मध्य प्रदेश में वन्यजीव संरक्षण और पर्यटन के इतिहास में आज का दिन एक बेहद स्वर्णिम अध्याय जोड़ने जा रहा है। राज्य को चीता पुनर्स्थापना अभियान के तहत एक और बड़ी सौगात मिलने वाली है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव आज यानी 7 अक्टूबर को वन्य प्राणी संरक्षण सप्ताह के समापन अवसर पर वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में कूनो राष्ट्रीय उद्यान से लाए गए दो विशेष मेहमानों को खुले जंगल में विमुक्त करेंगे। इसके साथ ही मध्य प्रदेश में चीतों का यह तीसरा आधिकारिक आवास बन जाएगा, जिससे विंध्य और बुंदेलखंड के इस भूभाग में एक बार फिर सदियों पुरानी प्राकृतिक विरासत की रौनक लौटती हुई दिखाई दे रही है।
कूनो और गांधीसागर के बाद अब बुंदेलखंड में बसाए जा रहे हैं चीते
भारतीय उपमहाद्वीप में चीता प्रोजेक्ट अपनी सफलता के नए आयाम गढ़ रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में शुरू किए गए इस महत्वाकांक्षी अभियान के तहत अब तक श्योपुर के कूनो नेशनल पार्क और गांधीसागर वन्यजीव अभयारण्य में चीतों को सफलतापर्वक बसाया जा चुका है। इसी कड़ी में अब सागर, दमोह और नरसिंहपुर जिलों की सीमाओं तक फैले वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व को चीतों का नया आशियाना बनाया गया है।
प्रशासनिक जानकारी के अनुसार, मुख्यमंत्री मोहन यादव आज नर चीते 'थोलो' और मादा चीता 'CCB-3' को इस नए और अत्याधुनिक आवास में छोड़ेंगे। इन दोनों शानदार वन्यजीवों को विशेष सुरक्षा प्रबंधों और स्वास्थ्य निगरानी के तहत कूनो राष्ट्रीय उद्यान से यहां स्थानांतरित किया गया है। वन्य विभाग की विशेष टीमें इन दोनों पर लगातार पैनी नजर बनाए हुए हैं ताकि नए माहौल में इन्हें किसी भी प्रकार की असहजता का सामना न करना पड़े।
439 हेक्टेयर क्षेत्र में तैयार किया गया है हाई-टेक आवास
किसी भी वन्यजीव को नए परिवेश में ढालना एक बेहद संवेदनशील और तकनीकी कार्य होता है। इसे ध्यान में रखते हुए वन विभाग ने वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में व्यापक और चाक-चौबंद तैयारियां की हैं। चीतों की सुरक्षा और उनकी शुरुआती अनुकूलन प्रक्रिया (Acclimatization) के लिए यहां करीब 439 हेक्टेयर के विशाल क्षेत्र में विशेष बाड़े (Bomas) और अन्य आधुनिक अवस्थापना सुविधाएं विकसित की गई हैं।
- सुरक्षा और निगरानी: चीतों की 24 घंटे ट्रैकिंग के लिए रेडियो कॉलर और हाई-टेक सैटेलाइट सर्विलांस का इस्तेमाल किया जा रहा है।
- पर्यावरण संतुलन: इस पूरे क्षेत्र में चीतों के प्राकृतिक शिकार (Prey Base) जैसे चीतल, सांभर और नीलगाय की पर्याप्त मौजूदगी सुनिश्चित की गई है।
- चिकित्सकीय दल: वन्यजीव चिकित्सकों और विशेषज्ञों का एक विशेष दल हर समय रिजर्व परिसर में तैनात रहेगा।
मध्य प्रदेश का सबसे बड़ा टाइगर रिजर्व है वीरांगना दुर्गावती
ऐतिहासिक और भौगोलिक दृष्टि से देखें तो वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व (जिसे पहले नौरादेही वन्यजीव अभयारण्य के नाम से जाना जाता था) बेहद समृद्ध है। यह कुल 2339 वर्ग किलोमीटर के विशाल भूभाग में फैला हुआ मध्य प्रदेश का सबसे बड़ा टाइगर रिजर्व है। सागर, दमोह और नरसिंहपुर के जंगलों को मिलाकर 20 सितंबर 2023 को इसे आधिकारिक तौर पर टाइगर रिजर्व का दर्जा दिया गया था।
घने जंगलों, पथरीली पहाड़ियों और प्रचुर जल स्रोतों से लैस यह इलाका चीतों के प्राकृतिक आवास के लिए पूरी तरह अनुकूल माना जाता है। यहां पहले से ही बाघ, तेंदुए, भालू और हिरणों की कई प्रजातियां स्वतंत्र विचरण करती हैं, जो अब चीतों की मौजूदगी के बाद एक संपूर्ण और संतुलित इकोसिस्टम का निर्माण करेंगी।
सागर और बुंदेलखंड में खुलेगी रोजगार और पर्यटन की नई राहें
किसी भी क्षेत्र में जब इतने बड़े स्तर पर वन्यजीव संरक्षण परियोजनाएं आती हैं, तो उसका सीधा सकारात्मक प्रभाव स्थानीय अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। विशेषज्ञों का मानना है कि वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में चीतों के आने से बुंदेलखंड क्षेत्र में वाइल्डलाइफ टूरिज्म (वन्यजीव पर्यटन) को अभूतपूर्व बढ़ावा मिलेगा।
देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों की आवभगत के लिए होटल, होम-स्टे, रिसॉर्ट, और स्थानीय परिवहन सेवाओं का विस्तार तेजी से होगा। इसके अलावा स्थानीय गाइड, जिप्सम चालक, ढाबा संचालक और पारंपरिक हस्तशिल्प से जुड़े ग्रामीण कारीगरों को अपनी आजीविका के नए और बेहतर साधन मिलेंगे। मध्य प्रदेश सरकार का यह कदम ग्रामीण विकास और आर्थिक संबलता की दिशा में मील का पत्थर साबित हो सकता है।
देशभर में लगातार बढ़ रही है चीतों की संख्या
भारत में चीता पुनर्स्थापना अभियान अपनी स्थापना के बाद से लगातार सकारात्मक परिणाम दे रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 17 सितंबर 2022 को कूनो राष्ट्रीय उद्यान में नामीबिया से लाए गए पहले जत्थे को विमुक्त कर इस ऐतिहासिक प्रोजेक्ट का श्रीगणेश किया था। इसके बाद दक्षिण अफ्रीका से भी चीतों को भारत लाया गया।
हाल ही में, 5 अक्टूबर 2026 को कूनो नेशनल पार्क में एक बड़ी खुशखबरी सामने आई, जब भारत में ही जन्मी मादा चीता KJP21 ने पांच स्वस्थ शावकों को जन्म दिया। इस सुखद घटना के बाद भारत में अब कुल चीतों की संख्या बढ़कर 60 हो गई है, जिनमें से 41 चीते ऐसे हैं जिनका जन्म भारत की धरती पर ही हुआ है। यह इस बात का प्रमाण है कि भारत की आबोहवा अफ्रीकी चीतों के वंश विस्तार के लिए पूरी तरह मुफीद है।
विभिन्न रिजर्वों में चीतों का वर्तमान वितरण
मुख्यमंत्री मोहन यादव द्वारा आज दो और चीतों को वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में छोड़े जाने के बाद मध्य प्रदेश और देश के विभिन्न पार्कों में चीतों का नया गणित इस प्रकार रहेगा:
- कूनो राष्ट्रीय उद्यान: थोलो और CCB-3 के यहां से विस्थान के बाद अब कूनो में कुल 54 चीते मौजूद रहेंगे।
- गांधीसागर वन्यजीव अभयारण्य: यहां दक्षिण अफ्रीकी मूल के नर चीते प्रभास, पावक, मादा धीरा और सितंबर 2026 में बोत्सवाना से लाई गई मादा राधा सहित कुल 4 चीते पल रहे हैं।
- वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व: आज से थोलो और CCB-3 के जुड़ने के बाद इस नए आवास में चीतों की चहलकदमी शुरू हो जाएगी।
कुल मिलाकर, मध्य प्रदेश का यह नया अध्याय देश के वन्यजीव संरक्षण मानचित्र पर एक और स्वर्णिम पंक्ति लिख रहा है। पर्यावरण प्रेमियों और स्थानीय नागरिकों में इसको लेकर भारी उत्साह देखा जा रहा है।