महाराष्ट्र के मराठवाडा क्षेत्र में मानसून की बेरुखी और बारिश की कमी ने किसानों की कमर तोड़ दी है। खेतों में लहलहाने वाली फसलें सूख चुकी हैं और कुओं का जलस्तर लगातार नीचे जा रहा है। इस गंभीर संकट के बीच हालात का जमीनी स्तर पर आकलन करने के लिए एक उच्चस्तरीय केंद्रीय दल छत्रपति संभाजीनगर पहुंच चुका है। यह दौरा आज यानी 8 अक्टूबर से शुरू होकर 10 अक्टूबर तक चलेगा, जिस दौरान दल संभाजीनगर के अलावा पड़ोसी जिलों जालना और बीड का भी सघन दौरा करेगा।
मराठवाडा में गहराया जल और कृषि संकट
इस साल बारिश के मौसम में अनिश्चितता के कारण मराठवाडा के कई इलाकों में सूखे जैसे हालात पैदा हो गए हैं। किसानों की खरीफ की फसलें या तो उग नहीं पाईं या फिर तेज धूप और पानी की कमी के चलते बर्बाद हो गईं। ग्रामीण इलाकों में पीने के पानी का संकट भी गहराने लगा है। स्थानीय प्रशासन ने शुरुआती रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंप दी थी, जिसके आधार पर केंद्र सरकार ने इस अंतर-मंत्रालय केंद्रीय दल (IMCT) को जमीनी हकीकत परखने के लिए भेजा है।
केंद्रीय टीम का मुख्य उद्देश्य किसानों के नुकसान का सही अनुमान लगाना और उन क्षेत्रों की पहचान करना है जहां तत्काल प्रभाव से राहत कार्यों की आवश्यकता है। संभाजीनगर सर्किट हाउस में स्थानीय प्रशासनिक अधिकारियों के साथ एक अहम बैठक के बाद टीम ने सीधे प्रभावित खेतों का रुख किया।
तीन दिवसीय दौरे का पूरा कार्यक्रम
प्राप्त आधिकारिक जानकारी के अनुसार, केंद्रीय दल का यह तीन दिवसीय दौरा बेहद व्यस्त और विस्तृत रहने वाला है:
- पहला दिन (8 अक्टूबर): छत्रपति संभाजीनगर जिले के अति-प्रभावित तालुकों का दौरा, सूखे से बर्बाद हुई फसलों का प्रत्यक्ष निरीक्षण और किसानों से बातचीत।
- दूसरा दिन (9 अक्टूबर): जालना जिले में जल स्रोतों, तालाबों और भूजल स्तर की स्थिति की समीक्षा। साथ ही स्थानीय जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अमले के साथ उच्चस्तरीय बैठक।
- तीसरा दिन (10 अक्टूबर): बीड जिले में सूखे के प्रभाव का आकलन और अंतिम चरण की रिपोर्ट तैयार करने के लिए समीक्षा बैठक।
NDRF और केंद्रीय राहत पैकेज पर टिकी उम्मीदें
इस तीन दिवसीय दौरे के समापन के बाद केंद्रीय टीम अपनी विस्तृत रिपोर्ट केंद्र सरकार को सौंपेगी। इसी रिपोर्ट के आधार पर नेशनल डिजास्टर रिस्पांस फंड (NDRF) के तहत महाराष्ट्र के लिए वित्तीय सहायता और राहत पैकेज का अंतिम स्वरूप तय किया जाएगा। किसानों और स्थानीय नागरिकों को उम्मीद है कि इस दौरे से उन्हें जल्द ही आर्थिक राहत और सूखे से निपटने के लिए ठोस मदद मिलेगी।
राज्य सरकार भी इस केंद्रीय दल के दौरे को बेहद अहम मान रही है, क्योंकि प्रशासन का मानना है कि केंद्र की मुहर लगने के बाद प्रभावित जिलों में राहत कार्यों में तेजी आएगी। फिलहाल, पूरे मराठवाडा क्षेत्र के किसानों की निगाहें केंद्रीय टीम के इस दौरे और उसके बाद मिलने वाली सहायता पर टिकी हुई हैं।