राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में रहने वाले करोड़ों नागरिकों के लिए एक बेहद बड़ी और राहत भरी खबर सामने आ रही है। अब सरकारी कामों के लिए अलग-अलग दफ्तरों के चक्कर काटने की भागदौड़ से जल्द ही मुक्ति मिलने वाली है। दिल्ली सरकार ने अपनी एक महत्वाकांक्षी योजना पर काम तेज कर दिया है, जिसके तहत शहर के 12 जिलों में भव्य मिनी सचिवालय (Mini Secretariat) बनाए जाने की तैयारी पूरी हो चुकी है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य आम जनता को एक ही छत के नीचे तमाम सरकारी विभागों की सेवाएं सुलभ कराना है।
अलग-अलग दफ्तरों के चक्कर काटने से मिलेगी मुक्ति
अक्सर देखा जाता है कि एक छोटा सा सरकारी काम करवाने के लिए नागरिकों को शहर के एक कोने से दूसरे कोने तक दौड़ लगाना पड़ता है। कभी बिजली विभाग, तो कभी जल बोर्ड या फिर नगर निगम और राजस्व विभाग के अलग-अलग ठिकानों पर जाने से लोगों का समय और पैसा दोनों बर्बाद होता है। इस समस्या की गंभीरता को समझते हुए प्रशासन ने प्रशासनिक सुधारों की दिशा में यह ऐतिहासिक कदम उठाया है।
अब इन मिनी सचिवालयों के बन जाने से लोगों को एक ही परिसर में कई तरह की सरकारी सहूलियतें मिल जाएंगी। योजना के मुताबिक, इन परिसरों में राजस्व विभाग के साथ-साथ दिल्ली जल बोर्ड, बिजली वितरण कंपनियों के काउंटर और नगर निगम (MCD) के उपायुक्त कार्यालय जैसे तमाम महत्वपूर्ण विभाग एक ही स्थान पर काम करेंगे। इससे जनता को भारी सहूलियत होगी और भ्रष्टाचार तथा दलाली पर भी लगाम कसने में मदद मिलेगी।
द्वारका में 212 करोड़ रुपये की लागत से शुरू हुआ काम
इस मेगा प्रोजेक्ट पर जमीनी स्तर पर काम भी शुरू हो चुका है। दक्षिण-पश्चिमी दिल्ली के प्रमुख इलाके द्वारका सेक्टर-10 में इस योजना के तहत लगभग 212 करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत से मिनी सचिवालय के निर्माण की दिशा में काम तेजी से आगे बढ़ रहा है। अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस इस बहुमंजिला परिसर में आधुनिक वास्तुकला और डिजिटल सेवाओं का बेहतरीन समन्वय देखने को मिलेगा, जिससे यहां आने वाले नागरिकों को किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।
पुरानी दिल्ली को छोड़कर 12 जिलों में जमीन चिह्नित
प्रशासनिक सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, पुरानी दिल्ली जिले को छोड़कर बाकी सभी 12 जिलों में मिनी सचिवालय के लिए उपयुक्त जमीनों की पहचान कर ली गई है। इन जमीनों के आवंटन और कानूनी औपचारिकताओं को पूरा करने के बाद निर्माण कार्य को चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जा रहा है। सरकार की कोशिश है कि तय समयसीमा के भीतर इन सभी परियोजनाओं को धरातल पर उतार दिया जाए ताकि आम जनता जल्द से जल्द इसका लाभ उठा सके।
प्रमुख स्थानों पर तय हुई जमीनें
दिल्ली के अलग-अलग हिस्सों में इन सचिवालयों के लिए रणनीतिक रूप से जमीनें तय की गई हैं ताकि लोगों को आवागमन में कोई परेशानी न हो:
- नई दिल्ली जिला: शाहजहां रोड के पास स्थित 12 जामनगर हाउस में भूमि और विकास कार्यालय (L&DO) की जमीन को इसके लिए चुना गया है।
- वेस्ट जिला: पश्चिमी दिल्ली के राजा गार्डन इलाके में दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड (DUSIB) की भूमि पर मिनी सचिवालय का निर्माण किया जाएगा।
- उत्तरी जिला: ऐतिहासिक और प्रशासनिक रूप से महत्वपूर्ण सिविल लाइंस क्षेत्र में L&DO की भूमि को इस परियोजना के लिए तय किया गया है।
तीन श्रेणियों में बांटी गई है पूरी योजना
इस विशाल प्रशासनिक योजना को सुचारू रूप से लागू करने के लिए इसे कुल तीन श्रेणियों में विभाजित किया गया है। प्रत्येक श्रेणी के तहत आने वाले जिलों में भौगोलिक स्थिति और जनसंख्या के घनत्व को ध्यान में रखते हुए बुनियादी ढांचे का विकास किया जा रहा है। अधिकारियों का मानना है कि इस विकेंद्रीकृत व्यवस्था से सरकारी कामकाज में पारदर्शिता आएगी और फाइलों का मूवमेंट भी तेज होगा।
साल 2026 में प्रशासनिक सुधारों की बड़ी छलांग
वर्तमान वर्ष 2026 में बुनियादी ढांचे के विकास और सुशासन की दिशा में यह दिल्ली सरकार का एक बेहद अहम कदम माना जा रहा है। पिछले साल अगस्त के महीने में इस रूपरेखा को तैयार किया गया था, जिसके बाद अब यह योजना कागजों से निकलकर सीधे जमीन पर आकार ले रही है। जानकारों का मानना है कि जब ये सभी 12 मिनी सचिवालय पूरी तरह से बनकर तैयार हो जाएंगे, तो दिल्ली के प्रशासनिक नक्शे पर यह एक मील का पत्थर साबित होगा।
दिल्ली की बढ़ती आबादी और शहरी विस्तार को देखते हुए इस तरह के एकीकृत कार्यालयों की मांग लंबे समय से की जा रही थी। अब देखना यह होगा कि तय समय सीमा के भीतर ये परियोजनाएं किस प्रकार पूरी होती हैं और जनता को इसका कितना और कब तक सीधा लाभ मिलना शुरू होता है। फिलहाल, इस खबर ने दिल्ली के नागरिकों के बीच एक बड़ी उम्मीद जगा दी है।