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CBI की फर्जी जैकेट पहनकर अमीरों को लूटने वाला खतरनाक गैंग बेनकाब, 7 गिरफ्तार

CBI की फर्जी जैकेट पहनकर अमीरों को लूटने वाला खतरनाक गैंग बेनकाब, 7 गिरफ्तार

रात के वक्त अचानक आपके घर के दरवाजे पर दस्तक हो, बाहर 6-7 लोग खाकी या फॉर्मल कपड़ों में खड़े हों, जिनके कंधों पर CBI के लोगो वाली जैकेट हो और गले में चमकते हुए सरकारी आईडी कार्ड लटक रहे हों। कोई भी आम इंसान ऐसी स्थिति में सिहर जाएगा। दिल्ली में कुछ ऐसा ही खौफनाक खेल चल रहा था, जहां शातिर अपराधियों का एक गिरोह इसी डर को अपना सबसे बड़ा हथियार बनाकर अमीरों को चूना लगा रहा था।

दिल्ली पुलिस ने इस हाई-प्रोफाइल फर्जी रेड गैंग का पर्दाफाश करते हुए 7 आरोपियों को दबोच लिया है। हैरानी की बात यह है कि इस अपराध की जड़ें सिर्फ राजधानी तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इनके तार मुंबई और जम्मू-कश्मीर तक फैले हुए हैं। आइए जानते हैं कैसे काम करता था यह शातिर सिंडिकेट और कैसे पुलिस ने इनकी चाल को नाकाम किया।

ऐसे रची गई थी प्रशांत विहार की साजिश

यह पूरा मामला 11 अगस्त की रात करीब 10 बजे का है। रोहिणी जिले के प्रशांत विहार इलाके में रहने वाले प्रथम अग्रवाल के घर पर अचानक कुछ लोग पहुंचे। खुद को केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) के अधिकारी बताने वाले इन लोगों ने घर की तलाशी लेने की जिद शुरू कर दी।

लेकिन अग्रवाल परिवार ने घबराने के बजाय सूझबूझ का परिचय दिया। उन्होंने फर्जी अधिकारियों से सर्च वारंट और आधिकारिक दस्तावेज दिखाने की मांग की। वारंट मांगते ही तथाकथित 'अफसरों' के हाथ-पांव फूल गए। इसके बावजूद वे धौंस जमाते रहे और करीब डेढ़ घंटे तक दरवाजे पर ही डटे रहे। इसी बीच जब मोहल्ले के लोग इकट्ठा होने लगे, तो आरोपी यह कहकर खिसक गए कि नोटिस गाड़ी में छूट गया है और वे उसे लेने जा रहे हैं।

एक स्क्रीनशॉट ने खोल दी पूरी पोल

भागने से पहले आरोपियों ने परिवार को डराने के लिए उनके व्हाट्सएप पर एक फर्जी सीबीआई नोटिस भेजा और तुरंत डिलीट भी कर लिया। लेकिन पीड़ित परिवार पहले ही सतर्क हो चुका था और उन्होंने उस नोटिस का स्क्रीनशॉट ले लिया था।

परिवार की शिकायत पर 19 अगस्त को प्रशांत विहार थाने में मामला दर्ज किया गया। रोहिणी जिला डीसीपी शशांक जायसवाल के मुताबिक, पुलिस ने जब सीसीटीवी फुटेज और उस वायरल स्क्रीनशॉट की तकनीकी जांच शुरू की, तो एक के बाद एक चौंकाने वाले खुलासे होते चले गए और पुलिस सीधे मास्टरमाइंड तक पहुंच गई।

63 साल का पूर्व बैंक अधिकारी निकला मास्टरमाइंड

पुलिस जांच में सामने आया कि इस पूरे फर्जीवाड़े के पीछे 63 साल के एक पूर्व बैंक अधिकारी कुलदीप शर्मा का दिमाग था। कुलदीप को अमीर परिवारों की आर्थिक स्थिति और उनके बैंक खातों की बारीक जानकारी थी। उसने ही प्रथम अग्रवाल के परिवार का डेटा इस गैंग को उपलब्ध कराया था।

डेटा मिलने के बाद गैंग की एक महिला सदस्य पूजा अग्रवाल ने अपने रिश्तेदार चंदर प्रकाश शर्मा के साथ मिलकर दिहाड़ी पर कुछ बेरोजगार लड़कों को भर्ती किया। इन लड़कों को नकली रेड में 'सीबीआई अफसर' की भूमिका निभाने के लिए रोजाना के हिसाब से पैसे दिए जाते थे।

बरामदगी और आगे की जांच

पुलिस ने इस छापेमारी में कुल 7 आरोपियों को गिरफ्तार किया है और उनके पास से निम्नलिखित चीजें बरामद की हैं:

  • 8 आधुनिक मोबाइल फोन (जिनमें कई जगहों पर ऐसी ही नकली रेड के वीडियो मिले हैं)
  • CBI के लोगो वाली विशेष जैकेट
  • दर्जनों फर्जी सरकारी पहचान पत्र (ID Cards)
  • फर्जी नोटिस और अन्य दस्तावेज

जांच एजेंसियों को अब इस बात का अंदेशा है कि इस गिरोह ने दिल्ली के अलावा मुंबई और जम्मू-कश्मीर में भी इसी तर्ज पर 2-3 बड़ी वारदातों को अंजाम दिया है। पुलिस अब यह खंगालने में जुटी है कि इनके साथ और कौन-कौन लोग जुड़े हैं और इन्होंने अब तक कुल कितने लोगों को अपनी ठगी का शिकार बनाया है।

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अनुराधा दुबे

अनुराधा दुबे

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अनुराधा दुबे एक समर्पित और अनुभवी कंटेंट राइटर हैं, जो भारत से जुड़ी राजनीतिक, सामाजिक और नीतिगत खबरों को गहराई से समझकर पाठकों तक पहुंचाती हैं। उन...

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