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साउथ चाइना सी में चीन का खतरनाक खेल, रातों-रात बना डाला 6 KM लंबा नया मिलिट्री बेस

साउथ चाइना सी में चीन का खतरनाक खेल, रातों-रात बना डाला 6 KM लंबा नया मिलिट्री बेस

अंतरराष्ट्रीय कानून और पड़ोसी देशों की आपत्तियों को दरकिनार करते हुए ड्रैगन यानी चीन ने एक बार फिर अपनी विस्तारवादी नीति का लोहे जैसा सबूत पेश किया है। ताजा सैटेलाइट तस्वीरों से खुलासा हुआ है कि चीन ने साउथ चाइना सी (दक्षिण चीन सागर) के बेहद संवेदनशील क्षेत्र में पूरी तरह से एक नया 'मैन-मेड आइलैंड' (कृत्रिम द्वीप) तैयार कर लिया है। इस कृत्रिम द्वीप के जरिए बीजिंग ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि वह इस समुद्री इलाके पर अपनी मनमानी और एकछत्र राज स्थापित करने के लिए किसी भी हद तक जा सकता है।

पैरासेल द्वीप समूह के एंटीलोप रीफ पर बना नया अड्डा

सामने आई रिपोर्टों के मुताबिक, यह कृत्रिम द्वीप साउथ चाइना सी के पैरासेल द्वीप समूह (Paracel Islands) के अंतर्गत आने वाले एंटीलोप रीफ (Antelope Reef) पर बनाया गया है। सैटेलाइट से मिली तस्वीरों से पता चलता है कि चीन ने इस रीफ पर लगभग 6 किलोमीटर लंबा ढांचा तैयार कर लिया है। इस निर्माण कार्य में भारी-भरकम Dredging (समुद्र की तलहटी से रेत और मलबा निकालना) मशीनों का इस्तेमाल किया गया है, जिससे रातों-रात समुद्र के बीचों-बीच जमीन का एक बड़ा टुकड़ा खड़ा कर दिया गया।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह कोई सामान्य निर्माण नहीं है, बल्कि इसके पीछे चीन की सोची-समझी सैन्य रणनीति काम कर रही है। इस तरह के द्वीपों का इस्तेमाल चीन भविष्य में अपने युद्धपोतों, फाइटर जेट्स और मिसाइल प्रणालियों को तैनात करने के लिए फॉरवर्ड ऑपरेटिंग बेस के रूप में करता आया है।

क्यों महत्वपूर्ण है एंटीलोप रीफ का इलाका?

पैरासेल द्वीप समूह रणनीतिक रूप से दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण और व्यस्त समुद्री मार्गों में से एक है। इस रास्ते से हर साल खरबों डॉलर का वैश्विक व्यापार गुजरता है। इसके अलावा, इस क्षेत्र में तेल और प्राकृतिक गैस के अपार भंडार होने की भी संभावना है। यही वजह है कि चीन इस पूरे इलाके पर अपना दावा ठोकता रहा है, जबकि वियतनाम और ताइवान भी इस क्षेत्र पर अपना अधिकार जताते हैं।

एंटीलोप रीफ पर इस नए 6 किलोमीटर लंबे 'मैन-मेड आइलैंड' के बन जाने से चीन को इस क्षेत्र में अपनी नौसैनिक और हवाई गश्त बढ़ाने में अभूतपूर्व बढ़त मिल जाएगी। सुरक्षा विश्लेषकों का कहना है कि चीन यहाँ रडार स्टेशन, डीープ-वाटर हार्बर और एयरस्ट्रिप जैसी सैन्य बुनियादी संरचनाएं विकसित कर सकता है, जिससे अमेरिकी सेना और उसके सहयोगियों की गतिविधियों पर पैनी नजर रखी जा सकेगी।

अंतरराष्ट्रीय नियमों की धज्जियां

चीन की यह हरकत एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय कानूनों और संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून संधि (UNCLOS) की खुली अवहेलना है। साल 2016 में अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता अदालत ने साउथ चाइना सी पर चीन के तथाकथित 'नाइन-डैश लाइन' के दावे को खारिज कर दिया था। इसके बावजूद, चीन लगातार कृत्रिम द्वीपों का निर्माण करके 'फैक्ट ऑन द ग्राउंड' (जमीनी हकीकत) बदलने की अपनी पुरानी रणनीति पर काम कर रहा है।

  • रेत और कंक्रीट का साम्राज्य: चीन समुद्र के भीतर रीफ्स पर भारी मात्रा में कंक्रीट और रेत डंप करके उन्हें सैन्य अड्डों में बदल रहा है।
  • क्षेत्रीय तनाव में बढ़ोतरी: इस नए निर्माण से आस-पास के देशों जैसे वियतनाम और फिलीपींस की चिंताएं एक बार फिर काफी बढ़ गई हैं।
  • रणनीतिक बढ़त: इन द्वीपों के जरिए चीन अपनी 'एंटी-एक्सेस/एरिया डिनायल' (A2/AD) क्षमता को मजबूत कर रहा है, जिससे दुश्मन सेनाओं का इस क्षेत्र में टिकना मुश्किल हो जाता है।

वैश्विक कूटनीति पर इसके क्या होंगे असर?

चीन के इस कदम से इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में तनाव का पारा एक बार फिर चढ़ना तय माना जा रहा है। अमेरिका पहले ही साउथ चाइना सी में चीन के सैन्यीकरण का कड़ा विरोध करता रहा है और अक्सर अपने युद्धपोत इस क्षेत्र में 'फ्रीडम ऑफ नेविगेशन' (नेविगेशन की स्वतंत्रता) के तहत भेजता रहता है। अब देखना यह होगा कि अमेरिका और उसके क्षेत्रीय सहयोगी देश चीन की इस हरकत का कूटनीतिक या सैन्य स्तर पर क्या जवाब देते हैं।

फिलहाल, यह स्पष्ट है कि चीन वैश्विक शांति की अपीलों को दरकिनार करते हुए साउथ चाइना सी को अपने एक बड़े 'सैन्य किले' में तब्दील करने की अपनी जिद पर अड़ा हुआ है, जो आने वाले समय में एक बड़े संघर्ष की वजह भी बन सकता है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

1. मैन-मेड आइलैंड (कृत्रिम द्वीप) क्या होता है?

जब इंसानों द्वारा तकनीकी साधनों, जैसे ड्रेजिंग मशीनों के जरिए समुद्र के भीतर रेत, कंक्रीट और पत्थरों को जमा करके जमीन का एक नया टुकड़ा तैयार किया जाता है, तो उसे कृत्रिम द्वीप या मैन-मेड आइलैंड कहा जाता है।

2. पैरासेल द्वीप समूह पर कौन-कौन से देश अपना दावा करते हैं?

पैरासेल द्वीप समूह पर मुख्य रूप से चीन, वियतनाम और ताइवान अपना दावा ठोकते हैं। हालांकि, वर्तमान में इस पर पूरी तरह से चीन का सैन्य नियंत्रण है।

3. चीन साउथ चाइना सी में कृत्रिम द्वीप क्यों बना रहा है?

चीन इन द्वीपों का इस्तेमाल अपने मिलिट्री बेस, एयरस्ट्रिप, रडार स्टेशन और पोर्ट्स के रूप में कर रहा है ताकि वह इस सामरिक रूप से महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग पर अपनी सैन्य पकड़ मजबूत कर सके और व्यापारिक जहाजों पर अपना दबदबा बना सके।

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काव्या त्रिपाठी

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Senior Editor

काव्या त्रिपाठी बिजनेस और टेक्नोलॉजी की जटिल दुनिया को सरल और स्पष्ट रूप में प्रस्तुत करने के लिए जानी जाती हैं। वे आर्थिक बदलाव, स्टार्टअप इकोसिस्...

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