क्या दक्षिण एशिया की राजनीति में जल कूटनीति एक नया और खतरनाक मोड़ लेने जा रही है? पाकिस्तान की राह पर चलते हुए अब बांग्लादेश ने भी भारत के साथ एक संवेदनशील प्राकृतिक संसाधन—यानी 'गंगा के पानी'—के विवाद को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठाने के संकेत दिए हैं। अंतरिम सरकार के आने के बाद से ही ढाका और नई दिल्ली के बीच कूटनीतिक रिश्तों में जो अनिश्चितता का दौर शुरू हुआ था, वह अब पानी की बूंदों तक पहुंच गया है।
UN में जाने की तैयारी और 'गारंटी क्लॉज' का दांव
हाल ही में आई रिपोर्टों के मुताबिक, बांग्लादेश की अंतरिम सरकार और नीति निर्माता यह विचार कर रहे हैं कि गंगा जल संधि (Ganga Water Treaty) के कार्यान्वयन और इसके 'गारंटी क्लॉज' (Guarantee Clause) को लेकर भारत पर अंतरराष्ट्रीय दबाव बनाया जाए। ढाका के कुछ हलकों में यह चर्चा जोर पकड़ रही है कि यदि द्विपक्षीय बैठकों और वार्ताओं के जरिए उनकी मांगें पूरी नहीं होती हैं, तो इस मामले को संयुक्त राष्ट्र (UN) या अन्य अंतरराष्ट्रीय मंचों पर ले जाया जाए।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कूटनीतिक दबाव बनाने की एक सोची-समझी रणनीति हो सकती है। बांग्लादेश में राजनीतिक बदलाव के बाद से ही वहां की घरेलू राजनीति में भारत विरोधी बयानों को हवा मिल रही है। ऐसे में पानी जैसे भावनात्मक मुद्दे को उछालकर वहां की जनता का ध्यान खींचने की कोशिश की जा रही है।
क्या है गंगा जल संधि और 'गारंटी क्लॉज'?
भारत और बांग्लादेश के बीच साल 1996 में 30 वर्षों के लिए गंगा जल संधि पर हस्ताक्षर किए गए थे। इस संधि के तहत यह तय हुआ था कि पश्चिम बंगाल में फरक्का बैराज (Farakka Barrage) के पास पानी के बहाव को दोनों देशों के बीच साझा किया जाएगा।
- इस संधि के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:
- यह संधि हर साल 1 जनवरी से 31 मई के बीच के शुष्क मौसम (Lean Season) के दौरान पानी के बंटवारे का फॉर्मूला तय करती है।
- संधि के अनुच्छेद II (Article II) में एक 'गारंटी क्लॉज' है, जिसके मुताबिक यदि फरक्का के पास पानी का प्रवाह एक निश्चित स्तर से कम हो जाता है, तो भारत यह सुनिश्चित करेगा कि बांग्लादेश को उसका तय हिस्सा मिले।
- यह संधि 2026 में समाप्त होने वाली है, और इसके नवीनीकरण (Renewal) को लेकर दोनों देशों के बीच बातचीत होनी थी।
भारत के लिए इस स्थिति के क्या मायने हैं?
नई दिल्ली के रणनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि गंगा जल के मुद्दे का अंतरराष्ट्रीयकरण करना बांग्लादेश के लिए बहुत फायदेमंद साबित नहीं होगा। जल संसाधन एक द्विपक्षीय मामला है और इसे आपसी बातचीत से ही सुलझाया जा सकता है। UN जैसे मंचों पर इस तरह के तकनीकी और क्षेत्रीय मुद्दों को ले जाने से केवल कूटनीतिक दूरियां बढ़ेंगी, समाधान नहीं निकलेगा।
भारत हमेशा से अंतरराष्ट्रीय संधियों का सम्मान करता आया है और 1996 की संधि के तहत उसने हमेशा बांग्लादेश के हितों का ध्यान रखा है। हालांकि, मौजूदा राजनीतिक अस्थिरता के चलते ढाका की तरफ से आ रहे ऐसे बयान दोनों देशों के बीच लंबे समय से चली आ रही दोस्ती में दरार डालने का काम कर रहे हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
Q1: गंगा जल संधि कब साइन हुई थी?
उत्तर: भारत और बांग्लादेश के बीच गंगा जल संधि 12 दिसंबर 1996 को तत्कालीन प्रधानमंत्री एच.डी. देवेगौड़ा और शेख हसीना के बीच साइन की गई थी।
Q2: यह संधि कब खत्म हो रही है?
उत्तर: 30 साल के लिए की गई यह ऐतिहासिक संधि वर्ष 2026 में समाप्त होने वाली है, जिसके नवीनीकरण पर दोनों देशों को चर्चा करनी थी।
Q3: फरक्का बैराज कहां स्थित है?
उत्तर: फरक्का बैराज भारत के पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले में गंगा नदी पर स्थित है, जिसका मुख्य उद्देश्य हुगली नदी में पानी के बहाव को नियंत्रित करना है।