मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी कहे जाने वाले इंदौर शहर में एक बार फिर से प्रशासनिक अमला एक्शन मोड में नजर आया। शहर के विकास कार्यों को रफ्तार देने और यातायात व्यवस्था को सुगम बनाने के लिए नगर निगम ने अपनी कमर कस ली है। इसी कड़ी में बहुप्रतीक्षित आरई-2 (RE-2) रोड के निर्माण कार्य में आ रही बड़ी बाधाओं को दूर करने के लिए मंगलवार को एक बड़ा रिमूवल अभियान चलाया गया। निगम के बुलडोजरों ने तय योजना के तहत कार्रवाई करते हुए मार्ग में आ रहे कुल 130 बाधक निर्माणों को जमींदोज कर दिया। इस कार्रवाई से इलाके में हड़कंप मच गया, वहीं सड़क चौड़ीकरण का रास्ता भी साफ हो गया है।
अग्रवाल स्कूल के पीछे गरजा निगम का पीला पंजा
प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह पूरी कार्रवाई स्थानीय अग्रवाल स्कूल के ठीक पीछे वाले क्षेत्र में अंजाम दी गई। इस हिस्से में लंबे समय से सड़क चौड़ीकरण का काम रुका हुआ था क्योंकि कई पक्के और कच्चे निर्माण मार्ग के बीच में आ रहे थे। नगर निगम के रिमूवल विभाग की टीम भारी पुलिस बल के साथ अहले सुबह ही मौके पर पहुंच गई थी। जैसे ही निगम के बुलडोजर ने बाधक निर्माणों को गिराना शुरू किया, स्थानीय लोगों की भीड़ जमा हो गई। हालांकि, विरोध की किसी भी स्थिति से निपटने के लिए पुलिस प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद नजर आया।
अधिकारियों का साफ कहना है कि शहरहित में किए जा रहे इन विकास कार्यों में किसी भी तरह की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जो लोग स्वेच्छा से अपने अवैध या बाधक हिस्सों को नहीं हटा रहे हैं, निगम को मजबूरन ऐसी सख्त कार्रवाई करनी पड़ रही है।
क्यों महत्वपूर्ण है RE-2 रोड का निर्माण?
इंदौर शहर लगातार तेजी से फैल रहा है और वाहनों की संख्या में बेतहाशा बढ़ोतरी हो रही है। ऐसे में शहर के ट्रैफिक को मैनेज करना प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। आरई-2 रोड शहर के कई प्रमुख इलाकों को आपस में जोड़ने वाला एक बेहद अहम मास्टर प्लान का हिस्सा है। इस सड़क के बन जाने से न केवल रोजाना लगने वाले ट्रैफिक जाम से मुक्ति मिलेगी, बल्कि वाहन चालकों का समय भी बचेगा।
- शहर के मुख्य मार्गों पर वाहनों का दबाव कम होगा।
- लाखों यात्रियों का आवागमन सुगम और सुरक्षित हो जाएगा।
- आसपास के इलाकों की प्रॉपर्टी वैल्यू और विकास को गति मिलेगी।
- लंबे समय से अटके मास्टर प्लान के कामों को नई रफ्तार मिलेगी।
कार्रवाई से पहले दी गई थी चेतावनी
नगर निगम के अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि यह कार्रवाई पूरी तरह नियमों के दायरे में रहकर की गई है। सड़क निर्माण के आड़े आ रहे इन 130 निर्माणों के मालिकों को पहले ही नोटिस जारी किए जा चुके थे। कई बार अपील करने के बावजूद जब कुछ लोगों ने अपने कब्जे या निर्माण नहीं हटाए, तब निगम ने यह अंतिम कदम उठाया। प्रशासन का तर्क है कि विकास कार्यों में आम जनता का सहयोग बेहद जरूरी है, लेकिन अगर कोई नियमों की अनदेखी करता है तो कानूनी प्रक्रिया के तहत सख्त कदम उठाए जाएंगे।
स्थानीय रहवासियों और दुकानदारों की प्रतिक्रिया
इस बड़ी कार्रवाई के दौरान मौके पर मौजूद कई मकान और दुकान मालिकों के चेहरों पर निराशा साफ देखी जा सकती है। हालांकि, कुछ समझदार नागरिकों का यह भी मानना था कि शहर के विकास के लिए यह दर्द झेलना जरूरी है। एक स्थानीय निवासी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, 'सड़क चौड़ी होना इस क्षेत्र की सबसे बड़ी जरूरत थी, लेकिन कार्रवाई से पहले थोड़ा और समय मिलना चाहिए था ताकि लोग अपना सामान सुरक्षित बाहर निकाल पाते।'
प्रशासन की आगे की क्या है तैयारी?
इंदौर नगर निगम के उच्च अधिकारियों के मुताबिक, आरई-2 रोड के रास्ते में आने वाले अन्य बचे हुए हिस्सों को भी जल्द ही चिन्हित कर साफ किया जाएगा। निगम का लक्ष्य आने वाले महीनों में इस पूरे रूट के निर्माण कार्य को जमीन पर उतारना है ताकि जनता को इसका सीधा लाभ मिल सके। शहरभर में अतिक्रमण के खिलाफ चल रहे इस अभियान को लेकर आम जनता में मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है, लेकिन एक बात तय है कि प्रशासन शहर के ट्रैफिक और इंफ्रास्ट्रक्चर को सुधारने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है।
आने वाले दिनों में शहर के अन्य हिस्सों में भी मास्टर प्लान की सड़कों पर बाधक बने निर्माणों के खिलाफ इसी तरह के बुलडोजर एक्शन देखने को मिल सकते हैं। प्रशासन की इस सख्ती से एक बात साफ है कि इंदौर अपने विकास के मॉडल को और अधिक मजबूत करने के लिए कड़े फैसले लेने से पीछे नहीं हटेगा।