सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के एमएलसी चुनाव में राजनीतिक सरगर्मी काफी बढ़ गई है, जहां निर्दलीय प्रत्याशी रमेंद्र राय के मैदान में उतरने से मुकाबला रोचक हो गया है।
बिहार के सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के विधान परिषद (MLC) चुनाव को लेकर सियासी पारा चढ़ चुका है। इस चुनावी रण में एनडीए समर्थित उम्मीदवार आनंद पुष्कर, जन सुराज समर्थित व वर्तमान एमएलसी मोहम्मद अफाक और निर्दलीय प्रत्याशी रमेंद्र राय के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिल रहा है। सभी उम्मीदवार मतदाताओं को अपने पक्ष में करने के लिए पूरी ताकत झोंक रहे हैं। इसी क्रम में निर्दलीय प्रत्याशी रमेंद्र राय ने बेतिया के एक निजी होटल में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अपनी चुनावी स्थिति और प्राथमिकताओं को स्पष्ट किया, जिसके बाद राजनीतिक सरगर्मी और तेज हो गई है।
शिक्षकों के हक और अधिकारों पर जोर
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान निर्दलीय उम्मीदवार रमेंद्र राय ने कहा कि शिक्षकों की वास्तविक समस्याओं और उनकी परेशानियों को केवल एक शिक्षक ही भली-भांति समझ सकता है। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि वह इत्तेफाक से खुद शिक्षक हैं और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) संगठन से ताल्लुक रखते हैं। उन्होंने दावा किया कि वह शिक्षकों के अधिकारों और इंसाफ के लिए पहले भी संघर्ष करते रहे हैं और आगे भी इस दिशा में पीछे नहीं हटेंगे। चुनावी मैदान में उतरने का उनका मुख्य उद्देश्य शिक्षकों की आवाज को मजबूती देना और उनकी समस्याओं का स्थायी समाधान निकालना है।
सातवें वेतन आयोग के मुद्दे पर बड़ा राजनीतिक दांव
अपने चुनावी अभियान के दौरान रमेंद्र राय ने सातवें वेतन आयोग के कार्यान्वयन को सबसे बड़ा मुद्दा बनाया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि शिक्षक मतदाताओं का आशीर्वाद उन्हें मिला और उनकी जीत सुनिश्चित हुई, तो वह शिक्षकों के लिए सातवें वेतन आयोग की मांग को लेकर निर्णायक लड़ाई लड़ेंगे। शिक्षकों के बीच अपनी प्रतिबद्धता जताते हुए उन्होंने भावनात्मक अंदाज में कहा कि वह शिक्षकों के लिए ही लड़ेंगे, उनके साथ जिएंगे और उन्हीं के लिए मरेंगे। उनके इस बयान को शिक्षक वर्ग के बीच अपनी पैठ गहरी करने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।
प्रतिद्वंद्वियों के खिलाफ राजनीतिक घेराबंदी
चुनावी माहौल में रमेंद्र राय ने अपने विरोधियों पर भी निशाना साधा। उनका कहना था कि चुनावी मैदान में उतरे अन्य उम्मीदवारों की राजनीतिक पृष्ठभूमि से शिक्षक भली-भांति परिचित हैं, जिनमें से कई नेता पहले दूसरे दलों में थे और अब एनडीए गठबंधन के साथ चुनाव लड़ रहे हैं। दूसरी ओर, चुनाव में एनडीए समर्थित आनंद पुष्कर के पक्ष में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता और जन सुराज के प्रत्याशी मोहम्मद अफाक के प्रचार में प्रशांत किशोर के रणनीतिक साए की चर्चा है। इन तमाम राजनीतिक समीकरणों के बीच रमेंद्र राय पूरी तरह से अपने शिक्षक होने के नाते और व्यक्तिगत जुड़ाव के आधार पर वोट मांग रहे हैं।
सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के इस चुनाव में अब पूरी तरह से शिक्षक मतदाताओं के रुख पर निगाहें टिकी हुई हैं। एक तरफ जहां बड़े राजनीतिक दलों और गठबंधनों की संगठनात्मक ताकत है, वहीं दूसरी तरफ स्थानीय स्तर पर शिक्षक हितों के लिए संघर्ष का दावा करने वाले निर्दलीय उम्मीदवार भी ताल ठोक रहे हैं। अब देखना यह होगा कि मतदाता किस प्रत्याशी के सिर जीत का ताज पहनाकर विधान परिषद भेजते हैं।