खरीदने का प्रस्ताव रखा।
इरशाद अली ने इन पर भरोसा करते हुए इन्हें भारी मात्रा में चांदी सप्लाई कर दी। लेकिन जब भुगतान करने की बारी आई, तो ये दोनों टालमटोल करने लगे। व्यापारी ने जब अपने पैसों के लिए दबाव बनाना शुरू किया, तो आरोपियों ने किसी तरह बकाया चुकाने का भरोसा दिया और उन्हें आगरा मिलने के लिए बुलाया।
भगवान टाकीज के पास बुलाई गई थी महफिल
तयशुदा योजना के तहत, 29 सितंबर 2026 को आरोपियों ने व्यापारी इरशाद अली को आगरा के व्यस्त इलाके भगवान टाकीज के पास बुलाया। यहां आरोपियों ने व्यापारी को विश्वास में लेने के लिए एक कपड़े में लिपटी हुई गड्डी थमा दी। उन्हें बताया गया कि इस एक लाख रुपये की गड्डी में बकाया भुगतान की रकम है।
शातिर जालसाजों ने बड़ी चालाकी से गड्डी के सबसे ऊपर 500 रुपये का एक असली नोट लगा रखा था और गड्डी को एक जगह से थोड़ा फाड़ भी दिया था, ताकि व्यापारी को यह लगे कि पूरी गड्डी असली नोटों से भरी हुई है। व्यापारी ने जल्दबाजी में उन पर आँख मूंदकर भरोसा कर लिया और मौके से आरोपी रफूचक्कर हो गए।
खुलासा: नोटों की जगह निकले कोरे कागज
जैसे ही आरोपी वहां से निकले, व्यापारी इरशाद अली ने उस गड्डी को खोलकर गहराई से देखा। उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। गड्डी के ऊपर सिर्फ एक ही 500 रुपये का असली नोट था, जबकि उसके नीचे नोटों के आकार में कटे हुए सफेद सादे कागज भरे हुए थे। खुद के साथ हुई इस बड़ी धोखाधड़ी का अहसास होते ही व्यापारी के होश उड़ गए।
उन्होंने बिना एक पल गंवाए तुरंत स्थानीय पुलिस से संपर्क किया और अपनी आपबीती सुनाई। व्यापारी की शिकायत को गंभीरता से लेते हुए न्यू आगरा थाने में तत्काल प्रभाव से मुकदमा दर्ज किया गया और पुलिस टीमों को आरोपियों की धरपकड़ के लिए लगाया गया।
पुलिस की ताबड़तोड़ कार्रवाई, दो गिरफ्तार
मामले की नजाकत को देखते हुए न्यू आगरा पुलिस ने सक्रियता दिखाई और तकनीकी सर्विलांस व मुखबिर की सूचना के आधार पर जालसाजों की तलाश शुरू कर दी। मंगलवार को पुलिस ने न्यू आगरा क्षेत्र से ही इस गिरोह के दो मुख्य सदस्यों को गिरफ्तार करने में बड़ी सफलता हासिल की।
गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान गाजियाबाद के आकाश नगर निवासी अमन वर्मा और दिल्ली के शांति नगर निवासी सचिन वर्मा के रूप में हुई है। हालांकि, इनका तीसरा साथी, जो फरीदाबाद का रहने वाला हरेंद्र बताया जा रहा है, वह पुलिस के हाथ आने से पहले ही मौके से फरार होने में कामयाब रहा। पुलिस उसकी तलाश में लगातार दबिश दे रही है।
भारी मात्रा में अप्रचलित करेंसी बरामद
पुलिस ने जब गिरफ्तार आरोपियों के ठिकानों और उनके पास मौजूद सामान की तलाशी ली, तो उनके होश उड़ गए। आरोपियों के कब्जे से कुल 10 लाख 34 हजार 500 रुपये की ऐसी करेंसी बरामद हुई, जो अब अप्रचलित (बंद हो चुके नोट) हो चुकी है। इसके अलावा उनके पास से चार हजार रुपये की प्रचलित भारतीय मुद्रा भी मिली।
जांच में यह भी सामने आया कि ये लोग केवल कागजों की गड्डियां ही नहीं, बल्कि पुरानी बंद हो चुकी करेंसी की गड्डियों के ऊपर असली और चालू नोट चिपकाकर व्यापारियों को धोखा देते थे। इनके पास से एक कार, दो अत्याधुनिक मोबाइल फोन, आधार कार्ड और डेबिट कार्ड भी बरामद किए गए हैं, जिनका इस्तेमाल वे अपनी पहचान छिपाने और वारदातों को अंजाम देने में करते थे।
गिरोह का पुराना है कारनामा
पुलिस की शुरुआती पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया कि उनका यह कोई पहला मामला नहीं है। वे लंबे समय से इस तरह के ठगी के नेटवर्क से जुड़े हुए हैं। वे पहले व्यापारियों से संपर्क साधते थे, उन्हें शुरुआती दौर में कुछ असली नोट देकर अपने जाल में फंसाते थे और जब बड़ा सौदा हो जाता था, तो चांदी या अन्य कीमती सामान हड़पकर नकली नोटों या कागजों की गड्डी थमाकर फरार हो जाते थे।
इस पूरे षड्यंत्र में फरीदाबाद का हरेंद्र और एक अन्य अज्ञात व्यक्ति भी उनका पूरा सहयोग करता था। पुलिस अब फरार चल रहे हरेंद्र की गिरफ्तारी के लिए संभावित ठिकानों पर छापेमारी कर रही है। साथ ही, यह भी खंगाला जा रहा है कि इन लोगों ने इस तरह से किन-किन अन्य व्यापारियों को अपना शिकार बनाया है।
व्यापारियों के लिए बड़ी चेतावनी
इस घटना के बाद से आगरा और आसपास के व्यापारिक मंडलों में हड़कंप मच गया है। पुलिस प्रशासन ने सभी व्यापारियों और कारोबारियों से अपील की है कि अनजान या नए ग्राहकों के साथ बड़े लेन-देन के दौरान पूरी सतर्कता बरतें। भुगतान लेते समय केवल ऊपर के नोटों को देखकर भरोसा न करें, बल्कि पूरी गड्डी की अच्छी तरह जांच-परख अवश्य करें, ताकि इस तरह के शातिर ठगों के मंसूबों को समय रहते नाकाम किया जा सके।