भारतीय रेलवे का पंडित दीन दयाल उपाध्याय (डीडीयू) मंडल अपनी तकनीकी क्षमताओं को लगातार सुदृढ़ करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। मौजूदा समय में पटरियों पर ट्रेनों के बढ़ते भारी दबाव और 700 से अधिक ट्रेनों के सुगम परिचालन को सुनिश्चित करने के लिए मंडल प्रशासन ने एक बड़ा कदम उठाया है। रेलवे ने अपनी ट्रैक्शन पावर सप्लाई को पूरी तरह से अचूक और निर्बाध बनाने के लिए बुनियादी ढांचा मजबूत करना शुरू कर दिया है, ताकि यात्रियों को किसी भी तरह की तकनीकी बाधा या ट्रेन विलंब का सामना न करना पड़े।
छह महीने में हुआ बड़ा बदलाव, बदले गए दर्जनों किलोमीटर तार
ट्रेनों की आवाजाही को बिना किसी रुकावट के जारी रखने के लिए ओवरहेड इलेक्ट्रिफ़िकेशन (OHE) की सेहत दुरुस्त होना बेहद जरूरी होता है। इसी को ध्यान में रखते हुए डीडीयू मंडल ने पिछले छह महीनों के भीतर रिकॉर्ड कार्य किया है। मंडल के अधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, इस अवधि में कुल 38.05 किलोमीटर लंबा एल्युमिनियम कैटेनरी वायर बदला जा चुका है। इसके साथ ही, सुरक्षा के मानकों को सर्वोपरि रखते ہوئے 18.77 किलोमीटर लंबे ओवरएज (अपनी समय सीमा पूरी कर चुके) कॉन्टैक्ट वायर का भी सुरक्षित प्रतिस्थापन कर दिया गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि पुराने और घिस चुके तारों के कारण अक्सर स्पार्किंग या लाइन ट्रिपिंग की समस्याएं सामने आती हैं, जिससे ट्रेनों के पहिये अचानक थम जाते हैं। नए एल्युमिनियम कैटेनरी और कॉन्टैक्ट वायर लगने से इस प्रकार की तकनीकी बाधाओं की गुंजाइश लगभग नगण्य हो जाएगी और ट्रेनों की औसत गति तथा समयबद्धता में सुधार देखने को मिलेगा।
साइडिंग का विद्युतीकरण और माल ढुलाई को नई रफ्तार
यात्री ट्रेनों के अलावा मालगाड़ियों के संचालन और लॉजिस्टिक्स को बढ़ावा देने के लिए भी मंडल प्रशासन पूरी तरह से मुस्तैद नजर आ रहा है। डीडीयू मंडल के अंतर्गत विभिन्न औद्योगिक और रणनीतिक बिंदुओं पर कुल 18 किलोमीटर लंबी साइडिंग का विद्युतीकरण कार्य सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है।
साइडिंग के विद्युतीकरण से यह फायदा होगा कि अब मालगाड़ियों को डीजल इंजनों से इलेक्ट्रिक इंजनों में बदलने या शंटिंग करने में लगने वाले समय की भारी बचत होगी। इससे सीधे तौर पर माल ढुलाई की रफ्तार तेज होगी और रेलवे के राजस्व में भी बढ़ोतरी दर्ज की जाएगी। देश के मुख्य रेलमार्गों में शुमार इस मंडल पर मालगाड़ियों की निर्बाध आवाजाही देश की आर्थिक गतिविधियों को एक नई गति प्रदान करती है।
बरसात और आंधी-तूफान से सुरक्षा के लिए विशेष अभियान
विद्युत लाइनों के ऊपर पेड़ों की शाखाएं गिरने से होने वाले फॉल्ट को रोकने के लिए रेलवे ने एक विशेष ग्रीन ड्राइव चलाई है। ट्रैक्शन पावर को पूरी तरह से सुरक्षित रखने के अभियान के तहत रेलवे ट्रैक के आसपास खड़े खतरनाक पेड़ों और उनकी शाखाओं की व्यापक स्तर पर छंटाई की गई है।
अभियान के मुख्य आंकड़े:
- कुल हटाए गए पेड़: 2,449 पेड़ जो ट्रैक्शन लाइनों के लिए खतरा बन सकते थे, उन्हें सुरक्षित रूप से हटाया गया।
- शाखाओं की छंटाई: पटरियों और ओएचई लाइनों के ऊपर फैली 38,057 खतरनाक शाखाओं की सुनियोजित तरीके से कटाई की गई।
रेलवे अधिकारियों का कहना है कि यह कदम विशेष रूप से मौसम में बदलाव के दौरान आने वाले आंधी-तूफान और तेज हवाओं के वक्त होने वाले पावर फेल्योर को रोकने में बेहद कारगर साबित होगा। अक्सर तेज हवाओं के कारण पेड़ों की डालियां ओएचई तारों पर गिर जाती थीं, जिससे घंटों तक रेल यातायात बाधित रहता था। इस व्यापक छंटाई अभियान के बाद ऐसी घटनाओं पर अंकुश लगेगा।
यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा प्राथमिकता
डीडीयू मंडल से गुजरने वाली व्यस्त लाइनों पर प्रतिदिन लाखों यात्री सफर करते हैं। ऐसे में बुनियादी ढांचे के आधुनिकीकरण की यह पहल यात्रियों के सफर को और अधिक सुरक्षित और भरोसेमंद बनाएगी। रेलवे लगातार आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल कर रहा है ताकि मेंटेनेंस के दौरान कम से कम समय लिया जाए और ट्रेनों का संचालन प्रभावित न हो।
आगामी दिनों में भी मंडल के विभिन्न खंडों में इस तरह के सुदृढ़ीकरण कार्य जारी रहने की उम्मीद है। रेलवे प्रशासन की यह प्रतिबद्धता साबित करती है कि यात्रियों की सुरक्षा और समय पर गंतव्य तक पहुंचाना उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। इस तकनीकी कायाकल्प से न केवल परिचालन सुगम हुआ है, बल्कि रेलवे की संपत्तियों की उम्र भी लंबी हुई है, जो दीर्घकालिक रूप से बेहद फायदेमंद साबित होगा।