दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (DUSU) चुनाव के गलियारों में इस वक्त सियासी पारा अपने चरम पर है। एक बार फिर से मतदान की सुगबुगाहट शुरू होते ही विवादों का दौर भी शुरू हो गया है। छात्र संगठनों के बीच मची रस्साकसी के बीच एनएसयूआई (NSUI) के प्रमुख चेहरे विशेष यादव के एक तीखे बयान ने पूरे मामले को एक नया मोड़ दे दिया है। विशेष यादव ने दो टूक शब्दों में कहा है कि अगर नियमों को ताक पर रखकर कोई मनमानी की गई, तो वह चुप नहीं बैठेंगे और इस मामले में सीधे एफआईआर दर्ज कराई जाएगी।
छात्र राजनीति का अखाड़ा: क्यों गरमाया डीयूएसयू चुनाव का माहौल?
दिल्ली यूनिवर्सिटी में छात्र संघ के चुनाव हमेशा से ही देश की मुख्यधारा की राजनीति जितने ही रोमांचक और आक्रामक रहे हैं। यहाँ हर एक वोट और हर एक फैसले के पीछे लंबी रणनीति काम करती है। हालिया घटनाक्रम में जब से 'दोबारा वोटिंग' (Re-voting) की चर्चाएं शुरू हुई हैं, तब से यूनिवर्सिटी कैंपस से लेकर सोशल मीडिया तक सरगर्मी बढ़ गई है।
जानकारों का मानना है कि इस तरह के कयासों से छात्रों के बीच असमंजस की स्थिति पैदा हो रही है। चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता पर जब भी सवाल उठते हैं, तो छात्र संगठन खुलकर आमने-सामने आ जाते हैं। इस बार भी कुछ ऐसा ही देखने को मिल रहा है, जहां एक पक्ष प्रक्रिया को सही ठहरा रहा है, तो दूसरा पक्ष इसे साजिश करार दे रहा है।
विशेष यादव का कड़ा रुख: 'मैं एफआईआर करूंगा'
विवाद तब और गहरा गया जब एनएसयूआई नेता विशेष यादव ने मीडिया और सार्वजनिक मंचों से अपनी बात रखते हुए आक्रामक रुख अपनाया। उन्होंने साफ तौर पर चेतावनी दी है कि यदि चुनावी नियमों और छात्रों के अधिकारों के साथ खिलवाड़ करने की कोशिश की गई, तो कानूनी कार्रवाई करने में जरा भी देर नहीं लगाई जाएगी।
"हम छात्रों के हक की लड़ाई लड़ रहे हैं और किसी भी कीमत पर यूनिवर्सिटी कैंपस में लोकतांत्रिक मूल्यों का गला नहीं घुटने देंगे। अगर दोबारा वोटिंग के नाम पर किसी भी तरह की अवैध गतिविधि को अंजाम दिया गया, तो मैं व्यक्तिगत रूप से इसमें एफआईआर दर्ज कराऊंगा।" - विशेष यादव
इस बयान के सामने आने के बाद से यूनिवर्सिटी प्रशासन पर भी दबाव बढ़ गया है। छात्र संगठनों के समर्थक अब प्रशासनिक भवनों के चक्कर काट रहे हैं और स्थिति स्पष्ट करने की मांग कर रहे हैं।
क्या सचमुच होगी दोबारा वोटिंग?
सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या वाकई डीयूएसयू चुनाव के लिए दोबारा मतदान कराया जाएगा? आधिकारिक सूत्रों और यूनिवर्सिटी प्रशासन की तरफ से अभी तक इस पर कोई अंतिम और पुख्ता बयान सामने नहीं आया है। हालांकि, अंदरखाने चल रही चर्चाओं ने अटकलों का बाजार गर्म कर दिया है।
- प्रशासनिक चुप्पी: यूनिवर्सिटी के चुनाव अधिकारी अभी तक पूरी स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और किसी भी बड़े फैसले से बचते नजर आ रहे हैं।
- छात्रों में असमंजस: आम छात्र इस पूरे विवाद से असमंजस में हैं कि उनकी मेहनत और डाले गए वोटों का क्या होगा।
- कानूनी शिकंजा: विशेष यादव की चेतावनी के बाद अब कोई भी कदम उठाने से पहले प्रशासन को सौ बार सोचना होगा।
कैंपस की सुरक्षा और आगे की रणनीति
किसी भी अप्रिय घटना से बचने के लिए नॉर्थ और साउथ कैंपस में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। दिल्ली पुलिस और यूनिवर्सिटी प्रॉक्टरियल टीम लगातार गश्त कर रही है ताकि किसी भी तरह की हिंसा या तोड़फोड़ को रोका जा सके। छात्र संगठनों के दफ्तरों के बाहर भी पुलिस बल तैनात किया गया है।
आने वाले कुछ घंटे डीयू की राजनीति के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण होने वाले हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि यूनिवर्सिटी प्रशासन इस पूरे मामले पर क्या आधिकारिक रुख अपनाता है और क्या वाकई चुनाव के नतीजों या प्रक्रिया में कोई बहुत बड़ा बदलाव देखने को मिलता है।
फिलहाल, छात्रों की निगाहें प्रशासनिक बैठकों पर टिकी हैं और हर कोई बस यही जानना चाहता है कि क्या डीयूएसयू चुनाव का यह ड्रामा जल्द खत्म होगा या फिर कानूनी पचड़ों में फंसकर यह और लंबा खिंचेगा।