भारतीय कॉर्पोरेट जगत में एक बहुत बड़ा और दूरगामी बदलाव देखने को मिल रहा है। देश और दुनिया के बड़े औद्योगिक घरानों में अब अगली पीढ़ी यानी नई लीडरशिप को कमान सौंपने का दौर तेजी से चल रहा है। इसी कड़ी में, खनन और धातु क्षेत्र की दिग्गज वैश्विक कंपनी वेदांता ग्रुप के चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने अपने विशालकाय साम्राज्य के उत्तराधिकारी के रूप में अपनी बेटी के नाम पर मुहर लगा दी है। पटना की गलियों से निकलकर लंदन के मफेयर रेजिडेंस तक का सफर तय करने वाले अरबपति उद्योगपति अनिल अग्रवाल ने आधिकारिक तौर पर ऐलान कर दिया है कि उनकी बेटी प्रिया अग्रवाल हेब्बर आने वाले समय में इस छह लाख करोड़ रुपये के कारोबार की मुख्य कमान संभालेंगी।
पटना के साधारण लड़के से वैश्विक दिग्गज बनने की कहानी
अनिल अग्रवाल की यह सफलता किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है। आज भले ही वह दुनिया के सबसे बड़े औद्योगिक घरानों में गिने जाते हैं और उनकी नेटवर्थ 6.3 बिलियन डॉलर (लगभग 6 लाख करोड़ रुपये) से अधिक है, लेकिन उनके सफर की शुरुआत बेहद साधारण परिस्थितियों में हुई थी। महज 19 वर्ष की उम्र में अपने सपनों को पंख देने और करियर की तलाश में वह पटना छोड़कर मुंबई चले गए थे। इसके बाद नब्बे के दशक में अमेरिका और यूरोप की यात्राओं ने उनके बिजनेस विजन को पूरी तरह बदल दिया और उन्हें वैश्विक मंच पर एक बड़ी पहचान दिलाई। आज उनका परिवार मुख्य रूप से लंदन में रहता है, लेकिन उनकी जड़ें और माटी का लगाव हमेशा से भारत और विशेषकर बिहार से जुड़ा रहा है。
कौन हैं प्रिया अग्रवाल हेब्बर? जिन्हें सौंपी जा रही है विरासत
अनिल अग्रवाल की यह उत्तराधिकारी कोई और नहीं बल्कि उनकी एकमात्र बेटी प्रिया अग्रवाल हेब्बर हैं। इस साल जनवरी के महीने में अपने भाई अग्निवेश अग्रवाल के असामयिक और दुखद निधन के बाद, प्रिया ने न केवल अपने परिवार को भावनात्मक संबल दिया, बल्कि व्यावसायिक मोर्चे पर भी चट्टान की तरह अपने पिता के साथ खड़ी रहीं। वर्तमान में प्रिया वेदांता समूह में नॉन-एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर के तौर पर बेहद महत्वपूर्ण और रणनीतिक जिम्मेदारियां निभा रही हैं। उनकी कार्यशैली और दूरदर्शिता को देखते हुए ही अनिल अग्रवाल ने उन्हें इस 200 साल की लंबी अवधि की विजन और रणनीति के तहत आगे बढ़ाने का फैसला किया है।
हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड की चेयरपर्सन के रूप में बड़ी भूमिका
प्रिया अग्रवाल हेब्बर केवल वेदांता के बोर्ड तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वह भारत की सबसे अहम और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण कंपनियों में शुमार 'हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड' की चेयरपर्सन का पद भी संभाल रही हैं। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि हिंदुस्तान जिंक न केवल भारत की सबसे बड़ी बल्कि दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी इंटीग्रेटेड जिंक (जस्ता) उत्पादक कंपनी है। इस तरह के भारी-भरकम और जटिल ग्लोबल बिजनेस को संभालना यह साबित करता है कि प्रिया नेतृत्व के हर पैमाने पर खरी उतरती हैं।
बिहार से गहरा नाता और 'नंद घर' परियोजना का कमाल
व्यवसायिक उपलब्धियों के साथ-साथ प्रिया अग्रवाल हेब्बर सामाजिक सरोकारों में भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लेती हैं। उनका बिहार से एक खास और भावनात्मक लगाव रहा है। उनके नेतृत्व में वेदांता समूह ने बिहार में सामाजिक विकास के मोर्चे पर ऐतिहासिक कदम उठाए हैं। जुलाई 2026 में वेदांता समूह ने बिहार सरकार के महिला एवं बाल विकास विभाग के साथ एक अहम समझौते पर हस्ताक्षर किए। इस एमओयू के तहत राज्य की 1,000 आंगनवाड़ी केंद्रों को आधुनिक और हाई-टेक 'नंद घर' में तब्दील करने का बीड़ा उठाया गया है।
क्या हैं नंद घर की विशेषताएं?
प्रिया के मार्गदर्शन में तैयार हो रहे ये आधुनिक 'नंद घर' किसी कॉरपोरेट ऑफिस या प्राइवेट प्ले-स्कूल से कम नहीं हैं। इन केंद्रों की प्रमुख विशेषताएं निम्नलिखित हैं:
- 24 घंटे सोलर बिजली: बिजली कटौती की समस्या से निजात पाने के लिए इन केंद्रों पर निरंतर सौर ऊर्जा की व्यवस्था की गई है।
- शुद्ध पेयजल और स्वच्छता: बच्चों और महिलाओं के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए वॉटर प्यूरीफायर और अत्याधुनिक स्वच्छ शौचालय बनाए गए हैं।
- डिजिटल शिक्षा: बच्चों की शुरुआती और बुनियादी शिक्षा को रोचक बनाने के लिए स्मार्ट टीवी, ऑडियो-विजुअल किट्स और टैबलेट्स का इस्तेमाल किया जा रहा है।
इस प्रोजेक्ट के जरिए बिहार के 70,000 से अधिक बच्चों और महिलाओं को सीधा लाभ मिल रहा है, जो महिला सशक्तीकरण और बाल विकास की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम माना जा रहा है।
भविष्य की मजबूत नींव और पारिवारिक विरासत
अनिल अग्रवाल और प्रिया अग्रवाल हेब्बर की यह जोड़ी अब वेदांता को एक नए युग में ले जाने की तैयारी कर रही है। उद्योग जगत के जानकारों का मानना है कि आने वाले दशकों में सस्टेनेबिलिटी, ग्रीन एनर्जी और अत्याधुनिक तकनीक पर वेदांता का फोकस और अधिक तेज होगा। प्रिया के पास जिस तरह का ग्लोबल एक्सपोजर और जमीनी सामाजिक कार्यों का अनुभव है, वह इस विशाल साम्राज्य को और अधिक ऊंचाई पर ले जाने के लिए पूरी तरह सक्षम है। बिहार की माटी से ताल्लुक रखने वाली इस बेटी के कंधों पर अब देश के सबसे बड़े औद्योगिक घरानों में से एक की जिम्मेदारी है, जिस पर पूरे देश की निगाहें टिकी हुई हैं।
