चंदौली: किसानों की ज्वलंत समस्याओं को लेकर भाकियू (टिकैत) ने एसडीएम को सौंपा ज्ञापन
चंदौली (उत्तर प्रदेश): भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) ने देश भर के किसानों की गंभीर समस्याओं और कृषि क्षेत्र की चुनौतियों को लेकर मंगलवार को बिछिया धरना स्थल पर जोरदार प्रदर्शन किया। मंडल प्रवक्ता मणि देव चतुर्वेदी के नेतृत्व में एकत्र हुए दर्जनों किसानों ने प्रधानमंत्री के नाम संबोधित एक ज्ञापन उपजिलाधिकारी (सदर) को सौंपा।
खेती बनी घाटे का सौदा: मणि देव चतुर्वेदी
ज्ञापन सौंपने के बाद सभा को संबोधित करते हुए वाराणसी मंडल के प्रवक्ता मणि देव चतुर्वेदी ने कहा कि वर्तमान समय में देश का कृषि क्षेत्र अब तक के सबसे संकटपूर्ण दौर से गुजर रहा है।
उन्होंने कृषि क्षेत्र की प्रमुख समस्याओं को रेखांकित करते हुए कहा:
- बढ़ती लागत और अनिश्चितता: डीजल, बिजली, बीज, खाद और कृषि यंत्रों के दामों में बेतहाशा वृद्धि ने खेती को पूरी तरह घाटे का सौदा बना दिया है।
- समय पर भुगतान न होना: देश के कई राज्यों में गन्ना किसानों का बकाया भुगतान महीनों से लंबित है, जिससे किसान आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं।
- उर्वरक संकट: ऐन बुवाई के समय किसानों को उर्वरक (खाद) के लिए लंबी लाइनों में लगना पड़ता है।
- प्राकृतिक आपदाओं की मार: बाढ़, सूखा, अतिवृष्टि और भूस्खलन जैसी आपदाओं से फसलों को भारी नुकसान पहुंचा है, लेकिन उचित मुआवजा न मिलने से किसान कर्ज के जाल में फंसते जा रहे हैं।
विदेशी व्यापार समझौतों से भारतीय किसानों को खतरा
मंडल प्रवक्ता ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते और अन्य 'मुक्त व्यापार समझौतों' (FTA) पर गहरा ऐतराज जताया। उन्होंने कहा:
"यदि भारतीय कृषि और डेयरी क्षेत्र को बिना किसी सुरक्षात्मक दायरे के विदेशी कॉरपोरेट कंपनियों के लिए खोल दिया गया, तो इसका सीधा असर देश के करोड़ों छोटे व सीमांत किसानों पर पड़ेगा। विदेशी कृषि उत्पादों पर भारी सब्सिडी मिलती है; यदि उनका आयात बढ़ा, तो हमारी एमएसपी (MSP) व्यवस्था, सार्वजनिक खरीद प्रणाली और खाद्य सुरक्षा पूरी तरह ध्वस्त हो जाएगी।"
इन किसान नेताओं की रही मौजूदगी
बिछिया धरना स्थल पर आयोजित इस सभा की अध्यक्षता रामनारायण यादव ने की, जबकि मंच संचालन स्वयं मणि देव चतुर्वेदी ने किया।
इस अवसर पर जिला सचिव अलाउद्दीन, जिलाध्यक्ष बहादुर यादव, सदर तहसील अध्यक्ष कन्हैया, श्रवण मौर्या, संगठन मंत्री हाकिम सुलेमानी, ब्लॉक अध्यक्ष जिउत, भोला चौहान, अशोक सिंह, अशोक यादव, रतन सिंह, गोपाल सिंह और अजय सिंह सहित लगभग पचास से अधिक किसान मौजूद रहे।