छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित सुकमा जिले से एक बड़ी और चिंताजनक खबर सामने आ रही है। जिले के कोंटा क्षेत्र में सुरक्षा बलों द्वारा एक खतरनाक आईईडी (IED) को निष्क्रिय करने की प्रक्रिया के दौरान अचानक हुए एक जोरदार धमाके में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के चार जवान गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। इस अप्रत्याशित घटना के बाद पूरे इलाके में सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक मुस्तैद कर दिया गया है, वहीं घायल जवानों के बेहतर इलाज के लिए युद्धस्तर पर कदम उठाए जा रहे हैं।
कैसे हुआ यह हादसा? क्या है पूरा घटनाक्रम
जिला प्रशासन और पुलिस विभाग द्वारा साझा की गई आधिकारिक जानकारी के अनुसार, यह घटना गुरुवार को उस समय हुई जब सुरक्षा बल इलाके में सुरक्षा मानकों के तहत एक महत्वपूर्ण अभियान को अंजाम दे रहे थे। सीआरपीएफ की एक विशेष टीम कोंटा रेंज के अंतर्गत आने वाले विभिन्न कैंपों जैसे पिड़मेल, डब्बाकोंटा, कोलाईगुड़ा और एलार्मडगु के निरीक्षण पर थी। इस दौरान इन कैंपों में रखे गए और लंबे समय से अनुपयोगी हो चुके (अनसर्विसिबल) बचे हुए विस्फोटकों का पूरी सुरक्षा के साथ सुरक्षित विनष्टीकरण (डिफ्यूज) किया जाना था।
इस कार्य को अंजाम देने के लिए जगदलपुर से विशेष रूप से प्रशिक्षित एम्युनिशन टेक्नीशियन टीम (ATT) को बुलाया गया था। यह टीम सीआरपीएफ की 50वीं वाहिनी के एलार्मडगु कैंप, थाना भेज्जी जिला सुकमा पहुंची थी ताकि सभी पुराने विस्फोटकों को तकनीकी दक्षता के साथ नष्ट किया जा सके।
विस्फोटक का अंश उड़कर पास आ गिरा और हो गया ब्लास्ट
थाना भेज्जी क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले एलार्मडगु कैंप से लगभग 200 मीटर की दूरी पर बोदराजपदर नाला स्थित है। इसी नाले के पास तकनीकी टीम द्वारा पूरी सावधानी और सुरक्षा मानकों का पालन करते हुए विस्फोटकों को निष्क्रिय करने की प्रक्रिया शुरू की गई। सब कुछ तय प्रोटोकॉल के तहत चल रहा था, तभी प्रक्रिया के दौरान एक विस्फोटक का छोटा सा अंश या बम का टुकड़ा हवा में उड़कर पास ही आ गिरा और उसमें अचानक जोरदार धमाका हो गया।
इस आकस्मिक दुर्घटना ने वहां मौजूद सभी लोगों को चौंका दिया। इस विस्फोट की चपेट में आने से सुरक्षा ड्यूटी और विनष्टीकरण प्रक्रिया में सीधे तौर पर संलग्न चार जांबाज जवान बुरी तरह घायल हो गए। धमाका इतना तेज था कि आसपास के क्षेत्र में इसकी गूंज सुनाई दी।
घायल जवानों की विस्तृत जानकारी
इस अप्रत्याशित हादसे में घायल हुए चारों जवानों को तुरंत राहत और बचाव दल द्वारा सुरक्षित बाहर निकाला गया। प्रशासनिक रिपोर्ट के मुताबिक, इस दुर्घटना में दो जवानों को गंभीर चोटें आई हैं जबकि दो अन्य को सामान्य चोटें लगी हैं। घायलों का विवरण इस प्रकार है:
- एएसआई एम. के. तिवारी: एटीटी (ATT) टीम के ये अधिकारी इस प्रक्रिया में शामिल थे और इन्हें गंभीर चोटें आई हैं।
- एएसआई अनीश खान: 50वीं वाहिनी सीआरपीएफ के ये अधिकारी भी गंभीर रूप से घायल हुए हैं, जिनका विशेष उपचार चल रहा है।
- निरीक्षक अमरनाथ मिश्रा: एटीटी टीम के इस अधिकारी को इस हादसे में सामान्य चोटें आई हैं।
- प्रधान आरक्षक कुलदीप राज: 50वीं वाहिनी के इस जवान को भी आंशिक और सामान्य चोटें पहुंची हैं।
भद्राचलम रेफर किए गए घायल जवान, एक की हालत गंभीर
घटना के तुरंत बाद बिना एक भी पल गंवाए सभी घायल जवानों को मौके से प्राथमिक उपचार देकर तत्काल शासकीय अस्पताल, कोंटा भेजा गया। कोंटा स्वास्थ्य केंद्र में डॉक्टरों की टीम ने तुरंत उनका शुरुआती इलाज शुरू किया। हालांकि, चोटों की गंभीरता को देखते हुए चिकित्सा विशेषज्ञों की सलाह पर चारों घायल जवानों को बेहतर और उच्च स्तरीय इलाज के लिए पड़ोसी राज्य तेलंगाना के भद्राचलम के एक बड़े अस्पताल में एम्बुलेंस के जरिए रेफर कर दिया गया।
चिकित्सकीय सूत्रों से मिल रही ताजा जानकारी के अनुसार, भद्राचलम के अस्पताल में जवानों का इलाज जारी है, जिनमें से एक जवान की हालत बेहद गंभीर बनी हुई है। डॉक्टरों की एक विशेष टीम उनकी स्थिति पर लगातार निगरानी बनाए हुए है। आवश्यकता पड़ने पर और बेहतर चिकित्सा संस्थानों में एयरलिफ्ट करने या अन्य बड़े शहरों के अस्पतालों में भेजने की तैयारियां भी पूरी कर ली गई हैं। वर्तमान में घटनास्थल और आसपास के कैंपों में स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है और वरिष्ठ अधिकारी पूरे घटनाक्रम पर नजर रखे हुए हैं।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने जताया गहरा दुख
सुकमा के इस हादसे की खबर मिलते ही छत्तीसगढ़ के राजनीतिक गलियारों में भी चिंता की लहर दौड़ गई। राज्य के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस दुर्घटना पर बेहद गहरा दुख व्यक्त किया है। मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (पूर्व में ट्विटर) पर एक आधिकारिक पोस्ट के माध्यम से अपनी संवेदनाएं साझा कीं और जवानों के जल्द स्वस्थ होने की कामना की।
सुकमा जिले के कोंटा क्षेत्र के एलाड़मड़गु कैंप के समीप आईईडी को निष्क्रिय करने के दौरान सीआरपीएफ के चार जवानों के घायल होने की सूचना अत्यंत दुखद है। घायल जवानों का समुचित उपचार सुनिश्चित किया जा रहा है। ईश्वर से सभी जवानों के शीघ्र स्वस्थ होने की प्रार्थना करता हूं। — विष्णुदेव साय, मुख्यमंत्री, छत्तीसगढ़
सुरक्षा बलों का अदम्य साहस और चुनौतियां
यह घटना एक बार फिर इस बात की गवाही देती है कि छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित इलाकों में तैनात हमारे सुरक्षा बल कितनी विपरीत, खतरनाक और जोखिम भरी परिस्थितियों में अपने कर्तव्यों का निर्वहन करते हैं। नक्सल विरोधी अभियानों के दौरान सुरक्षा बलों को न केवल प्रत्यक्ष रूप से दुश्मन का सामना करना पड़ता है, बल्कि जंगलों में बिछाए गए बारूदी सुरंगों और आईईडी को हटाते समय इस प्रकार के तकनीकी जोखिमों का भी सामना करना पड़ता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि पुराने और अनसर्विसिबल विस्फोटकों को नष्ट करना अपने आप में एक अत्यंत संवेदनशील कार्य है, जिसमें एक छोटी सी चूक भी भारी पड़ सकती है। इसके बावजूद हमारे जवान अपनी जान की परवाह किए बिना नागरिकों और क्षेत्र की सुरक्षा के लिए इस कठिन कार्य को अंजाम देते हैं। देश भर के लोग और प्रशासनिक अधिकारी अब इन घायल जवानों के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना कर रहे हैं।