Breaking
► मुंबई में मासूम की मौत के बाद जागे अधिकारी, पेड़ों की सुरक्षा के लिए बनेगी नई वन नीति ► पुरानी इलेक्ट्रिक कार की बैटरी का क्या होता है? जानिए हैरान करने वाला सच ► बिहार के 18 जिलों में मौसम का यूटर्न, आंधी-तूफान और वज्रपात का यलो अलर्ट जारी ► मुकेश कुमार शर्मा की जन चौपाल में उमड़ी भीड़, 2027 के चुनाव से पहले बड़ा सियासी संदेश ► भोपाल में पहली बार होगी आर्मी डे परेड, 60 टन के टैंक दौड़ेंगे, 50 हजार लोग बनेंगे गवाह ► सुकमा में आईईडी डिफ्यूज करते वक्त बड़ा धमाका, सीआरपीएफ के 4 जवान घायल ► चंदौली में दर्दनाक सड़क हादसा, तेज रफ्तार बाइक ने राहगीर को मारी जोरदार टक्कर ► राजेश मसाले पर बड़ा एक्शन: असुरक्षित घोषित होने के बाद यूपी में बिक्री पर रोक ► रेलवे का मेगा एक्शन: डीडीयू मंडल में ट्रैक्शन पावर मजबूत, बदली गई तारों की लंबाई ► चन्दौली पुलिस की अनूठी पहल: विश्व दृष्टि दिवस पर एसपी आकाश पटेल ने दृष्टिबाधित बच्चों के साथ बिताए खास पल ► मुंबई में मासूम की मौत के बाद जागे अधिकारी, पेड़ों की सुरक्षा के लिए बनेगी नई वन नीति ► पुरानी इलेक्ट्रिक कार की बैटरी का क्या होता है? जानिए हैरान करने वाला सच ► बिहार के 18 जिलों में मौसम का यूटर्न, आंधी-तूफान और वज्रपात का यलो अलर्ट जारी ► मुकेश कुमार शर्मा की जन चौपाल में उमड़ी भीड़, 2027 के चुनाव से पहले बड़ा सियासी संदेश ► भोपाल में पहली बार होगी आर्मी डे परेड, 60 टन के टैंक दौड़ेंगे, 50 हजार लोग बनेंगे गवाह ► सुकमा में आईईडी डिफ्यूज करते वक्त बड़ा धमाका, सीआरपीएफ के 4 जवान घायल ► चंदौली में दर्दनाक सड़क हादसा, तेज रफ्तार बाइक ने राहगीर को मारी जोरदार टक्कर ► राजेश मसाले पर बड़ा एक्शन: असुरक्षित घोषित होने के बाद यूपी में बिक्री पर रोक ► रेलवे का मेगा एक्शन: डीडीयू मंडल में ट्रैक्शन पावर मजबूत, बदली गई तारों की लंबाई ► चन्दौली पुलिस की अनूठी पहल: विश्व दृष्टि दिवस पर एसपी आकाश पटेल ने दृष्टिबाधित बच्चों के साथ बिताए खास पल

मुंबई में मासूम की मौत के बाद जागे अधिकारी, पेड़ों की सुरक्षा के लिए बनेगी नई वन नीति

मुंबई में मासूम की मौत के बाद जागे अधिकारी, पेड़ों की सुरक्षा के लिए बनेगी नई वन नीति

मुंबई के चेंबूर इलाके में हुई एक दर्दनाक दुर्घटना ने महानगरपालिका और पर्यावरण प्रेमियों को झकझोर कर रख दिया है। कुछ दिन पहले एक भारी-भरकम पेड़ के अचानक गिरने से 11 वर्षीय मासूम विहान श्रीवास्तव की असामयिक मौत हो गई थी। इस हृदयविदारक घटना के बाद अब प्रशासन नींद से जागा है और पेड़ों की सुरक्षा के लिए एक सख्त और दीर्घकालीन नीति (Urban Forest Policy) तैयार करने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ाए जा रहा है।

हादसे के बाद प्रशासन की खुली आँखें

घटना के बाद से ही स्थानीय नागरिकों और अभिभावकों में भारी आक्रोश देखा जा रहा था। लोगों का सवाल था कि आखिर कब तक शहर में कमजोर और खतरनाक पेड़ों की अनदेखी की जाती रहेगी? इस जनदबाव और सुरक्षा चिंताओं को ध्यान में रखते हुए, मुंबई महानगरपालिका ने अब शहर के हरित क्षेत्रों के वैज्ञानिक प्रबंधन और पेड़ों के रखरखाव के लिए एक विशेष नीति बनाने का निर्णय लिया है।

सूत्रों के अनुसार, यह नई नीति केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित नहीं होगी, बल्कि इसके तहत जमीन पर उतरकर ठोस कदम उठाए जाएंगे। आइए जानते हैं कि इस प्रस्तावित नीति में क्या कुछ खास होने की उम्मीद है और यह आम नागरिकों के जीवन को कैसे सुरक्षित बनाएगी।

शहरी वन नीति की मुख्य बातें और रूपरेखा

प्रस्तावित वन नीति के तहत मुंबई और उसके उपनगरों में मौजूद हर एक बड़े पेड़ का डिजिटल ऑडिट किया जाएगा। इसके मुख्य बिंदु निम्नलिखित हो सकते हैं:

  • पेड़ों का जियो-टैगिंग और डिजिटल रिकॉर्ड: शहर के प्रत्येक पुराने और बड़े पेड़ की मैपिंग की जाएगी ताकि उनकी सेहत पर लगातार नजर रखी जा सके।
  • नियमित स्वास्थ्य परीक्षण (Health Checkup): मानसून से पहले और बाद में पेड़ों की जड़ों और तनों की मजबूती की जांच विशेषज्ञों द्वारा कराई जाएगी।
  • खतरनाक पेड़ों की समय पर छंटाई: जो पेड़ कमजोर हो चुके हैं या जिन पर गिरने का खतरा मंडरा रहा है, उन्हें वैज्ञानिक तरीके से काटा या सुरक्षित किया जाएगा।
  • नागरिकों की सीधी भागीदारी: स्थानीय सोसाइटियों और नागरिकों को अपने आसपास के पेड़ों की देखभाल के लिए अधिकृत किया जाएगा और शिकायत दर्ज कराने के लिए एक त्वरित प्रणाली बनेगी।

बढ़ता कंक्रीट का जंगल और पेड़ों का संघर्ष

मुंबई जैसे महानगर में विकास की अंधी दौड़ के बीच कंक्रीट के जंगल तेजी से खड़े हो गए हैं। इसके चलते पेड़ों को अपनी जड़ें फैलाने के लिए पर्याप्त जगह नहीं मिल पाती। सीमेंट और डामर से ढकी जमीन के कारण कई बार पेड़ अंदर ही अंदर कमजोर हो जाते हैं और जरा सी आंधी या बारिश का बोझ नहीं झेल पाते।

पर्यावरणविदों का लंबे समय से यह मानना रहा है कि यदि समय रहते पेड़ों के चारों ओर पर्याप्त खुली जगह (Tree Basins) नहीं छोड़ी गई, तो ऐसी दुर्घटनाएं रुकेंगी नहीं। विहान श्रीवास्तव की मौत ने एक बार फिर इस कड़वी सच्चाई को उजागर कर दिया है कि शहरी नियोजन में पर्यावरण और मानव जीवन की सुरक्षा सबसे ऊपर होनी चाहिए।

अधिकारियों की जिम्मेदारी और जवाबदेही तय करने की मांग

इस हादसे के बाद केवल नीति बनाने की बात ही नहीं हो रही, बल्कि जनता की ओर से लापरवाही बरतने वाले विभागों और अधिकारियों पर जवाबदेही तय करने की भी पुरजोर मांग उठ रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय पर शिकायतों पर ध्यान दिया गया होता, तो शायद एक हंसता-खेलता बच्चा आज हमारे बीच होता।

मनपा अधिकारियों का दावा है कि इस नई नीति के लागू होने से न केवल पेड़ों की बल्कि आम नागरिकों की सुरक्षा भी सुनिश्चित होगी। हालांकि, यह देखना बेहद महत्वपूर्ण होगा कि इस नीति का क्रियान्वयन कितनी सख्ती से और कितनी जल्दी धरातल पर उतरता है।

भविष्य में ऐसी घटनाओं से कैसे बचा जाए?

विशेषज्ञों का सुझाव है कि केवल मनपा के भरोसे रहने के बजाय आरडब्ल्यूए (Resident Welfare Associations) और आम जनता को भी जागरूक होना होगा। यदि आपके आसपास कोई पेड़ बहुत ज्यादा झुक गया है या उसकी जड़ें खोखली हो चुकी हैं, तो उसकी सूचना तुरंत संबंधित विभाग को दें।

विहान श्रीवास्तव की यह क्षति कभी पूरी नहीं की जा सकती, लेकिन उम्मीद की जानी चाहिए कि प्रशासन इस त्रासदी से कड़ा सबक लेगा और मुंबई की सड़कों और गलियों को नागरिकों के लिए सचमुच सुरक्षित बनाएगा।

About the Author

रोली सिंह

रोली सिंह

Writer

रोली सिंह पिछले 2 सालों से पत्रकारिता और न्यूज़ रिपोर्टिंग से जुड़ी हैं। वह लोकल न्यूज़ और लोगों से जुड़े मुद्दों को पढ़ने वालों तक पहुंचाने का काम...

Read More

अगली खबर पढ़ें:

आगे पढ़ें →