बालकुम से मुलुंड के आनंदनगर तक 7.129 किलोमीटर लंबे एलिवेटेड कॉरिडोर के निर्माण को लेकर एमएमआरडीए ने स्थिति स्पष्ट कर दी है।
ठाणे और मुंबई के बीच यातायात को सुगम बनाने वाली महत्वपूर्ण परियोजना 'ठाणे कोस्टल रोड फेज-2' को लेकर मुंबई महानगर क्षेत्र विकास प्राधिकरण (MMRDA) ने स्पष्ट कर दिया है कि इस मार्ग में किसी भी प्रकार का बदलाव नहीं किया जाएगा। प्राधिकरण का तर्क है कि यदि इस रूट को बदला जाता है, तो मुंबई के साथ सीधा संपर्क खत्म होने का जोखिम पैदा हो जाएगा। इसी आशंका को ध्यान में रखते हुए प्राधिकरण ने परियोजना को अपने मूल और निर्धारित मार्ग पर ही आगे बढ़ाने का कड़ा रुख अपनाया है।
पर्यावरण संरक्षण और तकनीकी विशेषताएं
प्रस्तावित दूसरा चरण बालकुम से मुलुंड पूर्व के आनंदनगर तक 7.129 किलोमीटर लंबा एक एलिवेटेड मार्ग यानी ऊंचा कॉरिडोर होगा। यह मार्ग एक तरफ मौजूदा रिहायशी इमारतों और दूसरी तरफ ठाणे खाड़ी के बीच से होकर गुजरता है, जिसके कारण मैंग्रोव और स्थानीय पर्यावरण की रक्षा करते हुए निर्माण करना इस मार्ग पर ही सबसे व्यावहारिक विकल्प है। पर्यावरण को कम से कम नुकसान पहुंचाने के उद्देश्य से पूरी सड़क को खंभों पर ऊंचा बनाया जाएगा। इसके अलावा, तकनीकी बदलाव के तहत खंभों के बीच की दूरी को 30 मीटर से बढ़ाकर 50 मीटर कर दिया गया है, ताकि प्राकृतिक बहाव और हरियाली पर कम असर पड़े।
मैंग्रोव और फ्लेमिंगो अभयारण्य की सुरक्षा के कड़े निर्देश
महाराष्ट्र तटीय क्षेत्र प्रबंधन प्राधिकरण ने पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी कड़ी शर्तों के साथ अपनी सिफारिशें केंद्र सरकार को भेज दी हैं। निर्माण के दौरान प्रभावित होने वाले कुल मैंग्रोव में से लगभग 65 प्रतिशत हिस्से को पूरी तरह सुरक्षित रखा जाएगा और उसे छुआ तक नहीं जाएगा। फ्लेमिंगो पक्षियों और उनके प्राकृतिक अभयारण्य की सुरक्षा के लिए निर्माण कार्य में विशेष रूप से कम आवाज करने वाली तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। इसके साथ ही, पक्षियों के बैठने और ठहरने की जगहों को शांत क्षेत्र घोषित किया जाएगा। स्थानीय मछुआरों की आजीविका प्रभावित न हो, इसके लिए उनकी नावों की आवाजाही बिना किसी रोक-टोक के जारी रखने के निर्देश दिए गए हैं।
वैधानिक मंजूरियां और संस्थागत निगरानी
इस परियोजना के लिए बॉम्बे हाई कोर्ट की अनुमति, मैंग्रोव सेल से अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) प्राप्त करना और नियमों के तहत नए पेड़ लगाना अनिवार्य शर्तों में शामिल किया गया है। पर्यावरणीय गतिविधियों और निर्माण कार्यों की निरंतर देखरेख के लिए ठाणे महानगरपालिका को एक अलग सेल गठित करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
पहले चरण की प्रगति और यातायात पर असर
इस महत्वाकांक्षी परियोजना के पहले चरण के तहत गायमुख से खारेगांव टोल नाके तक 13.45 किलोमीटर लंबी छह लेन की सड़क का निर्माण कार्य चल रहा है, जिसका लगभग 40 फीसदी काम पूरा हो चुका है। गायमुख में यह मार्ग प्रस्तावित फाउंटेन होटल टनल से जुड़ेगा, जिससे ठाणे और भाईंदर के बीच सीधा और तेज संपर्क स्थापित होगा। दोनों चरणों के पूरी तरह से तैयार हो जाने के बाद घोडबंदर रोड पर यातायात का दबाव काफी हद तक कम हो जाएगा और नासिक, गुजरात तथा उत्तर भारत की ओर जाने वाले भारी व हल्के वाहनों को एक जाममुक्त और तेज रफ्तार मार्ग मिल सकेगा।