👉40 साल बाद इतिहास दोहराने के करीब BJP: राज्यसभा में 'जादुई आंकड़े' के बेहद पास मोदी सरकार, राजीव गांधी के दौर की आएगी याद
भारतीय राजनीति में एक बड़ा उलटफेर देखने को मिल रहा है। हालिया लोकसभा चुनावों में भले ही भारतीय जनता पार्टी (BJP) अपने दम पर पूर्ण बहुमत के आंकड़े से दूर रह गई हो, लेकिन संसद के ऊपरी सदन यानी राज्यसभा में मोदी सरकार एक अभूतपूर्व इतिहास रचने की दहलीज पर खड़ी है।
बीजेपी राज्यसभा में उस 'जादुई नंबर' (साधारण बहुमत) के बेहद करीब पहुंच चुकी है, जिसे हासिल करना किसी भी सत्तारूढ़ दल के लिए पिछले चार दशकों में एक सपना रहा है। अगर बीजेपी इस आंकड़े को पार कर लेती है, तो देश की राजनीति में 40 साल बाद ऐसा संयोग बनेगा। इससे पहले पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के कार्यकाल में किसी पार्टी को यह दबदबा हासिल था।
👉क्या है राज्यसभा का समीकरण?
फिलहाल राज्यसभा की मौजूदा स्थिति और 'जादुई आंकड़े' का गणित कुछ इस प्रकार है:
- साधारण बहुमत के लिए जरूरी सीटें: 123
- बीजेपी की मौजूदा स्थिति: बीजेपी इस जादुई आंकड़े से महज कुछ ही सीटें दूर है।
- सहयोगियों का साथ: अपने सहयोगियों (NDA) और कुछ निर्दलीय व मनोनीत सांसदों के समर्थन से मोदी सरकार राज्यसभा में पूरी तरह मजबूत स्थिति में आ चुकी है।
👉बदलेगा संसद का मिजाज: राज्यसभा में बहुमत मिलते ही मोदी सरकार को किसी भी बड़े और कड़े कानून को पास कराने के लिए क्षेत्रीय दलों (जैसे YSRCP, BJD या AIADMK) के भरोसे नहीं रहना पड़ेगा।
👉40 साल पुराना 'राजीव गांधी दौर' का रिकॉर्ड
भारतीय संसदीय इतिहास में राज्यसभा में पूर्ण बहुमत होना किसी भी सरकार के लिए बहुत बड़ी ताकत माना जाता है।
- आखिरी बार 1980 के दशक में कांग्रेस (राजीव गांधी के प्रधानमंत्री रहते हुए) के पास राज्यसभा में अपने दम पर स्पष्ट बहुमत था।
- उसके बाद से गठबंधन सरकारों का दौर शुरू हुआ और किसी भी एक दल को ऊपरी सदन में यह वर्चस्व हासिल नहीं हुआ।
- अब 40 साल बाद पीएम नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बीजेपी इस रिकॉर्ड को तोड़ने और एक नया इतिहास रचने के बेहद करीब है।
👉सरकार के लिए इसके क्या मायने हैं?
लोकसभा में बहुमत के लिए सहयोगियों पर निर्भर होने के बावजूद, राज्यसभा में बीजेपी का मजबूत होना गेम-चेंजर साबित हो सकता है। इसके तीन सबसे बड़े फायदे होंगे:
- विपक्ष की घेराबंदी होगी कमजोर: अब तक विपक्ष कई बिलों को राज्यसभा में अपनी संख्या बल के जरिए अटकाने या संसदीय समिति के पास भेजने में कामयाब हो जाता था, जो अब मुश्किल होगा।
- सख्त और बड़े सुधारों का रास्ता साफ: आर्थिक सुधार, वन नेशन-वन इलेक्शन (One Nation One Election) और समान नागरिक संहिता (UCC) जैसे बड़े और संवेदनशील विधेयकों को संसद से पारित कराना सरकार के लिए काफी आसान हो जाएगा।
- मनोनीत सांसदों का फायदा: राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत होने वाले सांसदों और आगामी उपचुनावों के जरिए बीजेपी बहुत जल्द इस फासले को पूरी तरह खत्म कर लेगी।
👉निष्कर्ष: लोकसभा के नतीजों से जो कसर रह गई थी, उसे बीजेपी राज्यसभा में पूरा करती दिख रही है। यदि आने वाले दिनों में बीजेपी इस जादुई आंकड़े को छू लेती है, तो यह भारतीय राजनीतिक इतिहास के सबसे बड़े मील के पत्थरों में से एक होगा।