महाराष्ट्र के भंडारा जिले से एक बड़ी और चिंताजनक खबर सामने आ रही है। कम बारिश के चलते प्रशासन ने जिले की तीन महत्वपूर्ण तहसीलों को आधिकारिक तौर पर सूखाग्रस्त घोषित कर दिया है। इस फैसले के बाद से स्थानीय किसानों की चिंताएं और अधिक बढ़ गई हैं, हालांकि सरकार की ओर से उन्हें कई तरह की राहत देने का भी ऐलान किया गया है।
सामान्य से बेहद कम हुई बारिश, मंडराया सूखे का खतरा
मौसम विभाग और कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार, इस सीजन में भंडारा जिले में संतोषजनक मानसूनी बारिश नहीं हो पाई। जिले में औसत से महज 73.4 प्रतिशत बारिश ही दर्ज की गई, जो कृषि कार्यों और धान की मुख्य फसल के लिए बेहद नाकाफी साबित हुई। पानी की कमी के कारण खेत सूखने लगे और किसानों की लागत डूबने की कगार पर पहुंच गई।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए राज्य शासन ने सर्वे कराया, जिसके आधार पर जिले की तीन तहसीलों—पवनी, लाखांदुर और भंडारा को सूखा प्रभावित घोषित करने का निर्णय लिया गया।
इन तहसीलों को राहत सूची से रखा गया बाहर
जहां एक तरफ तीन तहसीलों में सूखे की मुहर लग चुकी है, वहीं भंडारा जिले की अन्य चार तहसीलों जैसे तुमसर और मोहाडी समेत कुछ अन्य क्षेत्रों को फिलहाल इस सूची से बाहर रखा गया है। इन इलाकों में भी बारिश की स्थिति बहुत अच्छी नहीं थी, लेकिन प्रशासनिक मानदंडों और पिछले आंकड़ों के आधार पर फिलहाल इन्हें सूखाग्रस्त घोषित नहीं किया गया है, जिससे स्थानीय किसानों में थोड़ी मायूसई जरूर है।
किसानों के लिए घोषित किए गए राहत उपाय
प्रशासन द्वारा सूखाग्रस्त घोषित किए जाने के बाद अब इन तीनों तहसीलों (पवनी, लाखांदुर और भंडारा) के किसानों को सरकारी नियमों के तहत विभिन्न राहत और वित्तीय सहायता मिलने का मार्ग प्रशस्त हो गया है। सरकार की ओर से निम्नलिखित राहत उपायों पर विचार किया जा रहा है:
- लगान और भू-राजस्व में छूट: किसानों से वसूले जाने वाले टैक्स और मालगुजारी में राहत दी जाएगी।
- बिजली बिलों में रियायत: कृषि पंपों के बिजली बिलों के भुगतान पर विशेष छूट या स्थगन मिल सकता है।
- फसल बीमा का लाभ: जिन किसानों ने फसल बीमा कराया है, उन्हें नियमानुसार बीमा कंपनियों से मुआवजा दिलाने की प्रक्रिया तेज होगी।
- कर्ज वसूली पर रोक: बैंकों द्वारा कृषि ऋणों की वसूली पर अस्थायी रोक लगाई जा सकती है ताकि किसानों पर मानसिक दबाव कम हो सके।
- रोजगार के अवसर: ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका चलाने के लिए मनरेगा (MGNREGA) के तहत कार्यों का दायरा बढ़ाया जाएगा।
कृषि व्यवस्था पर संकट और आगे की राह
भंडारा जिला अपनी उपजाऊ भूमि और धान की पैदावार के लिए पूरे विदर्भ क्षेत्र में जाना जाता है। ऐसे में यहाँ सूखे की स्थिति उत्पन्न होना केवल किसानों के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्रीय अर्थतंत्र के लिए एक बड़ा झटका है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते भूजल संचयन और सिंचाई के वैकल्पिक इंतजाम नहीं किए गए, तो आने वाले महीनों में पेयजल संकट भी विकराल रूप ले सकता है।
स्थानीय किसान संगठनों ने प्रशासन से मांग की है कि सूखाग्रस्त घोषित की गई तहसीलों के दायरे में उन इलाकों को भी शामिल किया जाए जहाँ बारिश कम होने के बावजूद कागजों पर स्थिति सामान्य दिखाई गई है। फिलहाल, प्रशासनिक अमला राहत कार्यों की रूपरेखा तैयार करने में जुटा हुआ है और प्रभावित किसानों को जल्द ही राहत राशि मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।