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AIIMS का बड़ा कदम: देश में अंधापन रोकने के लिए शुरू हुआ स्पेशल ट्रेनिंग प्रोग्राम

AIIMS का बड़ा कदम: देश में अंधापन रोकने के लिए शुरू हुआ स्पेशल ट्रेनिंग प्रोग्राम

क्या आपने कभी सोचा है कि देश में तेजी से बढ़ती रेटिना से जुड़ी बीमारियां और उनके कारण होने वाला अंधापन कितनी बड़ी चुनौती बनता जा रहा है? आधुनिक जीवनशैली और डायबिटीज (मधुमेह) के बढ़ते मामलों के बीच भारत के स्वास्थ्य ढांचे के लिए यह एक गंभीर चिंता का विषय है। इसी चुनौती से पार पाने के लिए देश के सबसे बड़े चिकित्सीय संस्थान यानी अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) नई दिल्ली ने एक बेहद अहम और क्रांतिकारी कदम उठाया है।

AIIMS ने हाल ही में राष्ट्रीय रेटिना कौशल विकास केंद्र में एक अत्याधुनिक 'मॉड्यूलेटेड रेटिना प्रशिक्षण कार्यक्रम' (Modulated Retina Training Program) का औपचारिक शुभारंभ किया है। यह पहल न केवल चिकित्सा जगत में बल्कि देश के आम नागरिकों के स्वास्थ्य भविष्य के लिए भी एक मील का पत्थर साबित होने जा रही है। आइए जानते हैं इस पूरे कार्यक्रम की हर एक बारीक बात, जो आपके और आपके परिवार के लिए जानना बेहद जरूरी है।

अपनी तरह की देश की पहली अनूठी पहल

विशेषज्ञों के मुताबिक, यह अपनी तरह की पहली ऐसी सुविधा है जिसका मुख्य उद्देश्य पूरे भारत में रेटिना संबंधी देखभाल और नैदानिक (Clinical) क्षमताओं को मजबूत करना है। आज के समय में देश के कई हिस्सों में रेटिना विशेषज्ञों की कमी और आधुनिक उपकरणों तक पहुंच न होने के कारण मरीजों को समय पर सही इलाज नहीं मिल पाता। AIIMS का यह नया प्रशिक्षण केंद्र इस खाई को पाटने का काम करेगा।

इस लॉन्च के दौरान नेत्र विज्ञान विभाग की जानी-मानी प्रोफेसर डॉ. राधिका टंडन ने इस पहल के पीछे की सोच को साझा किया। उन्होंने बताया कि इस विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम के जरिए देश भर के नेत्र रोग विशेषज्ञों को अत्यधिक संरचित (Structured), व्यावहारिक (Hands-on) प्रशिक्षण और उन्नत बुनियादी ढांचे (Advanced Infrastructure) तक सीधी पहुंच मिल सकेगी।

"मधुमेह (Diabetes) और अन्य गंभीर रेटिना रोगों की वजह से आज देश में अनगिनत लोगों की आंखों की रोशनी हमेशा के लिए चली जाती है। हालांकि, अगर इन बीमारियों की पहचान शुरुआती दौर में ही कर ली जाए और उचित उपचार मिल जाए, तो इस तरह के अंधेपन को पूरी तरह रोका जा सकता है।" - डॉ. राधिका टंडन, प्रोफेसर, नेत्र विज्ञान विभाग, AIIMS

क्या है इस ट्रेनिंग प्रोग्राम का मुख्य उद्देश्य?

आकाशवाणी समाचार के साथ हुई एक विशेष बातचीत में डॉ. टंडन ने इस मॉड्यूलेटेड प्रोग्राम के विजन पर विस्तार से रोशनी डाली। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस पूरे पैकेज को इस तरह से डिजाइन किया गया है ताकि नेत्र रोग विशेषज्ञों को निम्नलिखित मोर्चों पर दक्ष बनाया जा सके:

  • रेटिना रोगों से पीड़ित रोगियों का सटीक और समय पर निदान (Diagnosis) करना।
  • बीमारी की शुरुआती स्टेज में ही उसकी पहचान करने की क्षमता विकसित करना।
  • मरीजों के लिए एक प्रभावी और व्यापक उपचार योजना (Treatment Plan) तैयार करना।
  • छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों तक आधुनिक रेटिना केयर की पहुंच आसान बनाना।

डॉक्टर रोहन चावला ने बताए इस प्रोग्राम के तकनीकी पहलू

रेटिना केंद्र के प्रोफेसर रोहन चावला ने भी इस कार्यक्रम की उपयोगिता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि यह कस्टमाइज्ड मॉड्यूल आधारित रेटिना ट्रेनिंग प्रोग्राम देश के डॉक्टर्स को रेटिना संबंधी जटिलताओं के बारे में गहरा ज्ञान देगा। जब हमारे देश के नेत्र विशेषज्ञ इन आधुनिक तकनीकों से लैस होंगे, तो वे अपने मरीजों का बेहतर इलाज कर पाएंगे और रेटिना रोगों के कारण होने वाले अंधेपन के ग्राफ को तेजी से नीचे लाने में मदद मिलेगी।

अगले तीन वर्षों का है बड़ा लक्ष्य

यह योजना केवल कुछ महीनों की नहीं है, बल्कि इसका एक लंबा और ठोस रोडमैप तैयार किया गया है। आधिकारिक जानकारी के अनुसार, यह केंद्र अगले तीन वर्षों में सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणालियों (Public Health Systems) से जुड़े नेत्र रोग विशेषज्ञों को विशेष रूप से प्रशिक्षित करेगा।

इस ट्रेनिंग सिस्टम को इस प्रकार तैयार किया गया है कि देश के सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में तैनात डॉक्टर्स भी रेटिना से जुड़ी समस्याओं का शुरुआती दौर में ही पता लगा सकें, उनका सही निदान कर सकें और मरीजों को बिना किसी देरी के उचित प्रबंधन दे सकें।

आम जनता के लिए क्यों है यह खबर बेहद अहम?

अगर आपके परिवार में भी कोई डायबिटीज का मरीज है, या बुजुर्ग हैं जिन्हें आंखों से धुंधला दिखने की शिकायत है, तो यह खबर आपको राहत देने वाली है। अभी तक देश में रेटिना के आधुनिक इलाज के लिए बड़े महानगरों या चुनिंदा बड़े अस्पतालों पर ही निर्भर रहना पड़ता था। लेकिन AIIMS के इस कदम से आने वाले दिनों में देश के जिला स्तर के अस्पतालों और पब्लिक हेल्थकेयर सिस्टम में भी रेटिना के बेहतरीन डॉक्टर्स उपलब्ध होंगे, जिससे आम आदमी को महंगा इलाज कराने के लिए दर-दर नहीं भटकना पड़ेगा।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

Q1: AIIMS नई दिल्ली द्वारा शुरू किए गए इस नए कार्यक्रम का नाम क्या है?

उत्तर: इस कार्यक्रम का नाम 'मॉड्यूलेटेड रेटिना प्रशिक्षण कार्यक्रम' (Modulated Retina Training Program) है, जिसे राष्ट्रीय रेटिना कौशल विकास केंद्र में शुरू किया गया है।

Q2: इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का मुख्य लक्ष्य किसे फायदा पहुंचाना है?

उत्तर: यह कार्यक्रम मुख्य रूप से सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणालियों से जुड़े नेत्र रोग विशेषज्ञों (Ophthalmologists) के लिए है, ताकि वे रेटिना रोगों का शीघ्र पता लगाकर मरीजों का सही इलाज कर सकें।

Q3: यह ट्रेनिंग प्रोग्राम कितने समय के लिए चलाया जाएगा?

उत्तर: यह विशेष प्रशिक्षण प्रणाली अगले तीन वर्षों तक लगातार जारी रहेगी, जिसके तहत देश भर के डॉक्टर्स को आधुनिक तकनीकों में प्रशिक्षित किया जाएगा।

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काव्या त्रिपाठी

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Senior Editor

काव्या त्रिपाठी बिजनेस और टेक्नोलॉजी की जटिल दुनिया को सरल और स्पष्ट रूप में प्रस्तुत करने के लिए जानी जाती हैं। वे आर्थिक बदलाव, स्टार्टअप इकोसिस्...

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