बिहार के पश्चिम चंपारण जिले में हर साल आने वाली बाढ़ की विभीषिका से राहत दिलाने के लिए एक अहम प्रशासनिक और बुनियादी ढांचे की योजना को आगे बढ़ाया गया है। गंडक नदी के उग्र रूप और तबाही पर लगाम कसने के उद्देश्य से वाल्मीकिनगर से बेतिया के नौतन तक लगभग 80 किलोमीटर लंबे रिंग बांध के निर्माण को बिहार सरकार की तरफ से स्वीकृति मिल चुकी है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के अब धरातल पर उतरने के लिए केंद्र सरकार की हरी झंडी और वित्तीय मदद का इंतजार किया जा रहा है।
उत्तर बिहार का पश्चिम चंपारण जिला लंबे समय से गंडक नदी के कारण होने वाले भारी कटाव और बाढ़ की समस्या से जूझता रहा है। नदी का जलस्तर बढ़ने पर यहां के निचले इलाकों में पानी भर जाता है, जिससे जनजीवन के साथ-साथ कृषि और संपत्ति को बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचता है। स्थानीय लोगों की इस पुरानी और गंभीर समस्या के स्थायी समाधान के लिए रिंग बांध के निर्माण का प्रस्ताव तैयार किया गया है।
केंद्रीय मंत्री और स्थानीय जनप्रतिनिधियों के बयान
केंद्रीय कोयला एवं खनन राज्य मंत्री सतीश चंद्र दुबे ने इस परियोजना के संबंध में जानकारी साझा करते हुए बताया कि रिंग बांध के निर्माण को लेकर बिहार सरकार की ओर से सैद्धांतिक मंजूरी दी जा चुकी है और इस सिलसिले में केंद्र सरकार को आधिकारिक पत्र भी प्राप्त हो गया है। उन्होंने कहा कि भारत सरकार से इस परियोजना के लिए जल्द से जल्द धनराशि उपलब्ध कराने के प्रयास किए जा रहे हैं ताकि निर्माण कार्य को गति दी जा सके।
हाल ही में पश्चिम चंपारण के योगापट्टी क्षेत्र में बाढ़ प्रभावित परिवारों के बीच राहत सामग्री का वितरण करने पहुंचे केंद्रीय मंत्री ने कहा कि क्षेत्र के निवासियों को हर साल बाढ़ के कारण भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। इस लिहाज से 80 किलोमीटर लंबा यह रिंग बांध सुरक्षा कवच साबित हो सकता है। इस कार्यक्रम के दौरान लौरिया से भाजपा विधायक विनय बिहारी और अन्य स्थानीय नेता भी मौजूद रहे।
वाल्मीकिनगर से नौतन तक सुरक्षा का दायरा
विधायक विनय बिहारी के अनुसार, प्रस्तावित रिंग बांध के जरिए वाल्मीकिनगर से लेकर बेतिया के नौतन तक के करीब 80 किलोमीटर के भूभाग को बाढ़ के खतरे से सुरक्षित करने का खाका खींचा गया है। गंडक नदी का जलस्तर बढ़ने से इस क्षेत्र के दर्जनों गांवों और रिहायशी बस्तियों पर सीधा खतरा मंडराने लगता है। लोगों को हर साल बाढ़ के दौरान अपने आशियाने छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर शरण लेनी पड़ती है और खाने-पीने से लेकर पशुओं के चारे तक का संकट खड़ा हो जाता है।
स्थानीय स्तर पर हालांकि इस घोषणा से उम्मीदें जरूर जगी हैं, लेकिन परियोजना से जुड़ी कई तकनीकी और व्यावहारिक जानकारियां अभी सामने आनी बाकी हैं। मसलन, इस बांध के निर्माण से कुल कितने गांवों को प्रत्यक्ष सुरक्षा मिलेगी, इसकी आधिकारिक सूची और विस्तृत डीपीआर (विस्तृत परियोजना रिपोर्ट) की रूपरेखा क्या होगी, इसे लेकर अभी प्रशासनिक स्थिति स्पष्ट होना शेष है।
फंडिंग पर टिकी अगली प्रगति
राज्य स्तर पर मंजूरी मिलने और केंद्र को पत्र भेजे जाने के बाद यह परियोजना अब अपने अगले और सबसे अहम चरण में है, जो कि वित्तीय आवंटन से जुड़ा है। केंद्र सरकार से बजट जारी होने के बाद ही निर्माण एजेंसी के चयन, कार्य की समयावधि और टेंडर की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा सकेगा। फिलहाल पश्चिम चंपारण के बाढ़ पीड़ितों की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि केंद्र सरकार से इस परियोजना के लिए कब तक राशि जारी होती है और वाल्मीकिनगर से नौतन तक सुरक्षा दीवार का निर्माण कार्य कब जमीन पर शुरू होता है।