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तमिलनाडु की सियासत में भूचाल, राहुल गांधी के यू-टर्न पर दयानिधि मारन का तीखा सवाल

तमिलनाडु की सियासत में भूचाल, राहुल गांधी के यू-टर्न पर दयानिधि मारन का तीखा सवाल

भारतीय राजनीति में बयानों के तीर अक्सर सहयोगियों और विरोधियों दोनों को भेदते नजर आते हैं। तमिलनाडु की सियासत में इस समय कुछ ऐसा ही राजनीतिक भूचाल आया हुआ है, जिसने राष्ट्रीय स्तर पर भी हलचल बढ़ा दी है। लोकसभा सीटों के परिसीमन (Lok Sabha Delimitation 2026) के मुद्दे पर द्रमुक (DMK) और कांग्रेस के बीच वैचारिक तनातनी सतह पर आ गई है। इस विवाद की मुख्य वजह मुख्यमंत्री एमके स्टालिन की पार्टी के भीतर से उठे विरोधाभासी सुर हैं, खासकर वरिष्ठ सांसद दयानिधि मारन द्वारा कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के पुराने बयानों पर उठाए गए सवाल ने सियासी पारा सातवें आसमान पर पहुंचा दिया है।

परिसीमन और सीटों की संख्या: क्या है पूरा विवाद?

साल 2026 में संभावित लोकसभा सीटों के परिसीमन को लेकर दक्षिण भारत के राज्यों में पहले से ही चिंता का माहौल है। दक्षिण भारतीय नेताओं का यह तर्क रहा है कि जिन राज्यों ने जनसंख्या नियंत्रण पर बेहतर काम किया है, उन्हें संसद में सीटों की संख्या कम होने के रूप में 'सजा' नहीं मिलनी चाहिए। तमिलनाडु में यह मांग जोर-शोर से उठाई जा रही थी कि लोकसभा में 543 सीटों की मौजूदा संख्या को यथावत रखा जाए।

हालांकि, हाल ही में मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के एक बयान ने इस पूरी बहस को एक नया मोड़ दे दिया, जिसे राजनीतिक हलकों में 'यू-टर्न' के रूप में देखा जा रहा है। स्टालिन के इस कथित रुख बदलाव के बाद द्रमुक के फायरब्रांड नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री दयानिधि मारन ने सीधे तौर पर कांग्रेस नेतृत्व और राहुल गांधी से तीखे सवाल पूछ लिए हैं।

दयानिधि मारन का सीधा हमला: 'गद्दार' कौन?

एक सार्वजनिक मंच पर बोलते हुए दयानिधि मारन ने कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी के उन पुराने बयानों की याद दिलाई, जिनमें उन्होंने अक्सर दक्षिण भारत के अधिकारों और संघवाद पर अपनी बात रखी थी। मारन का यह आक्रामक तेवर तब सामने आया जब परिसीमन के मुद्दे पर द्रमुक के भीतर से ही अलग-अलग सुर सुनाई देने लगे।

"यदि दक्षिण के राज्यों के साथ परिसीमन के नाम पर अन्याय होता है और हमारे राजनीतिक वजूद को कमजोर किया जाता है, तो इस पर चुप रहने वाले लोग क्या इतिहास की नजर में गद्दार नहीं कहलाएंगे?" - दयानिधि मारन का यह बयान राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है।

मारन ने तंज कसते हुए कहा कि जिन मुद्दों पर कभी कांग्रेस और द्रमुक एक स्वर में केंद्र सरकार को घेरते थे, आज उनमें वैचारिक स्पष्टता की कमी क्यों खल रही है? उन्होंने राहुल गांधी से यह स्पष्ट करने को कहा है कि क्या उनकी पार्टी दक्षिण भारत के हितों के साथ पूरी तरह खड़ी है या चुनावी समीकरणों के चलते स्टैंड बदला जा रहा है?

DMK-Congress Alliance पर मंडराए संकट के बादल?

तमिलनाडु में द्रमुक और कांग्रेस का गठबंधन दशकों पुराना और बेहद मजबूत माना जाता रहा है। आगामी विधानसभा और राष्ट्रीय चुनावों के मद्देनजर दोनों दल एक साथ मिलकर विपक्षी 'इंडिया' (INDIA) गठबंधन की रीढ़ भी हैं। ऐसे में, दयानिधि मारन का अपनी ही सहयोगी पार्टी और उसके शीर्ष नेता पर इस तरह का खुला हमला कई तरह के कयासों को जन्म दे रहा है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस विवाद के पीछे निम्नलिखित मुख्य कारण हो सकते हैं:

  • क्षेत्रीय अस्मिता का दबाव: तमिलनाडु में क्षेत्रीय दल हमेशा से तमिल गौरव और अधिकारों को लेकर बहुत संवेदनशील रहे हैं। परिसीमन का मुद्दा सीधे तौर पर राज्य के राजनीतिक प्रभाव से जुड़ा है।
  • नेतृत्व की दुविधा: द्रमुक नेतृत्व के हालिया बयानों और पार्टी के भीतर के विरोध के बीच समन्वय की कमी साफ झलक रही है।
  • राष्ट्रीय राजनीति में वर्चस्व: विपक्षी गठबंधन के भीतर अपनी शर्तों पर बात मनवाने के लिए क्षेत्रीय दल इस तरह के बयानों का इस्तेमाल प्रेशर पॉलिटिक्स के रूप में करते हैं।

राहुल गांधी की चुप्पी और पार्टी की प्रतिक्रिया

दयानिधि मारन के इन तीखे सवालों के बाद अभी तक कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय नेतृत्व की ओर से कोई आधिकारिक और आक्रामक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि, दिल्ली से लेकर चेन्नई तक के राजनीतिक गलियारों में यह सुगबुगाहट तेज हो गई है कि क्या यह सिर्फ एक स्थानीय नेता की व्यक्तिगत नाराजगी है या इसके पीछे कोई गहरी सियासी रणनीति छिपी है।

कांग्रेस के स्थानीय नेताओं का कहना है कि पार्टी हमेशा से सभी राज्यों के संवैधानिक अधिकारों और लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व के पक्ष में रही है। लेकिन जिस प्रकार से 'यू-टर्न' और 'गद्दार' जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया गया है, उसने निश्चित रूप से कांग्रेस के रणनीतिकारों को असहज कर दिया है।

आगे क्या होगा?

आने वाले दिनों में यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि राहुल गांधी इस मामले पर क्या रुख अपनाते हैं और क्या एमके स्टालिन इस आंतरिक कलह को शांत करने के लिए कोई बड़ा कदम उठाते हैं या नहीं। एक बात तय है कि 2026 के परिसीमन का यह मुद्दा केवल चुनावी नक्शा नहीं बदल रहा, बल्कि वर्तमान राजनीतिक समीकरणों को भी अंदर से हिला रहा है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

Q1: लोकसभा परिसीमन 2026 क्या है और तमिलनाडु में इसका विरोध क्यों हो रहा है?

लोक परिसीमन के तहत देश की नई जनगणना के आधार पर लोकसभा और विधानसभा सीटों की सीमाओं का पुनर्गठन किया जाना है। तमिलनाडु और अन्य दक्षिण भारतीय राज्यों का तर्क है कि उन्होंने जनसंख्या नियंत्रण नीतियों को प्रभावी ढंग से लागू किया है, इसलिए यदि सीटों का आवंटन केवल जनसंख्या के आधार पर हुआ, तो संसद में उनकी ताकत कम हो जाएगी, जो उनके साथ अन्याय होगा।

Q2: दयानिधि मारन ने राहुल गांधी पर क्या आरोप लगाया है?

दयानिधि मारन ने राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी के पुराने रुख का हवाला देते हुए पूछा है कि परिसीमन के मुद्दे पर अब बयानों में बदलाव क्यों आ रहा है। उन्होंने परोक्ष रूप से यह सवाल उठाया कि इस मुद्दे पर अडिग रहने के बजाय रुख बदलने वाले नेता क्षेत्रीय हितों के साथ खड़े हैं या नहीं।

Q3: क्या इस विवाद से DMK और Congress के गठबंधन पर कोई असर पड़ेगा?

फिलहाल दोनों दलों के शीर्ष नेताओं की ओर से गठबंधन टूटने जैसी कोई बात आधिकारिक तौर पर नहीं कही गई है, लेकिन इस तरह के बयानों से आपसी समन्वय और विश्वास पर सवाल जरूर खड़े हो रहे हैं, जिस पर आगामी चुनावों में नजर रहेगी।

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काव्या त्रिपाठी

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Senior Editor

काव्या त्रिपाठी बिजनेस और टेक्नोलॉजी की जटिल दुनिया को सरल और स्पष्ट रूप में प्रस्तुत करने के लिए जानी जाती हैं। वे आर्थिक बदलाव, स्टार्टअप इकोसिस्...

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