देश के तीन प्रमुख राज्यों—बिहार, मध्य प्रदेश और गुजरात की तीन अहम विधानसभा सीटों पर हुए उपचुनाव की मतगणना के शुरुआती रुझानों ने राजनीतिक गलियारों में खलबली मचा दी है। सबसे ज्यादा ध्यान बिहार की पटना स्थित बांकीपुर विधानसभा सीट पर टिका हुआ है, जहां शुरुआती डाक मतपत्रों (पोस्टल बैलेट) की गिनती में प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी ने बढ़त बनाकर पारंपरिक राजनीतिक समीकरणों को झकझोर दिया है।
बांकीपुर में जन सुराज की बढ़त: क्या टूटेगा BJP का मजबूत किला?
बांकीपुर विधानसभा सीट को भारतीय जनता पार्टी (BJP) का अभेद्य किला माना जाता रहा है। यह सीट लंबे समय से भाजपा के कब्जे में रही है। हालांकि, शुरुआती रुझानों में जन सुराज के प्रत्याशी भाजपा उम्मीदवार नीरज कुमार सिन्हा से आगे चल रहे हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह शुरुआती बढ़त अंतिम नतीजों में बदलती है, तो यह बिहार की राजनीति में किसी बड़े भूचाल से कम नहीं होगा।
इस सीट पर मुख्य मुकाबला इन वजहों से खास बन गया है:
- प्रतिष्ठा की जंग: यह सीट भाजपा के लिए बेहद साख वाली मानी जाती है, क्योंकि यह पार्टी का पुराना गढ़ रही है।
- जन सुराज का पहला बड़ा टेस्ट: चुनावी रणनीतिकार से नेता बने प्रशांत किशोर की पार्टी 'जन सुराज' के लिए यह पहला बड़ा राजनीतिक इम्तिहान है।
- शहरी मतदाताओं का रुख: बांकीपुर एक पूरी तरह से शहरी क्षेत्र है, जहां का वोटिंग पैटर्न पूरे बिहार के मूड का संकेत देता है।
मध्य प्रदेश की दतिया और गुजरात की मांजलपुर सीट का हाल
बिहार के अलावा मध्य प्रदेश की दतिया और गुजरात की मांजलपुर सीट पर भी मतगणना जारी है। दतिया में पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा के प्रभाव वाले क्षेत्र में मुकाबला कड़ा दिखाई दे रहा है, वहीं गुजरात की मांजलपुर सीट पर भाजपा अपनी बढ़त बनाए रखने के लिए जोर लगा रही है।
राष्ट्रीय राजनीति पर क्या पड़ेगा असर?
इन तीन राज्यों के उपचुनाव केवल तीन सीटों का गणित नहीं हैं, बल्कि यह आगामी विधानसभा चुनावों से पहले जनता के मूड का पैमाना भी हैं। अगर प्रशांत किशोर की जन सुराज बांकीपुर जैसी सुरक्षित सीट पर सेंध लगाने में सफल होती है, तो यह बिहार में तीसरे विकल्प की जगह को और मजबूत करेगी। वहीं विपक्ष के लिए भी यह भाजपा को उनके गढ़ में घेरने का बड़ा अवसर साबित हो सकता है। फिलहाल मतगणना के अगले राउंड्स पर पूरे देश की नजरें टिकी हुई हैं।