सितंबर के पहले हफ्ते में मानसून की सक्रियता ने एक बार फिर से मैदानी इलाकों की धड़कनें बढ़ा दी हैं। खासकर बिहार और उत्तर प्रदेश के तटीय इलाकों में स्थिति चिंताजनक होती जा रही है। पहाड़ों पर हो रही लगातार बारिश और बैराजों से छोड़े जा रहे पानी के कारण गंगा नदी का जलस्तर खतरे के निशान की ओर तेजी से बढ़ रहा है। आलम यह है कि कई प्रसिद्ध घाट पूरी तरह जलमग्न हो चुके हैं और पानी अब रिहायशी बस्तियों की तरफ रुख करने लगा है।
गंगा के बढ़ते तेवर: घाट डूबे, नावों का संचालन ठप
वाराणसी, प्रयागराज से लेकर पटना और बक्सर तक गंगा के रौद्र रूप ने प्रशासन और आम जनता दोनों को सतर्क कर दिया है। गंगा के घाटों पर पानी इतनी तेजी से ऊपर आया है कि दशकों पुरानी सीढ़ियां और मंदिर के निचले हिस्से जलमग्न हो चुके हैं। सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कई जगहों पर मल्लाहों और नाव चालकों को नदी में जाने से रोक दिया गया है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि इस बार पानी बढ़ने की रफ्तार पिछले कुछ सालों के मुकाबले काफी तेज है। यही वजह है कि किसानों और तटवर्ती इलाकों में रहने वाले परिवारों के माथे पर चिंता की लकीरें साफ देखी जा सकती हैं।
बिहार में बाढ़ का खतरा: कौन-कौन से जिले सबसे ज्यादा प्रभावित?
बिहार के आपदा प्रबंधन विभाग के अनुसार, गंगा के जलस्तर में वृद्धि से राज्य के कई जिलों में बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है।
- बक्सर और भोजपुर: इन जिलों में गंगा का पानी निचले इलाकों और खेतों में फैलने लगा है।
- पटना: राजधानी पटना के दियारा क्षेत्र और कलेक्ट्रेट घाट के आसपास के इलाकों में पानी का दबाव लगातार बढ़ रहा है।
- भागलपुर और कटिहार: पूर्वी बिहार के इन जिलों में भी गंगा के तेवर तटीय गांवों के लिए आफत बनते जा रहे हैं।
प्रशासन ने निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने और सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील शुरू कर दी है। राहत शिविरों को तैयार रखने के निर्देश भी जारी किए जा चुके हैं.
उत्तर प्रदेश का हाल: पूर्वी और मध्य यूपी में बढ़ी धड़कनें
बिहार की तरह ही उत्तर प्रदेश में भी हालात कमोबेश ऐसे ही हैं। बलिया, गाजीपुर, वाराणसी, और मिर्जापुर में गंगा का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। केंद्रीय जल आयोग (CWC) के आंकड़ों के मुताबिक, नदी कई जगहों पर चेतावनी बिंदु को पार कर चुकी है और खतरे के निशान की ओर बढ़ रही है।
प्रयागराज में संगम क्षेत्र के निचले इलाकों में पानी फैलने के बाद तीर्थ पुरोहितों को अपने टेंट और मंच सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट करने पड़े हैं। प्रशासन ने बाढ़ चौकियों को सक्रिय कर दिया है और लगातार स्थिति पर नजर रखी जा रही है।
बाढ़ का खतरा क्यों बढ़ा है? मुख्य वजहें
मौसम विशेषज्ञों और जल संसाधन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, इस बार अचानक आई इस स्थिति के पीछे मुख्य रूप से दो कारण हैं:
- उत्तराखंड और नेपाल के कुछ जलग्रहण क्षेत्रों में अचानक हुई भारी बारिश।
- विभिन्न बैराजों से एक साथ लाखों क्यूसेक पानी का डिस्चार्ज किया जाना, जिससे मैदानी इलाकों में पानी का दबाव अचानक बढ़ गया है।
प्रशासन की तैयारियां और एहतियाती कदम
संभावित खतरे को भांपते हुए राज्य सरकारों ने एनडीआरएफ (NDRF) और एसडीआरएफ (SDRF) की टीमों को संवेदनशील जिलों में तैनात करना शुरू कर दिया है। प्रभावित इलाकों में नावों की व्यवस्था की जा रही है ताकि आपात स्थिति में लोगों को तुरंत निकाला जा सके। इसके अलावा, मेडिकल टीमों को भी अलर्ट मोड पर रखा गया है ताकि जलजनित बीमारियों से निपटा जा सके।
आम जनता के लिए सलाह
तटीय इलाकों में रहने वाले नागरिकों से अपील की गई है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें, लेकिन प्रशासन की चेतावनियों को गंभीरता से लें। यदि पानी आपके घरों के आसपास तक पहुंच रहा है, तो बिना इंतजार किए सुरक्षित स्थानों की ओर प्रस्थान करें और अपने मवेशियों को भी ऊंचे स्थानों पर पहुंचाएं।
फिलहाल आने वाले दो से तीन दिन बेहद महत्वपूर्ण रहने वाले हैं। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार यदि बारिश थमती है, तो जलस्तर में ठहराव आ सकता है, लेकिन अगर मानसूनी बौछारें जारी रहीं, तो स्थिति और विकट हो सकती है।