नई दिल्ली में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय कृषि सम्मेलन का समापन हो चुका है, लेकिन इस सम्मेलन से छत्तीसगढ़ के अन्नदाताओं के लिए एक बेहद उत्साहजनक और बड़ी खबर सामने आई है। राजधानी रायपुर से मिली आधिकारिक जानकारी के अनुसार, छत्तीसगढ़ के कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने इस प्रतिष्ठित राष्ट्रीय मंच पर शिरकत की, जहां देश भर से आए कृषि क्षेत्र के दिग्गजों ने मंथन किया। इस सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य आगामी रबी सीजन की फसलों के लिए एक ठोस और व्यापक कार्ययोजना तैयार करना था, ताकि देश का कृषि ढांचा और अधिक मजबूत हो सके।
नई दिल्ली में गूंजा छत्तीसगढ़ का कृषि विकास मॉडल
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और राज्य मंत्री की विशेष उपस्थिति में आयोजित इस महाकुंभ में देश भर के कृषि मंत्री, कृषि वैज्ञानिक और वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। सम्मेलन के दौरान छत्तीसगढ़ के कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने राज्य के कृषि परिदृश्य को लेकर कई अहम मुद्दों पर चर्चा की। उन्होंने राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के विभिन्न घटकों के प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर दिया, ताकि योजनाओं का सीधा और पारदर्शी लाभ अंतिम छोर पर बैठे किसान तक पहुंच सके।
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के राष्ट्रीय सम्मेलनों में राज्यों की भागीदारी से कृषि नीतियों को जमीनी स्तर पर उतारने में मदद मिलती है। छत्तीसगढ़ सरकार का मुख्य लक्ष्य किसानों की खेती की लागत को कम करना और उनकी आय में उल्लेखनीय वृद्धि करना है।
छत्तीसगढ़ के लिए 182 करोड़ रुपये का भारी-भरकम आवंटन
इस सम्मेलन का सबसे बड़ा आकर्षण छत्तीसगढ़ के लिए हुई वित्तीय घोषणा रही। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने छत्तीसगढ़ राज्य के लिए 182 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि का आवंटन किया है और इसका आधिकारिक पत्र भी राज्य के कृषि मंत्री को सौंपा गया। यह वित्तीय सहायता राज्य के कृषि इतिहास में एक मील का पत्थर साबित हो सकती है।
इस बड़ी राहत मिलने के बाद, छत्तीसगढ़ के कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने प्रदेश के समस्त किसानों की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के प्रति गहरा आभार व्यक्त किया है। उन्होंने विश्वास जताया कि यह राशि राज्य में कृषि विकास के पहिए को और तेजी से घुमाने में मददगार साबित होगी।
कहा इस्तेमाल होगी 182 करोड़ की यह राशि?
सरकार की योजनाओं के अनुसार, इस फंड का उपयोग बेहद रणनीतिक तरीके से किया जाएगा ताकि इसका सीधा फायदा किसानों की उत्पादकता और आय पर पड़े। इस राशि के उपयोग को लेकर प्रमुख योजनाएं इस प्रकार हैं:
- विकसित संकल्प अभियान: प्रदेश में जोर-शोर से चलाए जा रहे इस अभियान को अब इस वित्तीय मदद से और अधिक मजबूती और गति मिलेगी।
- खेत बचाओ अभियान: इस आगामी अभियान के जरिए किसानों को आधुनिक और वैज्ञानिक तरीकों से बेहतर उत्पादन करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।
- दलहन और तिलहन का रकबा विस्तार: राज्य में दलहन और तिलहन फसलों की खेती के क्षेत्र (रकबे) को बढ़ाने पर विशेष फोकस रहेगा।
- कम लागत, अधिक मुनाफा: किसानों को उनकी उपज का सही दाम दिलाने और खेती में आने वाले खर्च को कम करने के लिए नई तकनीक का प्रसार किया जाएगा।
केंद्र और राज्य के समन्वय से बदलेगी तस्वीर
कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने स्पष्ट किया कि छत्तीसगढ़ सरकार की नीतियां और केंद्र सरकार की योजनाएं जब आपस में तालमेल बिठाती हैं, तो उसका सबसे बड़ा फायदा प्रदेश के किसानों को मिलता है। आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाकर और संसाधनों का सही उपयोग करके छत्तीसगढ़ कृषि के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में अपनी स्थिति को और मजबूत करने के लिए पूरी तरह तैयार है।
यह 182 करोड़ रुपये का पैकेज न केवल राज्य के ग्रामीण आर्थिकी को गति देगा, बल्कि युवाओं को भी आधुनिक कृषि की ओर आकर्षित करने में एक अहम भूमिका निभाएगा। आने वाले रबी सीजन में इसका असर खेतों में साफ तौर पर देखने को मिल सकता है, जहां किसान नई ऊर्जा के साथ अपनी फसलों की बुवाई और देखरेख की तैयारी में जुट गए हैं।