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विंध्य एक्सप्रेस-वे भूमि अधिग्रहण का विरोध तेज, वेटरंस एसोसिएशन ने कहा यह राष्ट्रीय सुरक्षा का मामला

विंध्य एक्सप्रेस-वे भूमि अधिग्रहण का विरोध तेज, वेटरंस एसोसिएशन ने कहा  यह राष्ट्रीय सुरक्षा का मामला

चंदौली: विंध्य एक्सप्रेस-वे के खिलाफ मुखर हुआ किसान आंदोलन, अब पूर्व सैनिकों और किसान महासभा का मिला बड़ा समर्थन

चंदौली (उत्तर प्रदेश): विंध्य एक्सप्रेस-वे परियोजना के विरोध में बिछिया (चंदौली) में चल रहा किसानों का अनिश्चितकालीन धरना अब एक बड़े जनांदोलन का रूप लेता जा रहा है। भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) के नेतृत्व में चल रहे इस धरने को अब सरहद की रक्षा करने वाले पूर्व सैनिकों और अखिल भारतीय किसान महासभा का भी खुला समर्थन मिल गया है।

​भाकियू (टिकैत) के वाराणसी मंडल प्रवक्ता और किसान संघर्ष मोर्चा के संयोजक मणि देव चतुर्वेदी ने बताया कि विंध्य एक्सप्रेस-वे के विरोध में जारी यह आंदोलन अब पूरी तरह संगठित हो चुका है। रोज़ाना गांवों से जुड़ रहे किसानों के बाद अब देश के जवानों (पूर्व सैनिकों) ने भी इस लड़ाई में कूदने का ऐलान कर दिया है।

​'धान के कटोरे' के अस्तित्व पर संकट, राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा मामला!

​धरना स्थल पर भारी संख्या में पहुंचे पूर्व सैनिकों के संगठन 'वेटरंस एसोसिएशन' ने आंदोलन को अपना पूर्ण समर्थन दिया। संगठन के जिलाध्यक्ष कैप्टन विजय नारायण सिंह ने प्रशासनिक नीतियों पर तीखे सवाल खड़े करते हुए कहा:

​"जवान भी तो आखिर किसी किसान का ही बेटा है। आज विडंबना देखिए कि सरहद पर तैनात जवान परेशान है और उसका अन्नदाता पिता यहाँ धूप-शेड में अपने खेतों को बचाने के लिए धरने पर बैठा है। चंदौली में हर चार किलोमीटर पर एक एक्सप्रेस-वे निकाला जा रहा है, जिससे किसानों की उपजाऊ जमीनें छिन रही हैं। अगर जवान सरहद पर अपने घर और पुश्तैनी जमीन को लेकर चिंतित रहेगा, तो देश की ड्यूटी कैसे करेगा? यह सीधे तौर पर राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा मामला है।"


​70 किलोमीटर का अधिग्रहण: दोबारा सर्वे की मांग

​नेताओं का कहना है कि चंदौली में 120 मीटर चौड़ाई में लगभग 70 किलोमीटर जमीन का अधिग्रहण किया जाना प्रस्तावित है। यदि ऐसा हुआ, तो पूर्वांचल के 'धान का कटोरा' कहे जाने वाले चंदौली के अस्तित्व पर ही संकट आ जाएगा।

मोर्चे की मुख्य मांगें:

  • ​जिला प्रशासन अग्रणी किसानों को शामिल कर विंध्य एक्सप्रेस-वे का दोबारा (Re-survey) सर्वे कराए।
  • ​जब तक नया सर्वे पूरा नहीं होता, तब तक भूमि अधिग्रहण की सभी कार्यवाहियों को तत्काल स्थगित किया जाए।
  • ​मांगें न माने जाने पर प्रशासन और किसानों के बीच टकराव की स्थिति पैदा हो सकती है।

​'जान दे देंगे, जमीन नहीं देंगे' – किसान महासभा

​धरने को समर्थन देने पहुंचे अखिल भारतीय किसान महासभा के जिलाध्यक्ष श्रवण मौर्या ने हुंकार भरते हुए कहा कि किसान अपने हक की लड़ाई मरते दम तक लड़ेगा। उन्होंने साफ शब्दों में कहा, "हम जान दे देंगे, लेकिन अपनी उपजाऊ जमीन किसी कीमत पर नहीं देंगे।"

​आंदोलन में ये रहे मौजूद

​इस महाधरने में वेटरंस एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष राजेश्वर राजवंत, राष्ट्रीय सचिव नसीम अहमद, कैप्टन राजेंद्र मौर्या, सूबेदार महेंद्र यादव, सूबेदार डीएस उपाध्याय, भोला यादव, गुलाम अली, अलीम, राम प्यारे यादव, बी. सिंह, दिलीप सिंह, विनोद सिंह, बी.पी. यादव समेत दर्जनों पूर्व सैनिक शामिल हुए।

​इसके साथ ही अदसण, पीपरपतिया, फट्टेपुर कला, विजय नारायण पुर, परेवा, खुरुहूजा, सोनडेहरा सहित कई गांवों के सैकड़ों किसान अपनी जमीनों को बचाने के लिए मोर्चे पर डटे रहे।

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