एम्स नागपुर में सुरक्षा पर उठे गंभीर सवाल
देश के प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्थानों में शुमार अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) नागपुर एक बार फिर गंभीर सुरक्षा और कानून व्यवस्था की स्थिति को लेकर चर्चा में है। अस्पताल के क्रिटिकल केयर यूनिट यानी आईसीयू के भीतर ड्यूटी पर तैनात एक डॉक्टर के साथ मारपीट की गई है। इस घटना के बाद से पूरे मेडिकल स्टाफ में भारी रोष व्याप्त है और संस्थान के लगभग 400 रेजिडेंट डॉक्टरों ने अनिश्चितकालीन रूप से ओपीडी (OPD) सेवाओं का बहिष्कार कर दिया है।
घटना की जानकारी मिलते ही अस्पताल प्रशासन में हड़कंप मच गया। डॉक्टरों का कहना है कि जब तक आरोपी की तत्काल गिरफ्तारी नहीं होती और अस्पताल परिसर में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं किए जाते, तब तक उनका यह विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा। इस अचानक हुए कार्य बहिष्कार के कारण दूर-दराज से इलाज कराने आए मरीजों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
आखिर क्या है पूरा मामला?
प्राप्त जानकारी के अनुसार, घटना बीती रात एम्स नागपुर के आईसीयू वार्ड के अंदर घटी। एक मरीज के तीमारदार ने किसी बात को लेकर अपनी सुध-बुध खो दी और ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टर के साथ बदसलूकी शुरू कर दी। बात इतनी बढ़ गई कि आरोपी ने डॉक्टर पर शारीरिक हमला कर दिया। आईसीयू जैसा संवेदनशील इलाका, जहां मरीजों की जान बचाने के लिए हर सेकंड की कीमत होती है, वहां इस तरह की हिंसा होना चिकित्सा जगत की सुरक्षा पर एक बड़ा काला धब्बा है।
हमले के तुरंत बाद साथी डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ ने बीच-बचाव किया, लेकिन तब तक आरोपी वहां से फरार होने में कामयाब रहा। घटना के बाद से पीड़ित डॉक्टर सदमे में हैं और पूरा मेडिकल समुदाय इस बात से आहत है कि जान बचाने वाले कोरोना योद्धाओं और डॉक्टरों पर इस प्रकार के हमले थमने का नाम नहीं ले रहे हैं।
400 डॉक्टरों का फूटा गुस्सा, ओपीडी सेवाएं पूरी तरह ठप
इस कायराना हरकत के विरोध में एम्स नागपुर के रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन (RDA) ने कड़ा रुख अपनाया है। सुबह होते ही करीब 400 डॉक्टरों ने सामूहिक रूप से ओपीडी सेवाओं का बहिष्कार करने का ऐलान कर दिया। डॉक्टरों का कहना है कि जब तक डॉक्टर अस्पताल के अंदर सुरक्षित महसूस नहीं करेंगे, तब तक वे सामान्य रूप से अपने कर्तव्यों का निर्वहन नहीं कर सकते।
आंदोलनकारी डॉक्टरों ने अपनी मुख्य मांगों में निम्नलिखित बातें रखी हैं:
- तत्काल गिरफ्तारी: डॉक्टर पर हमला करने वाले आरोपी को पुलिस तुरंत गिरफ्तार करे और उस पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए।
- सुरक्षा के कड़े इंतजाम: आईसीयू और इमरजेंसी वार्ड्स में बाउंसर या सुरक्षा गार्डों की तैनाती बढ़ाई जाए।
- प्रवेश नियंत्रण: तीमारदारों के लिए अस्पताल परिसर में पास सिस्टम को बेहद सख्त किया जाए ताकि कोई भी unauthorized व्यक्ति संवेदनशील क्षेत्रों में प्रवेश न कर सके।
प्रशासन और पुलिस की कार्रवाई
मामले की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंच चुकी है और अस्पताल प्रशासन के साथ उच्च स्तरीय बैठकें की जा रही हैं। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि अस्पताल के सीसीटीवी फुटेज को खंगाला जा रहा है ताकि आरोपी की पहचान सुनिश्चित की जा सके। पुलिस ने आश्वासन दिया है कि आरोपी को जल्द ही हिरासत में ले लिया जाएगा।
वहीं, एम्स नागपुर के प्रबंधन ने भी एक आधिकारिक बयान जारी कर इस घटना की कड़ी निंदा की है। प्रबंधन का कहना है कि डॉक्टरों की सुरक्षा उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है और वे इस मामले में पुलिस के साथ पूरी तरह से सहयोग कर रहे हैं। हालांकि, डॉक्टरों का कहना है कि केवल आश्वासनों से काम नहीं चलेगा, बल्कि जमीन पर ठोस सुरक्षा उपाय दिखने चाहिए।
मरीजों की बढ़ी मुश्किलें
डॉक्टरों की इस हड़ताल और ओपीडी बंद होने का सबसे बड़ा खामियाजा दूर-दराज के ग्रामीण इलाकों से आने वाले गरीब मरीजों को भुगतना पड़ रहा है। नागपुर समेत आसपास के जिलों से बड़ी संख्या में मरीज एम्स में इलाज की उम्मीद लेकर पहुंचते हैं। ओपीडी सेवाएं बंद होने की वजह से कई मरीजों को बिना इलाज के ही वापस लौटना पड़ रहा है या फिर निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ रहा है। हालांकि, अस्पताल प्रशासन ने यह स्पष्ट किया है कि आईसीयू और इमरजेंसी सेवाएं सुचारू रूप से चालू रखी गई हैं ताकि गंभीर रूप से बीमार मरीजों की जान जोखिम में न पड़े।
देशभर में डॉक्टरों की सुरक्षा का पुराना सवाल
यह कोई पहली बार नहीं है जब देश के किसी अस्पताल में डॉक्टरों के साथ मारपीट की घटना सामने आई हो। इससे पहले भी पश्चिम बंगाल, दिल्ली, महाराष्ट्र और देश के अन्य हिस्सों में इस तरह के मामले सामने आते रहे हैं। हर बार घटना के बाद सुरक्षा के कड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन कुछ दिनों बाद स्थितियां फिर से जस की तस हो जाती हैं। इस घटना ने एक बार फिर से 'हेल्थकेयर प्रोफेशनल्स प्रोटेक्शन एक्ट' को और अधिक सख्ती से लागू करने की आवश्यकता को रेखांकित कर दिया है।
एम्स नागपुर के डॉक्टर अब आर-पार के मूड में हैं। उनका साफ कहना है कि जब तक न्याय नहीं मिलता, उनका संघर्ष जारी रहेगा। इस पूरे घटनाक्रम पर प्रशासन की अगली कार्रवाई क्या होगी, इस पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं।