मध्य-पूर्व एशिया की भू-राजनीति में एक बार फिर तनाव का पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया है। ईरान समर्थित हूती (Houthi) विद्रोहियों के खिलाफ सऊदी अरब समर्थित यमनी सेना ने अब आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है। ताजा रिपोर्ट्स के मुताबिक, यमनी सेना ने अल-जौफ (Al-Jawf) और मारीब (Marib) प्रांतों में हूती विद्रोहियों के ठिकानों को चुन-चुनकर तोपखाने (Artillery) से निशाना बनाया है। इस अचानक और भीषण सैन्य कार्रवाई से इलाके में सनसनी फैल गई है और संघर्ष के और ज्यादा विकराल रूप लेने की आशंका जताई जा रही है।
अल-जौफ और मारीब में गूंजी तोपों की गर्जना
यमन के रणनीतिक रूप से बेहद अहम माने जाने वाले इलाकों—अल-जौफ और मारीब—में पिछले कुछ दिनों से सुगबुगाहट तेज थी। लेकिन, हालिया सैन्य कार्रवाई ने इन चर्चाओं को जमीनी हकीकत में बदल दिया। सऊदी समर्थित यमनी बलों ने भारी तोपखाने का इस्तेमाल करते हुए हूती विद्रोहियों के ठिकानों, बंकरों और साजो-सामान के अड्डों पर ताबड़तोड़ गोले बरसाए।
सैन्य सूत्रों के अनुसार, यह हमला किसी छुटपुट झड़प का हिस्सा नहीं था, बल्कि एक सुनियोजित रणनीति के तहत किया गया ऑपरेशन था। हूती विद्रोही लगातार इन इलाकों से अपनी गतिविधियां संचालित कर रहे थे और आसपास के रिहायशी तथा सरकारी ठिकानों को निशाना बना रहे थे। यमनी सेना की इस जवाबी कार्रवाई से विद्रोहियों को भारी जान-माल के नुकसान की खबर है, हालांकि आधिकारिक तौर पर अभी हताहतों की सटीक संख्या सामने नहीं आई है।
क्यों सुलग रहा है यमन? संघर्ष की पूरी पृष्ठभूमि
यमन पिछले लगभग एक दशक से भीषण गृहयुद्ध की आग में झुलस रहा है। साल 2014 के आखिर में जब ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने राजधानी सना (Sanaa) पर कब्जा कर लिया था, तब से देश में सत्ता के लिए खूनी संघर्ष जारी है।
- सऊदी गठबंधन की एंट्री: अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त यमनी सरकार की मदद के लिए साल 2015 में सऊदी अरब के नेतृत्व वाले गठबंधन ने सैन्य हस्तक्षेप किया था।
- क्षेत्रीय वर्चस्व की लड़ाई: इस संघर्ष को मुख्य रूप से शिया बहुसंख्यक ईरान और सुन्नी बहुसंख्यक सऊदी अरब के बीच क्षेत्रीय वर्चस्व की परोक्ष लड़ाई (Proxy War) के रूप में देखा जाता है।
- हूतियों की आक्रामकता: पिछले कुछ महीनों में लाल सागर (Red Sea) और अदन की खाड़ी में हूती विद्रोहियों द्वारा अंतरराष्ट्रीय जहाजों पर किए गए हमलों ने इस संकट को वैश्विक स्तर पर ला खड़ा किया है।
मारीब और अल-जौफ का रणनीतिक महत्व क्यों है?
विशेषज्ञों का मानना है कि मारीब और अल-जौफ पर नियंत्रण हासिल करना इस युद्ध का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हो सकता है। मारीब यमन का वह आखिरी उत्तरी गढ़ है जो आधिकारिक सरकार और सऊदी समर्थित बलों के पास है। इसके अलावा, यह क्षेत्र तेल और गैस के संसाधनों से समृद्ध है।
यदि हूती विद्रोही मारीब पर कब्जा करने में सफल हो जाते हैं, तो उनका पलड़ा इस पूरे देश में भारी हो जाएगा। यही वजह है कि सऊदी समर्थित सेना किसी भी कीमत पर हूतियों को इन इलाकों में पैर पसारने से रोकने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक रही है। तोपखाने से किया गया यह ताजा हमला इसी रणनीति का एक अहम हिस्सा है।
अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और शांति प्रयासों को झटका
एक तरफ जहां संयुक्त राष्ट्र (UN) और अन्य अंतरराष्ट्रीय देश यमन में स्थायी शांति स्थापित करने के लिए कूटनीतिक प्रयास कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ जमीन पर हो रही इस तरह की सैन्य कार्रवाइयां शांति की उम्मीदों पर पानी फेरती नजर आ रही हैं।
लाल सागर में जहाजों पर हूती हमलों के बाद अमेरिका और उसके सहयोगियों ने भी यमन के भीतर कई ठिकानों पर एयरस्ट्राइक की थी। अब सऊदी समर्थित यमनी सेना का यह जमीनी आक्रामक रुख यह साफ संकेत देता है कि आने वाले दिनों में यह संघर्ष थमने के बजाय और अधिक आक्रामक हो सकता है।
आम जनता की बढ़ रही है मुसीबत
इस सत्ता संघर्ष और गोलाबारी का सबसे बड़ा शिकार यमन की आम जनता हो रही है। दशकों से चल रहे युद्ध के कारण पहले ही दुनिया के सबसे खराब मानवीय संकटों में से एक का सामना कर रहे यमनी नागरिकों के लिए यह नया संघर्ष और अधिक मुश्किलें लेकर आया है। बुनियादी सुविधाओं का अभाव, भुखमरी और विस्थापन का दर्द झेल रहे लोगों के सामने अस्तित्व का संकट खड़ा हो गया है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
Q1: यमन में ताजा हमला किसने और कहां किया है?
Ans: सऊदी समर्थित यमनी सेना ने यमन के रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण प्रांतों—अल-जौफ और मारीब—में ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों के ठिकानों पर तोपखाने से हमला किया है।
Q2: हूती विद्रोहियों को किस देश का समर्थन प्राप्त है?
Ans: हूती विद्रोहियों को आधिकारिक और वैचारिक रूप से ईरान का समर्थन प्राप्त है, जबकि यमन की सरकार को सऊदी अरब के नेतृत्व वाले गठबंधन का समर्थन हासिल है।
Q3: मारीब और अल-जौफ क्षेत्र युद्ध के लिहाज से क्यों महत्वपूर्ण हैं?
Ans: मारीब क्षेत्र तेल और गैस संसाधनों से समृद्ध है और यह सरकार के नियंत्रण वाला आखिरी बड़ा उत्तरी गढ़ है, जिस पर कब्जा करने के लिए दोनों पक्ष लंबे समय से संघर्ष कर रहे हैं।