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चंडीगढ़ शिक्षक भर्ती मामला गृह मंत्रालय तक पहुंचा, एसएससी बहाली की मांग

चंडीगढ़ शिक्षक भर्ती मामला गृह मंत्रालय तक पहुंचा, एसएससी बहाली की मांग

देश के सुशासित और आधुनिक माने जाने वाले केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ की शिक्षा व्यवस्था इन दिनों एक गंभीर प्रशासनिक और सांगठनिक संकट के दौर से गुजर रही है। स्थिति यह है कि सरकारी स्कूलों में बच्चों को पढ़ाने के लिए शिक्षकों का टोटा पड़ गया है और इस पूरे मामले की गूंज अब सीधे देश की राजधानी दिल्ली स्थित केंद्रीय गृह मंत्रालय के गलियारों तक सुनाई देने लगी है। स्थानीय शिक्षा विभाग में लंबे समय से चली आ रही प्रशासनिक खींचतान और रिक्रूटमेंट एजेंसियों की अनिच्छा के चलते हालात बद से बदतर होते जा रहे हैं, जिस पर अब शिक्षक यूनियनों ने आक्रामक रुख अख्तियार कर लिया है।

चंडीगढ़ के सरकारी स्कूलों में वर्तमान समय में शिक्षकों के 532 पद खाली पड़े हुए हैं। इन पदों पर नियमित चयन प्रक्रिया के जरिए नई नियुक्तियां की जानी थीं, लेकिन हैरान करने वाली बात यह है कि इन भर्तियों को पूरी कराने के लिए कोई भी रिक्रूटमेंट एजेंसी आगे आने को तैयार नहीं है। प्रशासनिक सुस्ती और एजेंसियों के न मिलने के कारण विभाग जुलाई महीने में प्रस्तावित इन भर्तियों को पूरा करने में पूरी तरह असमर्थ साबित हुआ है। नतीजतन, स्कूलों का संचालन सुचारू रूप से जारी रखने के लिए एक वैकल्पिक लेकिन विवादित रास्ता निकाला गया है, जिसके तहत आनन-फानन में डेपुटेशन पर 94 नए शिक्षकों और प्रिंसिपलों को बुला लिया गया है। इन तमाम डेपुटेशन पर आने वाले शिक्षकों के साथ इंटरेक्शन की प्रक्रिया 8 और 9 अक्टूबर को निर्धारित की गई है, जिसका कड़ा विरोध स्थानीय स्तर पर हो रहा है।

विशेष भर्ती समिति और डेपुटेशन कोटे पर गंभीर सवाल

इस पूरे संकट के केंद्र में पंजाब के राज्यपाल द्वारा चंडीगढ़ में गठित की गई एक विशेष भर्ती समिति (स्पेशल रिक्रूटमेंट कमेटी) है, जिसकी अध्यक्षता गृह सचिव और वित्त सचिव करते हैं। कर्मचारी यूनियनों का आरोप है कि इस कमेटी ने चंडीगढ़ कैडर के पदों के आधिकारिक रूप से मंजूर होने के बावजूद, केंद्रीय गृह मंत्रालय की बिना किसी पूर्व अनुमति के शिक्षा विभाग में धड़ल्ले से डेपुटेशन कोटे बना रखे हैं।

यूनियनों का तर्क है कि इन डेपुटेशन कोटों के कारण ही स्थानीय प्रशासन द्वारा नियमित भर्तियां और स्थानीय शिक्षकों की समय पर पदोन्नति (प्रमोशन) रोक दी जाती है। स्थिति यह है कि पड़ोसी राज्यों जैसे पंजाब और हरियाणा से प्रतिनियुक्ति पर आने वाले शिक्षक और प्रिंसिपल नियमों को ताक पर रखकर तय समय से कहीं अधिक यानी पांच से लेकर तीस साल तक की लंबी नौकरी चंडीगढ़ के स्कूलों में ही काट लेते हैं, जबकि स्थानीय कैडर के शिक्षक अपनी ही जगह पर पदोन्नति के लिए तरसते रहते हैं।

कर्मचारी यूनियनों की गृह मंत्रालय से सीधी गुहार

केंद्रीय सेवा नियम (CSR) के पूरी तरह से लागू हो जाने के बाद अब इस प्रकार से मनमाने ढंग से सरकारी स्कूलों को चलाना कानूनी और व्यावहारिक रूप से संभव नहीं बचा है। इसी मुख्य बिंदु को आधार बनाते हुए स्कूल शिक्षा विभाग से जुड़ी विभिन्न प्रमुख कर्मचारी यूनियनों ने केंद्रीय गृह मंत्रालय को ईमेल और आधिकारिक पोर्टल के माध्यम से अपनी विस्तृत अपील भेज दी है। यूनियनों की मुख्य मांग है कि पंजाब के राज्यपाल द्वारा बनाई गई इस स्पेशल रिक्रूटमेंट कमेटी को तत्काल प्रभाव से भंग किया जाए और पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया को सुनिश्चित करने के लिए स्टाफ सिलेक्शन कमीशन (SSC) की बहाली की जाए।

गृह मंत्रालय को भेजी गई इस अपील में इस बात पर विशेष जोर दिया गया है कि एसएससी के माध्यम से निष्पक्ष भर्तियां न होने के कारण पूरे विभाग में आंतरिक मतभेद पैदा हो गए हैं। चंडीगढ़ कैडर के मूल शिक्षकों को उनके हक की नियमित पदोन्नति देने के बजाय लगातार डेपुटेशन के जरिए बाहरी लोगों को तरजीह दी जा रही है। इस अन्यायपूर्ण प्रक्रिया की वजह से स्थानीय कैडर के शिक्षकों की ग्रोथ पूरी तरह बाधित हो गई है। आलम यह है कि सैकड़ों योग्य शिक्षक अपनी पूरी नौकरी के दौरान बिना एक भी प्रमोशन पाए ही तीन दशकों की लंबी सेवा के बाद सेवानिवृत्त होने को मजबूर हो रहे हैं, जो उनके मनोबल को तोड़ने वाला है।

नेताओं और संघों के तीखे बयान

इस पूरे मामले पर विभिन्न शिक्षक संगठनों के नुमाइंदों ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

"शिक्षा इंसान की मूलभूत और सबसे अहम जरूरत है। शहर में 111 स्कूल होने के बावजूद यदि प्रशासन शिक्षकों की नियमित भर्ती करने में असमर्थ रहता है, तो यह हमारे सिस्टम पर एक बहुत बड़ा और चिंताजनक सवालिया निशान है। हमने गृह मंत्रालय से पुरजोर अपील की है कि वे इस मामले में हस्तक्षेप करें, नियमित और पारदर्शी भर्ती के लिए एसएससी को तुरंत प्रभाव से वापस लाएं और हमारे कैडर के शिक्षकों को नियमानुसार समय पर प्रमोशन दें।"
- रंजीत पाल, सचिव, यूटी कैडर एजुकेशनल एम्प्लाइज यूनियन, चंडीगढ़

वहीं, टीचर्स एसोसिएशन ऑफ सिटी ब्यूटीफुल के अध्यक्ष प्रवीण कुमार राव ने अपना दर्द बयां करते हुए कहा कि न्याय और प्रमोशन की उम्मीद में कई शिक्षकों को मजबूरी में अदालत का दरवाजा खटखटाना पड़ा है, लेकिन इसके बावजूद उन्हें राहत नहीं मिल पाई है। वर्तमान में गृह और वित्त सचिव की अध्यक्षता वाली रिक्रूटमेंट कमेटी खुद शिक्षकों के प्रमोशन पर अनावश्यक आपत्तियां उठा रही है, जो पूरी तरह से अनुचित है। पदोन्नति पाना हर कर्मचारी का मौलिक अधिकार है और हमें केंद्र के सभी सीएसआर लाभ मिलने चाहिए, जिसके लिए एसएससी का प्रावधान होना अनिवार्य है।

न्याय के लिए कैट (CAT) की शरण में पहुंचे शिक्षक

समस्या के लंबे समय से अनसुलझे रहने के कारण अब कानूनी लड़ाई भी तेज हो गई है। ज्वाइंट एक्शन कमेटी ऑफ टीचर्स यूनियन ने इस तानाशाही रवैये के खिलाफ केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (CAT) का रुख किया है।

कमेटी के सचिव शिव मूरत ने जानकारी दी कि उन्होंने कैट में आधिकारिक याचिका दायर कर यह सवाल उठाया है कि नियमित पदों पर स्थाई भर्ती और प्रमोशन करने के बजाय डेपुटेशन के सहारे स्कूल चलाना पूरी तरह गैरकानूनी और छात्रहित के खिलाफ है। अदालत के साथ-साथ अब हमारी यह भी मांग है कि केंद्रीय गृह मंत्रालय इस आंतरिक मामले में तुरंत हस्तक्षेप करे और एसएससी को शिक्षक भर्ती की मुख्य जिम्मेदारी सौंपे ताकि सिस्टम पटरी पर आ सके।

गवर्नमेंट टीचर्स यूनियन की अध्यक्ष संतोष ढुल्ल ने अपना रोष व्यक्त करते हुए कहा कि प्रमोशन के नाम पर शिक्षकों का लगातार मानसिक शोषण किया जा रहा है। उनके कई साथी न्याय पाने के लिए अदालतों के चक्कर काटते-काटते बिना किसी प्रमोशन के ही सेवानिवृत्त हो चुके हैं, जो कि बेहद दुखद और निराशाजनक है। हमने गृह मंत्रालय से मांग की है कि वह इस पूरे प्रकरण का संज्ञान ले और भर्ती तथा प्रमोशन दोनों प्रक्रियाओं को सीधे अपने नियंत्रण में ले।भविष्य की राह और संभावित प्रभाव

चंडीगढ़ के शिक्षा जगत में उठा यह बवंडर अब एक बड़े प्रशासनिक टकराव का रूप लेता जा रहा है। यदि समय रहते गृह मंत्रालय इस मामले में कोई ठोस हस्तक्षेप नहीं करता है, तो आने वाले दिनों में यह आंदोलन और अधिक उग्र हो सकता है। स्कूलों में छात्रों की पढ़ाई पर इस उठापटक का सीधा असर पड़ रहा है, क्योंकि एक तरफ जहां शिक्षकों की भारी कमी है, वहीं दूसरी तरफ सेवारत शिक्षकों में असंतोष व्याप्त है। अब देखना यह होगा कि केंद्र सरकार इस मामले में क्या रुख अपनाती है और क्या चंडीगढ़ में एक बार फिर से एसएससी के जरिए पारदर्शी शिक्षक भर्ती का रास्ता साफ हो पाता है या नहीं।

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रोशनी गुप्ता

रोशनी गुप्ता

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रोशनी गुप्ता जमीनी पत्रकारिता के मजबूत स्तंभ हैं। वे स्थानीय स्तर की उन खबरों को सामने लाते हैं, जो अक्सर बड़े प्लेटफॉर्म पर नजर अंदाज हो जाती हैं।...

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