असम की राजनीति में एक बार फिर बड़ा उलटफेर देखने को मिल रहा है। राज्य की हॉट सीट मानी जाने वाली नगांव लोकसभा सीट के उपचुनाव के लिए मतगणना जारी है और शुरुआती रुझान राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गए हैं। शुरुआती आंकड़ों के मुताबिक, भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने इस महत्वपूर्ण मुकाबले में शुरुआती बढ़त हासिल कर ली है, जबकि मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस और एआईयूडीएफ (AIUDF) फिलहाल पीछे नजर आ रहे हैं।
क्यों खाली हुई थी नगांव सीट?
इस उपचुनाव के पीछे की राजनीतिक पृष्ठभूमि बेहद दिलचस्प है। वर्ष 2019 और फिर 2024 के आम चुनावों में कांग्रेस के टिकट पर नगांव लोकसभा सीट से जीत दर्ज करने वाले कद्दावर नेता प्रद्युत बोरदोलोई ने इस साल मार्च के महीने में अपनी संसद सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद उन्होंने पाला बदलते हुए बीजेपी का दामन थाम लिया और अप्रैल 2026 में हुए असम विधानसभा चुनाव में दिसपुर विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा तथा शानदार जीत हासिल की।
प्रद्युत बोरदोलोई के विधानसभा पहुंचने और लोकसभा सीट से इस्तीफा देने के कारण नगांव सीट खाली हो गई थी, जिसके चलते यहां उपचुनाव कराना अनिवार्य हो गया था। इस खाली हुई सीट को भरने के लिए सभी प्रमुख राजनीतिक दलों ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी थी और अब मतगणना के दौरान यह साफ होता दिख रहा है कि जनता किसके पक्ष में अपना जनादेश दे रही है।
राजनीतिक समीकरण और दलों की स्थिति
नगांव लोकसभा सीट पर हमेशा से कड़ा मुकाबला देखने को मिला है। कांग्रेस के पारंपरिक गढ़ के रूप में पहचानी जाने वाली इस सीट पर इस बार बीजेपी की पैठ मजबूत होती दिख रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि प्रद्युत बोरदोलोई के पाला बदलने के बाद से क्षेत्र के राजनीतिक समीकरणों में बड़ा बदलाव आया है।
- बीजेपी (BJP): पार्टी ने इस सीट पर अपनी जीत सुनिश्चित करने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा दिया था। शुरुआती रुझानों में पार्टी की बढ़त कार्यकर्ताओं में उत्साह भर रही है।
- कांग्रेस (Congress): अपने पुराने गढ़ को बचाने के लिए कांग्रेस ने यहां पूरी ताकत झोंकी थी, लेकिन शुरुआती रुझानों में पार्टी पिछड़ती नजर आ रही है।
- एआईयूडीएफ (AIUDF): क्षेत्रीय समीकरणों के लिहाज से महत्वपूर्ण यह दल भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराने की कोशिश में है, हालांकि शुरुआती दौर में उसे अपेक्षित बढ़त नहीं मिल पाई है।
मतगणना केंद्रों पर कड़ी सुरक्षा
वोटों की गिनती को पारदर्शी और शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए निर्वाचन आयोग ने कड़े इंतजाम किए हैं। मतगणना केंद्रों के बाहर सुरक्षा बलों की भारी तैनाती की गई है। किसी भी अप्रिय घटना से बचने के लिए धारा 144 जैसे एहतियाती कदम भी उठाए गए हैं। राजनीतिक दलों के समर्थक और नेता मतगणना केंद्र के बाहर टकटकी लगाए बैठे हैं और हर एक राउंड के नतीजे के साथ उनकी धड़कनें तेज होती जा रही हैं।
जनता का मूड और आगे की तस्वीर
जैसे-जैसे मतगणना के अगले दौर आगे बढ़ेंगे, तस्वीर और अधिक स्पष्ट होती जाएगी। यह उपचुनाव न केवल राजनीतिक दलों के लिए अपनी ताकत दिखाने का जरिया है, बल्कि यह भी तय करेगा कि आने वाले समय में असम की राजनीति किस दिशा में करवट लेगी। क्या बीजेपी इस सीट को अपने नाम कर इतिहास रचेगी या फिर विपक्षी दल कोई बड़ा उलटफेर करने में कामयाब होंगे? इन तमाम सवालों के जवाब आज शाम तक पूरी तरह से साफ हो जाएंगे।
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