क्या सरकारी ड्यूटी में थोड़ी सी भी ढिलाई अब भारी पड़ सकती है? उत्तर प्रदेश के चंदौली जिले से एक ऐसी ही बड़ी खबर सामने आई है, जिसने प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मचा दिया है। चुनाव आयोग के निर्देशों को हल्के में लेना छह लेखपालों को महंगा पड़ गया है। सकलडीहा तहसील में चुनावी कार्यों और डिजिटल डेटा अपलोडिंग में लापरवाही बरतने पर एसडीएम ने सख्त रुख अपनाते हुए इन सभी कर्मचारियों का एक दिन का वेतन रोक दिया है। इस कार्रवाई के बाद से तहसील के अन्य कर्मचारियों में भी हड़कंप मचा हुआ है।
आखिर क्या है पूरा मामला?
पूरा मामला चुनावी तैयारियों से जुड़ा हुआ है। भारत निर्वाचन आयोग और मुख्य निर्वाचन अधिकारी, उत्तर प्रदेश के स्पष्ट निर्देश हैं कि चुनाव प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी और डिजिटल बनाया जाए। इसी कड़ी में सभी मतदेय स्थलों (पोलिंग बूथों) का अक्षांश और देशांतर (Latitude and Longitude) डेटा बीएलओ ऐप के माध्यम से पोर्टल पर अपलोड किया जाना था।
प्रशासन की ओर से इस कार्य को पूरा करने के लिए 3 अगस्त की समय-सीमा तय की गई थी। इसके लिए संबंधित कर्मचारियों को व्हाट्सएप ग्रुप और फोन कॉल के जरिए कई बार निर्देश भी दिए गए थे, लेकिन सकलडीहा तहसील के कुछ कर्मचारियों ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। तय डेडलाइन निकल जाने के बाद भी इन लेखपालों ने डेटा अपलोड करने का काम पूरा नहीं किया, जिसे प्रशासन ने सीधे तौर पर अनुशासनहीनता और लापरवाही माना है।
समीक्षा बैठक से गायब रहना भी बना बड़ी वजह
लापरवाही सिर्फ डेटा अपलोड तक ही सीमित नहीं रही। जब 13 अगस्त को तहसील सभागार में निर्वाचन कार्यों की प्रगति की समीक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई गई, तो ये सभी छह लेखपाल बिना किसी पूर्व सूचना के बैठक से नदारद रहे।
उच्च अधिकारियों द्वारा बार-बार निर्देश दिए जाने के बावजूद इस तरह की गैर-जिम्मेदाराना हरकत को एसडीएम आकांक्षा सिंह ने बेहद गंभीरता से लिया। बैठक में अनुपस्थिति और चुनावी कार्यों में ढिलाई को आधार बनाते हुए उन्होंने तत्काल प्रभाव से इन सभी लापरवाह कर्मचारियों के खिलाफ कड़ी प्रशासनिक कार्रवाई के आदेश जारी कर दिए।
इन छह लेखपालों पर गिरी गाज
सकलडीहा तहसील प्रशासन द्वारा जिन कर्मचारियों के खिलाफ यह शिकंजा कसा गया है, उनके नाम निम्नलिखित हैं:
- बीरेंद्र प्रसाद (लेखपाल)
- अंजू सचा (लेखपाल)
- प्रियंका गुप्ता (लेखपाल)
- ममता निषाद (लेखपाल)
- शगुफ्ता नज़नीन (लेखपाल)
- चंद्र प्रकाश त्यागी (लेखपाल)
तीन दिन के भीतर मांगा गया स्पष्टीकरण
एसडीएम आकांक्षा सिंह ने इन सभी छह लेखपालों का एक दिन का वेतन रोकने के साथ-साथ इन्हें कारण बताओ (Show Cause) नोटिस भी जारी किया है। प्रशासन ने इन सभी से स्पष्ट रूप से कहा है कि वे तीन दिनों के भीतर अपना लिखित स्पष्टीकरण प्रस्तुत करें।
"निर्वाचन जैसे अतिसंवेदनशील और राष्ट्रीय महत्व के कार्यों में किसी भी स्तर पर कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यदि तय समयसीमा के भीतर संतोषजनक जवाब नहीं मिला, तो मामले की रिपोर्ट जिला निर्वाचन अधिकारी को भेजकर और भी कड़ी विभागीय कार्रवाई की जाएगी।" - प्रशासनिक सूत्र
प्रशासन का कड़ा संदेश: कार्य में पारदर्शिता और जवाबदेही जरूरी
इस पूरी कार्रवाई से यह साफ हो गया है कि आगामी चुनावों को लेकर जिला प्रशासन किसी भी प्रकार की सुस्ती के मूड में नहीं है। चुनाव आयोग की गाइडलाइंस का शत-प्रतिशत पालन सुनिश्चित कराने के लिए अधिकारी अब ग्राउंड लेवल पर बेहद सख्त नजर आ रहे हैं। इस कार्रवाई के बाद से जिले के अन्य तहसीलों और विभागों के कर्मचारियों में भी सुगबुगाहट तेज हो गई है, और वे अपने-अपने कार्यों को समय पर पूरा करने में जुट गए हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
Q1: सकलडीहा में लेखपालों पर यह कार्रवाई क्यों की गई?
Ans: चुनाव आयोग के निर्देशानुसार पोलिंग बूथों का अक्षांश और देशांतर (Latitude-Longitude) डेटा बीएलओ ऐप पर अपलोड न करने और समीक्षा बैठक से गायब रहने के कारण यह कार्रवाई की गई है।
Q2: यह कार्रवाई किस अधिकारी द्वारा की गई है?
Ans: यह सख्त कार्रवाई सकलडीहा की एसडीएम आकांक्षा सिंह द्वारा की गई है।
Q3: लापरवाह कर्मचारियों को क्या सजा दी गई है?
Ans: फिलहाल इन सभी 6 लेखपालों का एक दिन का वेतन रोकते हुए तीन दिन के भीतर स्पष्टीकरण मांगा गया है, संतोषजनक जवाब न मिलने पर आगे और कड़ी कार्रवाई हो सकती है।