दुनिया में कई तरह की जेलें और सजाएं मौजूद हैं, जिनके बारे में सुनकर ही रूह कांप जाती है। लेकिन क्या आपने कभी ऐसे कैदी के बारे में सुना है जिसे जमीन के नीचे एक शीशे के पिंजरे में कैद रखा गया हो? ब्रिटेन की एक ऐसी ही जेल सुर्खियों में है, जहां एक खूंखार अपराधी पिछले कई दशकों से आम इंसानों की दुनिया से कोसों दूर कांच के एक बक्से में अपनी जिंदगी गुजार रहा है। न तो उसे किसी से बात करने की अनुमति है और न ही वह कभी अन्य कैदियों के संपर्क में आ सका है।
कौन है रॉबर्ट माड्सले?
इस खूंखार कैदी का नाम रॉबर्ट माड्सले (Robert Maudsley) है। ब्रिटेन की आपराधिक न्याय प्रणाली में इसे देश के सबसे खतरनाक और खूंखार अपराधियों की सूची में सबसे ऊपर रखा गया है। माड्सले को समाज के लिए अत्यधिक खतरनाक मानते हुए जेल प्रशासन ने उसे एक विशेष प्रकार के आइसोलेशन में रखा है। उसकी यह सजा किसी फिल्मी कहानी जैसी लग सकती है, लेकिन यह पूरी तरह सच है और वर्तमान समय में भी वह इसी तरह की अमानवीय प्रतीत होने वाली व्यवस्था के तहत अपनी सजा भुगत रहा है।

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क्यों बनाया गया कांच का पिंजरा?
रॉबर्ट माड्सले को सामान्य जेल की बैरकों में रखना प्रशासन के लिए जानलेवा साबित हो चुका था। जेल के भीतर भी उसके खूंखार रवैये और अन्य कैदियों या गार्ड्स पर हमलों की प्रवृत्ति को देखते हुए विशेष सुरक्षा इंतजाम किए गए। अधिकारियों ने उसके लिए एक ऐसा विशेष 'कांच का पिंजरा' (Glass Cage) तैयार करवाया, जो बुलेटप्रूफ और बेहद मजबूत कांच से बना हुआ है। इस पिंजरे के अंदर उसे पूरी तरह अकेला रखा गया है ताकि वह किसी को नुकसान न पहुंचा सके।
दशकों से इंसानी आवाज को तरसा कैदी
मानवाधिकार संगठनों और मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, माड्सले ने पिछले कई दशकों से किसी अन्य इंसान की आवाज नहीं सुनी है और न ही किसी से आमने-सामने बात की है। उसकी सुरक्षा में तैनात सुरक्षाकर्मी भी उससे एक निश्चित दूरी बनाकर रखते हैं और कांच के बाहर से ही उस पर नजर रखते हैं। खाने-पीने की चीजें और अन्य जरूरी सामान भी उसे एक विशेष खिड़की के जरिए दिए जाते हैं, जिससे उसका सीधा संपर्क किसी से न हो सके।
जेल के भीतर का खौफनाक इतिहास
रॉबर्ट माड्सले को यह सजा यूं ही नहीं मिली है। उसके आपराधिक इतिहास ने जेल अधिकारियों को इतना डरा दिया था कि उन्हें मजबूरन ऐसा कदम उठाना पड़ा। माड्सले ने जेल के अंदर ही कई गंभीर अपराधों को अंजाम दिया था, जिसके बाद उसे सुधार गृह या सामान्य बैरक में रखना असंभव हो गया था। उसके अपराधों की गंभीरता को देखते हुए यह फैसला लिया गया कि उसे बाहरी दुनिया और अन्य कैदियों से पूरी तरह काट दिया जाए।
क्या कहती है जेल सुरक्षा व्यवस्था?
ब्रिटिश जेल प्रशासन के अनुसार, माड्सले को इस तरह रखने के पीछे मुख्य उद्देश्य अन्य कैदियों और जेल के कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। आधुनिक तकनीक से लैस इस कांच के पिंजरे में उसकी हर एक गतिविधि पर चौबीसों घंटे सीसीटीवी कैमरों के जरिए नजर रखी जाती है। वह इस पिंजरे के अंदर ही सोता है, उठता है और अपना अधिकांश समय बिताता है।
मानवाधिकारों पर उठते सवाल
दूसरी ओर, इस तरह की सजा को लेकर मानवाधिकार कार्यकर्ताओं द्वारा समय-समय पर सवाल भी उठाए जाते रहे हैं। आलोचकों का मानना है कि किसी इंसान को इतने लंबे समय तक पूरी तरह अकेले कांच के पिंजरे में बंद रखना मानसिक प्रताड़ना के समान है। हालांकि, इसके विपरीत सुरक्षा विशेषज्ञों का तर्क है कि माड्सले जैसे अपराधी समाज और जेल के भीतर अन्य लोगों की जान के लिए इतने बड़ा खतरा हैं कि उनके लिए इस तरह के कठोर कदम उठाना प्रशासनिक मजबूरी बन जाता है।
एक ऐसी जिंदगी जो मौत से भी बदतर है
रॉबर्ट माड्सले की यह कहानी यह सोचने पर मजबूर कर देती है कि अपराध की दुनिया इंसान को किस मुकाम पर ले जाती है। जहां एक तरफ कानून अपना काम करता है, वहीं दूसरी तरफ इस तरह की एकांत सजा इंसानी सहनशक्ति और मानसिक स्थिति की चरम सीमा को दर्शाती है। दशकों बीत जाने के बाद भी माड्सले का यह कांच का पिंजरा दुनिया भर में रहस्य और खौफ का विषय बना हुआ है।