महाराष्ट्र के अमरावती जिले से एक बड़ी और राहत भरी खबर सामने आ रही है। अमरावती के मशहूर पर्यटन स्थल चिखलदरा के पास एक बड़ा सड़क हादसा होते-होते टल गया। घटांग-बिहाली मार्ग पर रविवार सुबह एक एसटी बस के अचानक ब्रेक फेल हो गए। गनीमत यह रही कि सड़क किनारे बनी सुरक्षा दीवार ने काल बनकर सामने आई गहरी खाई से बस को बचा लिया। इस घटना के बाद से परिवहन महकमे में हड़कंप मच गया है और तकनीकी सुरक्षा को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
घटांग-बिहाली मार्ग पर हुआ हादसा
प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह घटना रविवार सुबह के वक्त अमरावती जिले के चिखलदरा अंतर्गत आने वाले दुर्गम घटांग-बिहाली मार्ग पर घटी। पहाड़ी इलाका होने के कारण इस मार्ग पर सफर करना वैसे ही काफी जोखिम भरा माना जाता है। संकरे रास्ते, तीखे मोड़ और गहरी खाइयां इस मार्ग की खूबी और खतरा दोनों हैं। रविवार की सुबह जब यह एसटी बस इस रास्ते से गुजर रही थी, तभी अचानक वाहन के ब्रेक ने काम करना बंद कर दिया।
चालक को जब यह अहसास हुआ कि बस के ब्रेक फेल हो चुके हैं, तो उसके पैरों तले जमीन खिसक गई। ढलान और मोड़ वाले इस रास्ते पर ब्रेक का साथ छोड़ना किसी बड़े खतरे का संकेत था। हालांकि, चालक ने अपनी सूझबूझ का परिचय देते हुए वाहन को नियंत्रित करने की पूरी कोशिश की, लेकिन ढलान की वजह से बस की रफ्तार पर काबू पाना मुमकिन नहीं हो पा रहा था।
मरम्मत के बाद परतवाड़ा डिपो लाई जा रही थी बस
इस पूरी घटना से जुड़ा एक और चौंकाने वाला पहलू सामने आया है। बताया जा रहा है कि यह एसटी बस आज अचानक खराब नहीं हुई थी, बल्कि हादसे से दो दिन पहले ही घटांग के पास तकनीकी खराबी के कारण बंद पड़ गई थी। बस में आई तकनीकी खामी के चलते इसे वहीं सड़क किनारे खड़ा करना पड़ा था।
मामले की गंभीरता को देखते हुए रविवार को परतवाड़ा डिपो से विशेष रूप से एक मैकेनिक को मौके पर भेजा गया था। मैकेनिक ने काफी देर तक बस की बारिकी से जांच की और जरूरी दुरुस्ती (रिपेयरिंग) का काम पूरा किया। जब मैकेनिक को यह तल्ली हो गई कि बस अब पूरी तरह से ठीक है और चलने के लिए तैयार है, तो चालक, वाहक (कंडक्टर) और वही मैकेनिक बस में सवार होकर उसे वापस परतवाड़ा डिपो की तरफ ले जा रहे थे। लेकिन डिपो पहुंचने से पहले ही रास्ते में यह भयानक तकनीकी चूक फिर से सामने आ गई।
सामने थी मौत की खाई, सुरक्षा दीवार बनी फरिश्ता
जिस जगह पर बस के ब्रेक फेल हुए, वह सड़क का हिस्सा बेहद खतरनाक था। बस के ठीक सामने सैकड़ों फीट गहरी खाई मुंह बाए खड़ी थी। अगर बस अनियंत्रित होकर उस खाई में गिर जाती, तो अंदर बैठे चालक और अन्य साथियों का बचना नामुमकिन सा था।
लेकिन कहते हैं ना कि जाको राखे साइयां, मार सके न कोय। सड़क किनारे शासन द्वारा बनाई गई मजबूत सुरक्षा दीवार (क्रैश बैरियर) इस दौरान भगवान बनकर सामने आई। अनियंत्रित बस पूरी रफ्तार के साथ सीधे इस सुरक्षा दीवार से जा टकराई। टक्कर इतनी जोरदार थी कि बस का अगला हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया, लेकिन दीवार से टकराने के कारण बस की गति शून्य हो गई और वह खाई में गिरने से ऐन वक्त पर बच गई।
बाल-बाल बचे चालक, वाहक और मैकेनिक
हादसा इतना भयानक था कि अगर बस कुछ इंच और आगे निकल जाती तो बड़ा अनर्थ हो सकता था। गनीमत यह रही कि इस दुर्घटना में बस में सवार चालक, कंडक्टर और मैकेनिक में से किसी को भी एक खरोंच तक नहीं आई। सभी लोग पूरी तरह सुरक्षित हैं। टक्कर की आवाज सुनते ही आसपास के लोग भी सहम गए, लेकिन जब उन्होंने देखा कि तीनों लोग सुरक्षित बाहर आ गए हैं, तो उन्होंने राहत की सांस ली।
तकनीकी जांच और लापरवाही पर उठ रहे सवाल
इस घटना ने सार्वजनिक परिवहन निगम की बसों की मेंटेनेंस प्रक्रिया पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है। सवाल यह उठ रहा है कि जब दो दिन पहले डिपो से आए मैकेनिक ने बस की पूरी तरह से मरम्मत कर दी थी, तो चंद किलोमीटर का सफर तय करने के बाद ही दोबारा ब्रेक फेल कैसे हो गए? क्या रिपेयरिंग के दौरान कोई बड़ी तकनीकी अनदेखी की गई थी? या फिर बस के स्पेयर पार्ट्स अब इतने पुराने हो चुके हैं कि पहाड़ी रास्तों का दबाव सहन नहीं कर पा रहे हैं?
- क्या डिपो के मैकेनिक की लापरवाही थी?
- पहाड़ी मार्गों पर चलने वाली बसों की फिटनेस जांच नियमित रूप से क्यों नहीं होती?
- क्या भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कोई सख्त ऑडिट प्रक्रिया अपनाई जाएगी?
इन तमाम सवालों के जवाब तलाशने के लिए परिवहन विभाग के उच्च अधिकारियों को इस मामले की गहराई से जांच करनी चाहिए। स्थानीय नागरिकों और यात्रियों ने भी मांग की है कि डिपो से निकलने वाली हर एक बस की फिटनेस की दोहरी जांच होनी ताकि भविष्य में किसी की जान पर इस तरह का खतरा न मंडराए।
निष्कर्ष
अमरावती के चिखलदरा में हुआ यह हादसा भले ही एक टला हुआ संकट हो, लेकिन यह हमें यह सोचने पर मजबूर करता है कि जरा सी तकनीकी लापरवाही किसी की भी जान ले सकती है। सुरक्षा दीवार की मौजूदगी ने आज तीन जिंदगियों को बचा लिया, लेकिन हर बार किस्मत का साथ मिले यह जरूरी नहीं है। प्रशासन को इस घटना से सबक लेते हुए अमरावती और आसपास के पहाड़ी रूटों पर चलने वाली सभी पुरानी बसों की तुरंत विशेष तकनीकी जांच करानी चाहिए।