ट्रेनों के जरिए होने वाले अवैध नशीले पदार्थों की तस्करी पर लगाम लगाने के लिए रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) लगातार सख्त कदम उठा रहा है। इसी कड़ी में महाराष्ट्र के वर्धा रेलवे स्टेशन पर एक बड़ी और सफल कार्रवाई को अंजाम दिया गया है। खुफिया इनपुट के आधार पर की गई इस छापेमारी में आरपीएफ ने पुरी-अहमदाबाद एक्सप्रेस ट्रेन से भारी मात्रा में गांजा बरामद किया है। इस कार्रवाई के दौरान पुलिस ने दो तस्करों को भी दबोचा है, जिनके पास से करोड़ों की कीमत का नहीं बल्कि लाखों रुपये मूल्य का अवैध नदार्द पदार्थ मिला है।
गुप्त सूचना पर आरपीएफ और सीआईवी की संयुक्त कार्रवाई
मिली जानकारी के अनुसार, सुरक्षा एजेंसियों को यह गोपनीय सूचना मिली थी कि ओडिशा के रास्ते महाराष्ट्र के विभिन्न हिस्सों में प्रतिबंधित मादक पदार्थों की खेप पहुंचाई जा रही है। इस इनपुट को गंभीरता से लेते हुए नागपुर और वर्धा की आरपीएफ इकाइयों को हाई अलर्ट पर रखा गया था। नागपुर की क्राइम इन्वेस्टिगेशन विंग (CIV) टीम को भी इस तस्कर गिरोह की भनक लग चुकी थी।
तस्कर पुरी-अहमदाबाद सुपरफास्ट एक्सप्रेस के जरिए ओडिशा से गांजा लेकर महाराष्ट्र के नांदुरा इलाके की ओर जा रहे थे। जैसे ही ट्रेन नागपुर स्टेशन से वर्धा की तरफ रवाना हुई, सिविल टीम चुपचाप उसी ट्रेन में सवार हो गई और संदिग्धों पर पैनी नजर रखनी शुरू कर दी।
वर्धा स्टेशन पर घेराबंदी और संदिग्धों की गिरफ्तारी
शनिवार देर शाम जब यह सुपरफास्ट एक्सप्रेस वर्धा रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म पर रुकी, तो पहले से मुस्तैद आरपीएफ की टीम ने फौरन एक्शन लिया। पुलिस बल ने संबंधित कोच को चारों तरफ से घेर लिया और अंदर प्रवेश किया। ट्रेन के भीतर यात्रियों की भारी भीड़ के बीच दो संदिग्ध युवक पुलिस के राडार पर आ गए।
आरपीएफ के जवानों ने तुरंत दोनों संदिग्ध यात्रियों को अपने कब्जे में ले लिया और उनके पास रखे सामान की तलाशी शुरू कर दी। पूछताछ के दौरान दोनों युवकों के हाव-भाव से पुलिस का शक पूरी तरह यकीन में बदल गया।
ट्रॉली बैग के अंदर छिपा रखा था 22 किलो से ज्यादा गांजा
संदिग्धों के पास दो भारी-भरकम ट्रॉली बैग मौजूद थे। जब आरपीएफ अधिकारियों ने उन बैग्स की जिप खोलकर अंदर की तलाशी ली, तो उनके होश उड़ गए। बैग के कपड़ों के बीच में बड़े करीने से गांजे के पैकेट छिपाकर रखे गए थे।
- कुल बरामद गांजा: 22.44 किलोग्राम
- अनुमानित बाजार कीमत: करीब 11 लाख रुपये
- गिरफ्तार आरोपी: अफीर साधू मलिक और टूटू टंटी (दोनों निवासी ओडिशा)
वजन किए जाने पर यह प्रतिबंधित पदार्थ कुल 22.44 किलोग्राम पाया गया, जिसकी अवैध बाजार में कीमत करीब 11 लाख रुपये आंकी गई है। प्रारंभिक पूछताछ में यह बात सामने आई कि ये दोनों तस्कर ओडिशा से इस खेप को लेकर महाराष्ट्र के नांदुरा में किसी को सप्लाई करने जा रहे थे।
लोहमार्ग पुलिस को सौंपे गए आरोपी
गिरफ्तारी के बाद दोनों आरोपियों को वर्धा आरपीएफ थाने लाया गया, जहां् शुरुआती कानूनी प्रक्रिया और दस्तावेज तैयार किए गए। इसके बाद नियमानुसार दोनों आरोपियों और जब्त किए गए 11 लाख रुपये के गांजे को आगे की विस्तृत जांच के लिए वर्धा लोहमार्ग पुलिस के हवाले कर दिया गया।
अब लोहमार्ग पुलिस इस बात की गहराई से छानबीन कर रही है कि इस अवैध नेटवर्क की जड़ें कहां-कहां तक फैली हुई हैं। ओडिशा में यह गांजा उन्हें किसने उपलब्ध कराया था और नांदुरा में इसे किस व्यक्ति तक पहुंचाया जाना था, पुलिस इन तमाम सवालों के जवाब तलाशने में जुट गई है। इस बड़े सिंडिकेट के अन्य चेहरों को बेनकाब करने के लिए गिरफ्तार तस्करों से लगातार पूछताछ की जा रही है।
सफल ऑपरेशन में इनकी रही अहम भूमिका
यह पूरी कार्रवाई वरिष्ठ अधिकारियों के कुशल मार्गदर्शन और दिशा-निर्देशों के तहत अंजाम दी गई। वर्धा आरपीएफ के पुलिस निरीक्षक सी. एल. कनोजिया के नेतृत्व में इस ऑपरेशन को सफलता मिली। इस टीम में रेलवे पुलिस के कर्मचारी संजय जाधव, पंकज, अजय शर्मा के अलावा नागपुर शहर की सीआईवी टीम के सदस्यों ने बेहद अहम और सराहनीय भूमिका निभाई। रेलवे सुरक्षा बल की इस मुस्तैदी से एक बार फिर साबित हो गया है कि ट्रेनों के जरिए होने वाली अवैध तस्करी के खिलाफ सुरक्षा एजेंसियां कितनी चौकस हैं।