उत्तर प्रदेश के चंदौली जिले से एक ऐसी जमीनी हकीकत सामने आई है जो विकास के दावों की पोल खोलने के लिए काफी है। जिले के दुल्हीपुर क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली सतपोखरी मस्जिद और हसनपुर वाली गली के बाशिंदे इन दिनों नारकीय जीवन जीने को मजबूर हैं। इलाके की मुख्य सड़क और गलियों की हालत इतनी बदतर हो चुकी है कि यहां पैदल चलना भी किसी खतरे से खाली नहीं है। स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्होंने अपनी इस समस्या को लेकर कई बार स्थानीय प्रशासन और नुमाइंदों के दरवाजे खटखटाए, लेकिन हर बार उन्हें सिर्फ कोरे आश्वासन ही मिले। स्थिति यह है कि वर्षों बीत जाने के बाद भी इस गली की सुध लेने वाला कोई नहीं है।
बरसात के दिनों में तालाब बन जाती है गली
इस इलाके की भौगोलिक स्थिति और सीवेज सिस्टम की नाकामी के चलते मानसून या हल्की बारिश के दिनों में यहां का हाल और भी ज्यादा भयावह हो जाता है। बारिश का पानी निकासी न होने के कारण सीधे रास्तों पर जमा हो जाता है, जिससे पूरी गली किसी तालाब या दलदल में तब्दील हो जाती है। पानी के साथ मिलने वाला कीचड़ राहगीरों के लिए मुसीबत का सबब बन जाता है। बच्चों का स्कूल जाना हो या बुजुर्गों का घर से बाहर निकलना, हर कदम पर दुर्घटना का अंदेशा बना रहता है। कई बार दोपहिया वाहन चालक फिसलकर इस कीचड़ भरे पानी में गिर जाते हैं और चोटिल हो जाते हैं।
स्थानीय निवासियों का दर्द अब खुलकर सामने आने लगा है। लोगों का कहना है कि चुनाव के समय बड़े-बड़े वादे किए जाते हैं, लेकिन जैसे ही मतदान खत्म होता है, इस गली की सुध लेने कोई नहीं आता। जलभराव के कारण न केवल आवागमन बाधित होता है, बल्कि गंदे पानी के ठहराव से क्षेत्र में जल जनित बीमारियों फैलने का भी खतरा लगातार मंडरा रहा है। मच्छरों का प्रकोप बढ़ गया है और दुर्गंध के कारण घरों की खिड़कियां तक खोलना मुहाल हो गया है।
भावी प्रत्याशी जावेद अहमद सोनू का बड़ा बयान
इस पूरे मामले को लेकर जब स्थानीय राजनीतिक और सामाजिक गलियारों में हलचल तेज हुई, तो भावी प्रत्याशी जावेद अहमद सोनू ने मीडिया के सामने अपनी बात रखी। उन्होंने क्षेत्र की इस गंभीर समस्या पर गहरा दुख जताते हुए कहा कि उन्होंने इस गली और रास्ते को ठीक कराने के लिए अपनी तरफ से अनगिनत प्रयास किए हैं। प्रशासनिक अधिकारियों से लेकर संबंधित विभागों के चक्कर काटे गए ताकि किसी तरह इस सड़क का निर्माण हो सके और जनता को इस नरक से मुक्ति मिले।
"हमने इस गली की बदहाली को सुधारने के लिए अपने स्तर पर कई बार पुरजोर कोशिश की है। अधिकारियों के सामने गुहार लगाई, लेकिन विडंबना देखिए कि वर्षों बीत जाने के बावजूद इस गंभीर समस्या का कोई भी स्थायी समाधान नहीं निकल पाया है। जनता रोजाना जिस तकलीफ से गुजर रही है, उसे शब्दों में बयान नहीं किया जा सकता।" - जावेद अहमद सोनू, भावी प्रत्याशी
जावेद अहमद सोनू ने आगे कहा कि स्थानीय जनता का यह गुस्सा पूरी तरह जायज है। जब तक बुनियादी सुविधाएं जैसे पक्की सड़क और नाली की व्यवस्था नहीं होगी, तब तक विकास के किसी भी दावे का कोई मतलब नहीं रह जाता। उन्होंने प्रशासन से तत्काल प्रभाव से इस दिशा में ठोस कदम उठाने की मांग की है।
क्या कहती है स्थानीय जनता?
- आवागमन में भारी कठिनाई: एम्बुलेंस या आपातकालीन वाहन तक इस गली के भीतर नहीं आ सकते, जिससे मरीजों की जान पर हमेशा खतरा बना रहता है।
- व्यापार पर असर: सड़क खराब होने के कारण स्थानीय दुकानों और छोटे व्यवसायों की ग्राहकी पर भी बुरा असर पड़ा है।
- प्रशासनिक उदासीनता: कई बार लिखित शिकायत देने के बाद भी आज तक कोई निरीक्षण करने तक नहीं आया।
आगे की राह और उम्मीदें
चंदौली के दुल्हीपुर सतपोखरी की यह गली आज इस बात का जीवंत उदाहरण है कि कैसे जमीनी स्तर पर विकास योजनाओं का क्रियान्वयन कागजों तक सीमित रह जाता है। स्थानीय लोग अब इस बात का इंतजार कर रहे हैं कि कब प्रशासन की नींद खुलेगी और उनकी गली में डामर या सीमेंट की पक्की सड़क बिछेगी। मौजूदा हालात को देखते हुए यह साफ है कि यदि जल्द ही कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई, तो जनता का यह आक्रोश और भी बड़ा रूप ले सकता है। देखना यह होगा कि इस खबर के सामने आने के बाद जिम्मेदार अधिकारी कब तक इस दिशा में कोई सकारात्मक कदम उठाते हैं।