जनता की समस्याओं का त्वरित और प्रभावी समाधान करना किसी भी जिला प्रशासन की सबसे बड़ी जिम्मेदारी होती है। इसी कड़ी में मंगलवार को जिला समाहरणालय सभागार में एक महत्वपूर्ण 'लोक संवाद' कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस विशेष कार्यक्रम में जिले के विभिन्न दूर-दराज के इलाकों से पहुंचे आम नागरिकों ने अपनी परेशानियों को सीधे जिला प्रशासन के शीर्ष अधिकारियों के सामने रखा। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए उपायुक्त (डीसी) अजय नाथ झा ने एक-एक कर कुल 31 मामलों की क्रमवार सुनवाई की और संबंधित अधिकारियों को तय समय-सीमा के भीतर ठोस कार्रवाई करने के कड़े निर्देश दिए।
भूमि विवाद और दाखिल-खारिज के मामलों पर विशेष जोर
मंगलवार को आयोजित इस लोक संवाद के दौरान सबसे अधिक शिकायतें जमीन और राजस्व से जुड़ी हुई थीं। आम जनता ने भूमि विवाद, अवैध कब्जे, दाखिल-खारिज में हो रही देरी और अंचल कार्यालयों (जैसे चास और चंद्रपुरा सीओ) से जुड़ी समस्याओं को उपायुक्त के समक्ष रखा। जनता की इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए डीसी अजय नाथ झा ने राजस्व अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि वे भूमि संबंधी मामलों में उपलब्ध पुराने दस्तावेजों और सरकारी अभिलेखों की गहनता से जांच करें। उन्होंने कहा कि जमीनी विवादों के मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और नियमों के दायरे में रहकर जल्द से जल्द मामलों का निष्पादन किया जाए।
कल्याणकारी योजनाओं और सामाजिक सुरक्षा पर प्रशासनिक फोकस
जमीन-जायदाद के अलावा लोक संवाद में सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना, राशन कार्ड बनवाने में आ रही अड़चनें, स्वास्थ्य सेवाएं और सामान्य प्रशासनिक शाखा से जुड़े कई अन्य आवेदन भी पहुंचे। डीसी ने संबंधित विभागों के अधिकारियों को निर्देशित किया कि वे प्राप्त होने वाले प्रत्येक आवेदन की गंभीरता से जांच करें। यह सुनिश्चित किया जाए कि कोई भी पात्र और जरूरतमंद नागरिक सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित न रहे।
- भूमि विवाद: सभी जमीनी मामलों के दस्तावेजों की पारदर्शी जांच।
- दाखिल-खारिज: लंबित मामलों का त्वरित निपटारा।
- राशन कार्ड और सामाजिक सुरक्षा: पात्र लाभुकों को तुरंत योजनाओं का लाभ।
- समय-सीमा: हर आवेदन पर तय अवधि के भीतर एक्शन।
अधिकारियों को सख्त हिदायत: संवेदनशीलता के साथ करें काम
लोक संवाद के दौरान उपायुक्त ने स्पष्ट शब्दों में अधिकारियों को समझाया कि इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य केवल लोगों की फरियाद सुनना भर नहीं है, बल्कि उनकी समस्याओं का जमीनी स्तर पर और समयबद्ध तरीके से समाधान निकालना है। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि जनसमस्याओं का संवेदनशीलता के साथ समाधान करना जिला प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। आवेदनों के निष्पादन में किसी भी तरह का अनावश्यक विलंब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यदि किसी मामले में देरी होती है, तो इसके लिए संबंधित अधिकारी जिम्मेदार होंगे।
आम जनता को मिला आश्वसन
प्रशासन की इस पहल से लोक संवाद में पहुंचे आम नागरिकों में एक उम्मीद की किरण जागी है। कई ऐसे आवेदक थे जिनकी शिकायतें लंबे समय से विभिन्न कार्यालयों के चक्कर काट रही थीं, उन्हें डीसी के समक्ष अपनी बात रखने का सीधा अवसर मिला। उपायुक्त ने सभी फरियादियों को आश्वस्त किया कि उनके द्वारा दिए गए हर एक आवेदन पर नियमानुसार उचित और प्रभावी कार्रवाई की जाएगी, ताकि उन्हें संतोषजनक समाधान मिल सके।
इस प्रकार के नियमित संवाद कार्यक्रम प्रशासन और जनता के बीच की दूरी को कम करने में अहम भूमिका निभाते हैं। जिला प्रशासन का यह कदम न केवल प्रशासनिक पारदर्शिता को बढ़ावा देता है, बल्कि आम आदमी के मन में न्याय व्यवस्था और शासन के प्रति विश्वास को भी मजबूत करता है। आने वाले दिनों में इन 31 मामलों पर होने वाली कार्रवाई पर सबकी निगाहें टिकी रहेंगी।