बिहार की राजधानी पटना में इन दिनों छात्रों का आक्रोश चरम पर है। 70वीं बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) परीक्षा में कथित अनियमितताओं और शिक्षक नियुक्ति परीक्षा (TRE-4) के नियमों में बदलाव की मांग को लेकर मंगलवार को हजारों छात्र सड़कों पर उतर आए। गांधी मैदान से राजभवन की ओर मार्च कर रहे इन उग्र छात्रों को रोकने के लिए पुलिस को भारी मशक्कत करनी पड़ी और अंततः वाटर कैनन का इस्तेमाल करना पड़ा।
छात्रों के मुख्य मुद्दे और क्यों भड़का आक्रोश?
पिछले कुछ दिनों से देश के अलग-अलग राज्यों में छात्र अपनी परीक्षाओं को लेकर मुखर हैं। पहले दिल्ली, फिर झारखंड और अब बिहार में युवाओं का गुस्सा फूट पड़ा है। BPSC के अभ्यर्थियों की मुख्य मांगें निम्नलिखित हैं:
- 70वीं BPSC परीक्षा को कथित अनियमितताओं के चलते रद्द किया जाए।
- शिक्षक नियुक्ति परीक्षा (TRE-4) की प्रक्रिया दो चरणों की बजाय एक ही चरण में पूरी हो।
- TRE-4 की आधिकारिक विज्ञापन अधिसूचना जल्द से जल्द जारी की जाए।
- परीक्षाओं में नेगेटिव मार्किंग को पूरी तरह से समाप्त किया जाए।
- BSSC और सब-इंस्पेक्टर (SI) भर्ती से जुड़े मामलों का त्वरित समाधान हो।
पुलिस और प्रशासन की कड़ी चौकसी
छात्रों के मार्च को देखते हुए पटना प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए थे। गांधी मैदान से राजभवन और मुख्यमंत्री आवास के रास्ते में पड़ने वाले सभी प्रमुख चौराहों पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया था। जगह-जगह लोहे के बैरिकेड्स लगाए गए थे, जिन्हें छात्रों ने उग्र प्रदर्शन के दौरान तोड़ दिया।
विधि-व्यवस्था के उप-मंडल पुलिस अधिकारी (SDPO) कामाख्या नारायण सिंह ने मीडिया से बातचीत में कहा, "हमने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हैं। वरिष्ठ अधिकारी मौके पर मौजूद हैं और छात्रों के साथ सकारात्मक बातचीत भी चल रही है। कई छात्रों को यह समझा दिया गया है कि उनकी कई मांगें मान ली गई हैं। इसके बावजूद अगर छात्र आगे बढ़ने की कोशिश करेंगे, तो कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए उन्हें रोका जाएगा।"
नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव का सरकार पर हमला
इस पूरे घटनाक्रम पर राजनीति भी गरमा गई है। बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर छात्रों की मांगों को नजरअंदाज न करने की अपील की है। तेजस्वी की पार्टी राष्ट्रीय जनता दल (RJD) समेत 14 छात्र और युवा संगठनों ने इस आंदोलन को खुला समर्थन दिया है।
कांग्रेस नेता सुशील कुमार, जो प्रदर्शन स्थल पर मौजूद थे, ने कहा कि छात्र पिछले नौ दिनों से भूख हड़ताल पर हैं, लेकिन सरकार सुनने को तैयार नहीं है। उन्होंने कहा, "यदि सरकार ने समय रहते सार्थक बातचीत की होती, तो यह नौबत ही नहीं आती। हम चाहते हैं कि मुख्यमंत्री एक प्रतिनिधिमंडल को बातचीत के लिए आमंत्रित करें।"
अधिकारी का विवादित बयान और राजनीतिक भूचाल
विवाद तब और बढ़ गया जब BPSC के परीक्षा नियंत्रक राजेश Kumar से मीडिया ने पेपर लीक और अनियमितताओं के आरोपों पर सवाल पूछा। इसके जवाब में उन्होंने एक विवादित मुहावरा इस्तेमाल किया—"हाथी चले बाजार, कुत्ता भौंके हजार।"
इस बयान के बाद विपक्ष हमलावर हो गया है। तेजस्वी यादव ने कड़े शब्दों में निंदा करते हुए कहा कि एक जिम्मेदार अधिकारी द्वारा इस तरह की भाषा का प्रयोग बेहद शर्मनाक है और यह सीधे तौर पर मुख्यमंत्री की भाषा शैली को दर्शाता है। उन्होंने मांग की कि इस अधिकारी को तुरंत बर्खास्त किया जाना चाहिए और सार्वजनिक रूप से माफी मंगवानी चाहिए।
सरकार का नया कदम: 'विद्यार्थी सहयोग शिविर'
बढ़ते विरोध प्रदर्शनों के बीच राज्य सरकार डैमेज कंट्रोल में जुट गई है। मुख्यमंत्री ने घोषणा की है कि छात्रों की शिकायतों के त्वरित समाधान के लिए राज्य भर में 'विद्यार्थी सहयोग शिविर' शुरू किए जाएंगे।
- ये शिविर हर महीने के चौथे मंगलवार को शैक्षणिक संस्थानों में आयोजित किए जाएंगे।
- छात्र सीधे तौर पर संबंधित सरकारी अधिकारियों के सामने अपनी समस्याएं रख सकेंगे।
- विद्यार्थी ऑनलाइन पोर्टल और हेल्पलाइन नंबर 1100 के जरिए भी अपनी शिकायतें दर्ज करा सकेंगे और उनका स्टेटस ट्रैक कर पाएंगे।
फिलहाल पटना के हालात तनावपूर्ण लेकिन नियंत्रण में हैं। छात्र अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं और सरकार की ओर से ठोस आश्वासन का इंतजार कर रहे हैं। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि प्रशासन इस छात्र आंदोलन का क्या हल निकालता है।
