बनारस की गलियों में गूंजती करघों की खटर-पटर केवल एक साधारण आवाज नहीं है, बल्कि यह सदियों पुरानी सांस्कृतिक विरासत और पीढ़ियों से चले आ रहे हुनर के जीवंत होने का संगीत है। जब बात बनारसी सिल्क साड़ी के रेशमी और महीन धागों की आती है, तो उसमें केवल एक परिधान नहीं, बल्कि काशी की आत्मा बुनी होती है। इस पारंपरिक कला को अब अंतरराष्ट्रीय सीमाओं के पार एक नया क्षितिज मिल रहा है। उत्तर प्रदेश सरकार की दूरदर्शी नीतियों के चलते ग्रेटर नोएडा में आयोजित हो रहे प्रतिष्ठित 'उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो' (UPITS) में काशी के बुनकरों, शिल्पकारों और उद्यमियों ने अपनी धाक जमाने के लिए पूरी तैयारी कर ली है।
अंतरराष्ट्रीय मंच पर काशी की कला का जलवा
सितंबर 2026 के इन दिनों में ग्रेटर नोएडा का यह व्यापार महाकुंभ देश-विदेश के बड़े खरीदारों (Global Buyers) का केंद्र बना हुआ है। इस भव्य मंच पर काशी के जिला उद्योग प्रोत्साहन तथा उद्यमिता विकास केंद्र एवं हथकरघा और वस्त्र विभाग के संयुक्त प्रयासों से कुल 58 उद्यमी अपने विशेष स्टॉल सजाकर बैठे हैं। यह मंच स्थानीय स्तर पर सीपियों और करघों पर मेहनत करने वाले उन गुमनाम कारीगरों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है, जो अब तक बड़े बाजारों तक सीधे पहुंच नहीं बना पाते थे। अब वे दुनिया भर के खरीदारों से आमने-सामने रूबरू हो रहे हैं, जिससे उनके उत्पादों को उचित मूल्य और वैश्विक पहचान मिल रही है।

व्यापार शो में भाग ले रहे एक स्थानीय उद्यमी और बुनकर ने खुशी जाहिर करते हुए बताया, "योगी सरकार ने हमारे हस्तशिल्पियों के पसीने और मेहनत को वह मुकाम दिया है, जिसकी हमें हमेशा से तलाश थी। पहले हमें अपने उत्पादों को बेचने के लिए बिचौलियों पर निर्भर रहना पड़ता था, लेकिन इस अंतरराष्ट्रीय मंच ने सीधे दुनिया भर के बाजार के दरवाजे हमारे लिए खोल दिए हैं।"
ताने-बाने से लेकर सॉफ्ट स्टोन और कांच तक का अनोखा संगम
काशी की पहचान केवल सिल्क साड़ियों तक सीमित नहीं है। यहां की कला और शिल्प का दायरा बहुत व्यापक है, जिसकी बानगी इस ट्रेड शो में साफ तौर पर देखने को मिल रही है। आइए जानते हैं उन प्रमुख उत्पादों के बारे में जो इस समय वैश्विक बाजार का ध्यान अपनी ओर खींच रहे हैं:
- बनारसी सिल्क साड़ियां और ब्रोकेड: अपने भारी जरी के काम और बेहतरीन फिनिश के लिए मशहूर बनारसी साड़ियां और जंगला साड़ियां आज भी वैश्विक फैशन जगत की पहली पसंद बनी हुई हैं।
- सॉफ्ट स्टोन जाली वर्क (Soft Stone Jali Work): वाराणसी के कारीगरों की उंगलियों का कमाल इस कला में साफ दिखता है। पत्थर पर अत्यंत बारीकी से की गई जालीनुमा नक्काशी और कलात्मक डिजाइन देखने वाले को मंत्रमुग्ध कर देते हैं।
- ग्लास बीड्स (Glass Beads): कांच को रंग, आकार और अनोखे डिजाइन के जरिए आकर्षक मनकों का रूप दिया जाता है। इनका उपयोग आभूषणों और सजावटी वस्तुओं में बड़े पैमाने पर होता है।
- वुडन लेकर वेयर (Wooden Lacquer Ware): लकड़ी के खिलौने और सजावटी वस्तुएं, जो अपनी चमक और पारंपरिक फिनिश के लिए जानी जाती हैं, बच्चों से लेकर कला प्रेमियों को लुभा रही हैं।
- जरी-ज़रदोजी और हैंड एम्ब्रायडरी: कपड़ों पर सुई और धागे से उकेरी जाने वाली यह शाही कला आज भी अपनी चमक बिखेर रही है।
काशी के स्वाद का जादू भी ग्लोबल
शिल्प और कला के साथ-साथ काशी का जायका भी इस अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी अमिट छाप छोड़ रहा है। ट्रेड शो में आने वाले मेहमान केवल बनारसी साड़ियों को निहार नहीं रहे हैं, बल्कि वे काशी के पारंपरिक व्यंजनों के स्वाद में भी डूब रहे हैं।
वाराणसी के प्रसिद्ध बनारसी पान, मुंह में घुल जाने वाली तिरंगा बर्फी और पारंपरिक लौंगलता की मिठास विदेशी और देशी मेहमानों को अपनी ओर खींच रही है। यह पहली बार है जब हस्तशिल्प के साथ-साथ 'एक जिला एक उत्पाद' (ODOP) और 'एक जिला एक व्यंजन' (ODOC) की संकल्पना को एक ही छत के नीचे इतने बड़े पैमाने पर प्रदर्शित किया जा रहा है।
अधिकारियों की सीधी निगरानी में तैयार हुआ काशी का दल
इस पूरे आयोजन को सफल बनाने के लिए जिला प्रशासन और उद्योग विभाग ने महीनों पहले से तैयारियां शुरू कर दी थीं। उपायुक्त उद्योग (प्रवर्तन) हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग, वाराणसी, कुसुम ने मीडिया से साझा करते हुए बताया कि हथकरघा और वस्त्र विभाग के तहत 13 उद्यमी विशेष रूप से बनारसी साड़ी, स्टोल, ड्रेस मटेरियल और सूट सिल्क साड़ियों के स्टॉल के साथ मौजूद हैं।
वहीं, सहायक आयुक्त उद्योग केशव यादव ने जानकारी दी कि वाराणसी से कुल 45 से अधिक लोगों ने इसके लिए आधिकारिक पंजीकरण कराया था। इस दल में वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट (ODOP), एमएसएमई (MSME), जीआई (GI) उत्पाद धारक, प्रमुख निर्यातक, एक जिला एक व्यंजन से जुड़े लोग और मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना के तहत आगे बढ़ने वाली महिला उद्यमी भी शामिल हैं। महिला उद्यमियों की यह सक्रिय भागीदारी महिला सशक्तिकरण की एक मजबूत तस्वीर पेश कर रही है।
वैश्विक स्तर पर अर्थव्यवस्था को मिल रही मजबूती
जिला उद्योग प्रोत्साहन तथा उद्यमिता विकास केंद्र के उपायुक्त अभिषेक प्रियदर्शी का कहना है कि इस तरह के मंचों पर काशी की पूरी तस्वीर एक साथ उभर कर सामने आती है। इससे हमारे बुनकरों, शिल्पकारों और छोटे उद्यमियों को सीधे तौर पर ग्लोबल इकॉनमी से जुड़ने का मौका मिलता है। काशी की संकरी गलियों और पुश्तैनी करघों से निकला यह हुनर अब दुनिया के सबसे बड़े बाजारों में अपनी मजबूत पैठ बना चुका है।
यह ट्रेड शो इस बात का प्रमाण है कि यदि पारंपरिक कला को आधुनिक तकनीक, बेहतर मार्केटिंग और सही मंच मिल जाए, तो वह न केवल स्थानीय अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करती है, बल्कि देश का नाम पूरी दुनिया में रोशन करती है। आने वाले दिनों में इन उत्पादों की मांग और अधिक बढ़ने की उम्मीद है, जिससे काशी के हर घर में खुशहाली का नया दौर शुरू हो रहा है।