पड़ोसी देश बांग्लादेश में पिछले दिनों हुए बड़े पैमाने पर राजनीतिक उथल-पुथल और हिंसक विद्रोह के दूरगामी और खतरनाक परिणाम अब सामने आने लगे हैं। इस उथल-पुथल के दौरान देश भर के विभिन्न थानों और पुलिस चौकियों से बड़े पैमाने पर हथियार और गोला-बारूद लूट लिए गए थे। अब जो रिपोर्ट्स सामने आ रही हैं, वे बेहद चौंकाने वाली हैं और सुरक्षा एजेंसियों की नींद उड़ाने के लिए काफी हैं। थानों से लूटे गए ये अत्याधुनिक हथियार और कारतूस सीधे तौर पर देश के खतरनाक अपराधियों और सिंडिकेट्स के हाथों में पहुंच चुके हैं।
अराजकता का फायदा उठाकर लूटे गए थे हथियार
जब बांग्लादेश में सरकार विरोधी प्रदर्शनों और विरोध प्रदर्शनों ने हिंसक रूप लिया था, तब कानून व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गई थी। पुलिस थानों और सुरक्षा बलों के कैंपों को भीड़ ने निशाना बनाया था। इस दौरान सुरक्षाकर्मी अपनी जान बचाकर पीछे हटने को मजबूर हुए और अराजकता का पूरा फायदा उठाते हुए उपद्रवियों और आपराधिक तत्वों ने पुलिस शस्त्रागार (Armouries) पर धावा बोल दिया।
हजारों की संख्या में आधुनिक असॉल्ट राइफल्स, पिस्तौल, शॉटगन और भारी मात्रा में कारतूस खुलेआम लूट लिए गए। उस समय अधिकारियों ने चेतावनी दी थी कि ये हथियार अगर वापस नहीं मिले, तो देश में अपराध का ग्राफ खतरनाक स्तर तक बढ़ जाएगा। आज वही आशंका सच साबित होती दिखाई दे रही है।
अपराधियों के पास पहुंचे जानलेवा हथियार
खुफिया एजेंसियों और स्थानीय पुलिस की जांच में यह बात खुलकर सामने आई है कि लूटे गए इन हथियारों का एक बड़ा हिस्सा अब संगठित अपराध सिंडिकेट्स, ड्रग्स तस्करों और कुख्यात अपराधियों के पास पहुंच चुका है। अपराधी इन हथियारों का इस्तेमाल न केवल आपसी गैंगवार में कर रहे हैं, बल्कि आम नागरिकों और व्यापारियों में खौफ पैदा करने के लिए भी इनका खुलकर प्रदर्शन किया जा रहा है।
- अत्याधुनिक असॉल्ट राइफल्स: पुलिस के पास मौजूद ऑटोमैटिक हथियार अब बदमाशों के पास हैं।
- बढ़ती आपराधिक घटनाएं: इन हथियारों के आने से देश में डकैती, जबरन वसूली और हत्या जैसी वारदातों में भारी उछाल आया है।
- सुरक्षा बलों के लिए चुनौती: अपराधियों के पास पुलिस से भी ज्यादा ताकतवर हथियार होना कानून प्रवर्तन एजेंसियों के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है।
सीमावर्ती इलाकों में सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट पर
इन हथियारों के अपराधियों के हाथों में जाने से केवल आंतरिक सुरक्षा ही खतरे में नहीं पड़ी है, बल्कि पड़ोसी देशों की सीमाओं पर भी चिंताएं बढ़ गई हैं। हथियारों की तस्करी का यह नेटवर्क सीमावर्ती इलाकों में भी सक्रिय हो गया है। तस्कर इन हथियारों को ऊंचे दामों पर बेचने की फिराक में हैं।
सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि बांग्लादेश प्रशासन के लिए इन लूटे गए हथियारों को वापस रिकवर करना एक लोहे के चने चबाने जैसा काम होगा। अपराधी इन हथियारों को भूमिगत ठिकानों या गुप्त चेहरों में छुपा कर रख रहे हैं, जिससे पुलिस की छापेमारी के बावजूद वे आसानी से हाथ नहीं आ रहे हैं।
आम जनता की सुरक्षा पर मंडराया संकट
इस स्थिति का सबसे बुरा असर आम जनता पर पड़ रहा है। देश की आम अवाम एक तरफ राजनीतिक स्थिरता की बहाली का इंतजार कर रही है, तो दूसरी तरफ हथियारों से लैस अपराधियों का बढ़ता आतंक उनके दैनिक जीवन को नर्क बना रहा है। लोग असुरक्षित महसूस कर रहे हैं और पुलिस प्रशासन पर दबाव बढ़ता जा रहा है कि वह किसी भी तरह से इन अवैध हथियारों को जब्त करे।
आगामी दिनों में यदि इन हथियारों की बरामदगी के लिए कोई कड़ा और बड़ा अभियान नहीं चलाया गया, तो बांग्लादेश की आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था लंबे समय के लिए पटरी से उतर सकती है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इस बात की चर्चा है कि राजनीतिक क्रांतियों के दौरान यदि कानून व्यवस्था का ढांचा पूरी तरह ध्वस्त हो जाए, तो उसके परिणाम कितने भयानक हो सकते हैं।