बदलते मौसम की आहट के साथ ही शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता यानी इम्यूनिटी पर असर पड़ना शुरू हो जाता है। ऐसे में आयुर्वेद से लेकर आधुनिक चिकित्सा विज्ञान तक, हर कोई एक सुपरफूड की वकालत जरूर करता है और वह है 'आंवला'। विटामिन सी का खजाना कहे जाने वाले इस छोटे से हरे फल में गुणों का ऐसा भंडार है जो सर्दियों या मौसम के बदलाव के दौरान होने वाली कई बीमारियों से हमारे शरीर की रक्षा करता है। लेकिन जब बाजार में आंवले के इस्तेमाल की बात आती है, तो अक्सर लोगों के मन में एक बड़ा असमंजस रहता है कि आखिर सेहत के लिहाज से सबसे ज्यादा फायदेमंद कौन सा रूप है—साबुत कच्चा फल, निकाला हुआ जूस या फिर सूखा हुआ पाउडर?
आंवले का कच्चा फल: प्रकृति का अनमोल उपहार
अगर तीनों प्रमुख रूपों यानी फल, जूस और पाउडर का गहराई से विश्लेषण किया जाए, तो आयुर्वेद और पोषण विशेषज्ञों की पहली पसंद हमेशा साबुत कच्चा आंवला ही होता है। इसके पीछे एक बहुत बड़ा वैज्ञानिक कारण है। जब आप आंवले को उसके मूल रूप यानी फल के तौर पर खाते हैं, तो आपको प्रकृति द्वारा दिए गए सभी पोषक तत्व अपनी असली और शुद्ध अवस्था में मिलते हैं।
इसमें किसी भी प्रकार की मिलावट की गुंजाइश बिल्कुल शून्य होती है। इसके अलावा, कच्चे फल में भरपूर मात्रा में प्राकृतिक फाइबर (Dietary Fiber) मौजूद होता है, जो पाचन तंत्र को दुरुस्त रखने में रामबाण साबित होता है। फाइबर पेट को लंबे समय तक भरा रखता है, कब्ज की समस्या को दूर करता है और मेटाबॉलिज्म को भी बूस्ट करता है।
जूस और पाउडर में मिलावट का खतरा
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग सहूलियत के चक्कर में डिब्बाबंद जूस या रेडीमेड पाउडर का रुख करते हैं। लेकिन यहीं पर सेहत के साथ सबसे बड़ा समझौता हो जाता है। बाजार में मिलने वाले आंवला जूस और पाउडर में कई तरह के प्रिजर्वेटिव्स, कृत्रिम रंग और आर्टिफिशियल फ्लेवर मिलाए जाते हैं।
- पैकेज्ड जूस: लंबे समय तक शेल्फ लाइफ बनाए रखने के लिए इनमें केमिकल्स का इस्तेमाल होता है, जो कई बार फायदे की जगह शरीर को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
- पाउडर: खुले या ब्रांडेड पाउडर में कई बार धूल, मिट्टी या कम गुणवत्ता वाले आंवलों को पीसकर मिला दिया जाता है। इसके अलावा, प्रोसेसिंग के दौरान आंवले में मौजूद कई जरूरी विटामिन्स गर्मी या हवा के संपर्क में आकर नष्ट हो जाते हैं।
घर पर तैयार करें शुद्ध विकल्प
यदि आपके लिए रोजाना कच्चा आंवला चबाना मुमकिन नहीं है, तो भी निराश होने की जरूरत नहीं है। आप घर पर ही पूरी शुद्धता के साथ इसके विकल्प तैयार कर सकते हैं। आयुर्वेद और स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आप घर पर ही ताजे आंवलों का इस्तेमाल करके जूस निकालते हैं या फिर खुद धूप में आंवले सुखाकर मिक्सी में पीसकर पाउडर बनाते हैं, तो यह बाजार के मिलावटी उत्पादों से कई गुना बेहतर साबित हो सकता है।
खुद तैयार किए गए जूस या पाउडर में फल के सभी जरूरी गुण सुरक्षित रहते हैं और आपको मिलावट का कोई डर भी नहीं रहता। हालांकि, फिर भी प्राथमिकता यही दी जाती है कि अगर संभव हो, तो रोजाना एक कच्चा आंवला या उसका मुरब्बा (यदि शुगर की समस्या न हो) सीधे खाया जाए।
बदलते मौसम में आंवला खाने के अन्य जबरदस्त फायदे
मौसम के बदलाव के इस दौर में आंवले का नियमित सेवन आपके शरीर में कौन-कौन से बदलाव ला सकता है, आइए इसके बारे में विस्तार से जानते हैं:
- मजबूत इम्यूनिटी: विटामिन सी और एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर होने के कारण यह शरीर के व्हाइट ब्लड सेल्स को मजबूत करता है, जिससे सर्दी-जुकाम और वायरल संक्रमण आसानी से पास नहीं फटकते।
- ग्लोइंग स्किन और मजबूत बाल: कोलेजन के निर्माण में मदद करके यह त्वचा की चमक बनाए रखता है और बालों का झड़ना रोककर उन्हें मजबूत और काला बनाता है।
- वजन नियंत्रण: यह शरीर के फैट बर्निंग प्रोसेस को तेज करता है, जिससे वजन घटाने की प्रक्रिया में मदद मिलती है।
- आंखों की रोशनी: इसमें मौजूद कैरोटीन आंखों की मांसपेशियों को मजबूत करता है और रोशनी बढ़ाने में मददगार है।
निष्कर्ष: क्या चुनें?
सार रूप में कहें तो, सेहत के तराजू पर जब तीनों की तुलना की जाती है, तो कच्चा आंवला सबसे ऊपर खड़ा नजर आता है। इसके बाद नंबर आता है घर पर ताजे रूप में बनाए गए जूस और पाउडर का। इसलिए इस बदलते मौसम में अपनी सेहत के साथ कोई समझौता न करें। बाजार के मिलावटी और महंगे प्रोडक्ट्स पर आंख मूंदकर भरोसा करने के बजाय प्राकृतिक और शुद्ध तरीकों को अपनाएं और खुद को हमेशा तंदुरुस्त रखें।