त्योहारों का असली आनंद तब दोगुना हो जाता है जब उत्सव के उल्लास में समाज के वंचित और जरूरतमंद वर्ग का भी खयाल रखा जाए। महाराष्ट्र के भिवंडी शहर में इस बात को एक बार फिर चरितार्थ किया है 'परोपकार संस्था' ने। गणेशोत्सव के सबसे बड़े और अंतिम दिन यानी अनंत चतुर्दशी के पावन अवसर पर इस संस्था ने कुछ ऐसा कर दिखाया, जो शहरभर में चर्चा का विषय बन गया है। एक तरफ जहां गणेश विसर्जन के जुलूस में शामिल होने वाले लाखों भक्तों की भूख मिटाने के लिए विशाल स्तर पर खाने का प्रबंध किया गया, वहीं दूसरी तरफ भविष्य के कर्णधार कहे जाने वाले उन बच्चों का भी हाथ थामा गया, जिनकी आर्थिक स्थिति शिक्षा की राह में रोड़ा बन रही थी।
शिक्षा के दीप जलाती परोपकार संस्था: 100 से अधिक छात्रों को आर्थिक संबल
किसी भी देश या समाज की तरक्की का रास्ता उसकी शिक्षा से होकर गुजरता है। लेकिन विडंबना यह है कि आज भी देश के कोने-कोने में कई ऐसे प्रतिभावान छात्र मौजूद हैं जो पैसों की कमी के कारण अपनी पढ़ाई बीच में ही छोड़ने को मजबूर हो जाते हैं। भिवंडी की सक्रिय सामाजिक और शैक्षणिक संस्था 'परोपकार संस्था' पिछले एक दशक से अधिक समय से इस दीवार को गिराने का काम कर रही है।
इस वर्ष अनंत चतुर्दशी के विशेष कार्यक्रम के दौरान संस्था ने 100 से अधिक आर्थिक रूप से कमजोर और जरूरतमंद विद्यार्थियों को शिक्षा सहायता के रूप में चेक वितरित किए। प्रत्येक चयनित छात्र को 2,500 रुपये की सहायता राशि का चेक प्रदान किया गया। यह राशि भले ही कागजों पर छोटी लगे, लेकिन एक ऐसे परिवार के लिए यह बहुत बड़ा सहारा है जो अपनी बुनियादी जरूरतों को पूरा करने के लिए भी संघर्ष कर रहा है।
पारदर्शी प्रक्रिया से होता है चयन
संस्था के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने जानकारी देते हुए बताया कि यह मदद किसी को भी यूं ही नहीं दे दी जाती। इसके लिए एक बेहद पारदर्शी प्रक्रिया अपनाई जाती है। विभिन्न स्कूलों के माध्यम से उन विद्यार्थियों की सूची तैयार की जाती है, जो पढ़ाई में तो अच्छे हैं लेकिन जिनकी पारिवारिक आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर है। इसके बाद पूरी जांच-पड़ताल के बाद इन बच्चों का चयन किया जाता है। शिक्षा सहायता प्रदान करने का यह नेक उपक्रम संस्था द्वारा पिछले 10 से 12 वर्षों से लगातार बिना किसी रुकावट के चलाया जा रहा है।
आस्था और सेवा का संगम: बंटे करीब 1 लाख वड़ापाव
शिक्षा के क्षेत्र में इस सराहनीय कार्य के साथ-साथ संस्था ने सांस्कृतिक और धार्मिक उत्सव का भी पूरा सम्मान किया। अनंत चतुर्दशी के दिन गणेश विसर्जन के लिए शहर की सड़कों पर जनसैलाब उमड़ पड़ता है। भोर से लेकर देर रात तक चलने वाले इस विसर्जन जुलूस में शामिल होने वाले लाखों भक्तों की सेवा के लिए परोपकार संस्था पिछले 16 वर्षों से एक विशाल अन्नदान और प्रसाद वितरण का कार्यक्रम आयोजित करती आ रही है।
इस वर्ष भी इस परंपरा को आगे बढ़ाते हुए संस्था की ओर से लगभग 1 लाख वड़ापाव वितरित किए गए। मुंबई और महाराष्ट्र की पहचान बन चुका वड़ापाव जब थके-हारे और बप्पा के जयकारे लगाते भक्तों को मिला, तो उनके चेहरों की थकान पलभर में गायब हो गई।
100 से अधिक कार्यकर्ताओं ने संभाली व्यवस्था
इतने बड़े पैमाने पर एक लाख लोगों तक खाद्य सामग्री पहुंचाना कोई आसान काम नहीं है। इसके लिए महीनों पहले से योजना बनानी पड़ती है। इस बार भी वड़ापाव वितरण की इस विशाल व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने के लिए संस्था के 100 से 150 समर्पित कर्मचारी और कार्यकर्ता मैदान में डटे रहे। सुबह से लेकर देर रात तक हर एक कार्यकर्ता ने अनुशासन और सेवा भाव के साथ अपनी जिम्मेदारी निभाई, ताकि विसर्जन में आने वाले किसी भी श्रद्धालु को असुविधा न हो।
शहर के गणमान्य नागरिकों ने बढ़ाई शोभा
इस प्रेरणादायक कार्यक्रम की गरिमा बढ़ाने के लिए शहर के कई प्रतिष्ठित और गणमान्य लोग उपस्थित रहे। कार्यक्रम में महाराष्ट्र-गोवा बार काउंसिल के सदस्य एडवोकेट हर्षल पाटिल, भिवंडी मनपा प्रभाग समिति के अध्यक्ष एडवोकेट वैभव भोईर, प्रख्यात अधिवक्ता वेंकटेश चिटकान, समाजसेवी कृष्णा गांजेजी, और जाने-माने उद्योगपति सह समाजसेवी त्रिलोकचंद्र जैन विशेष रूप से मौजूद रहे।
कार्यक्रम की शुरुआत में आए हुए सभी अतिथियों का स्वागत परोपकार संस्था के पदाधिकारियों और सदस्यों ने पारंपरिक तरीके से किया। अतिथियों ने संस्था के इन दोनों बड़े उपक्रमों—शिक्षा सहायता और महाप्रसाद वितरण—की जमकर सराहना की और इसे अन्य संगठनों के लिए भी एक मिसाल बताया।
इनकी मेहनत से सफल हुआ आयोजन
किसी भी संस्था की सफलता के पीछे उसकी कोर टीम की मेहनत और समर्पण होता है। परोपकार संस्था के भिवंडी क्षेत्रीय समिति के अध्यक्ष मनोज दुधानी और महासचिव रमेश मूंदड़ा के मार्गदर्शन में इस पूरे कार्यक्रम की रूपरेखा तैयार की गई थी।
- कार्यक्रम को सफल बनाने में निम्नलिखित पदाधिकारियों और सदस्यों ने अपना बहुमूल्य योगदान दिया:सचिव: द्वारका प्रसाद
- निदेशक: राजू गांजेजी, मुरली मनोहर तापरिया, रामअवतार दरक, गजानन लोहिया
- सक्रिय सदस्य: सुनील राठी, विक्रम अग्रवाल, ईश्वर अग्रवाल, मनोज बलदेन, रामेश्वर कांकानी, ओम प्रकाश बियानी, पवन बागड़ी, और संजय कोठारी
इन सभी के साथ-साथ संस्था से जुड़े अन्य तमाम कार्यकर्ताओं ने दिन-रात मेहनत कर इस आयोजन को ऐतिहासिक बना दिया।
भविष्य के लिए उम्मीद की किरण
परोपकार संस्था का यह प्रयास यह साबित करता है कि अगर समाज के सक्षम लोग थोड़ा सा भी आगे आएं, तो व्यवस्था की कमियों को काफी हद तक सुधारा जा सकता है। एक तरफ जहां युवाओं को पढ़ाई के लिए आर्थिक संबल मिला, वहीं दूसरी तरफ उत्सव के माहौल में सेवा का अनुपम उदाहरण पेश किया गया। भिवंडी के इस आयोजन ने एक बार फिर यह दिखा दिया कि सामाजिक एकजुटता और सेवा भाव से बड़े से बड़े बदलाव लाए जा सकते हैं, जिससे आने वाली पीढ़ी के लिए एक बेहतर और उज्जवल भविष्य की नींव रखी जा रही है।