राजधानी के पार्कों में सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवालिया निशान
देश की राजधानी दिल्ली में महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा के दावों की जमीनी हकीकत एक बार फिर कटघरे में है। हाल ही में सामने आए एक चौंकाने वाले ऑडिट रिपोर्ट से यह खुलासा हुआ है कि दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) के अंतर्गत आने वाले कुल पार्कों में से मात्र 2 प्रतिशत हिस्से में ही सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। यह स्थिति तब है जब इन पार्कों में रोजाना हजारों की संख्या में लोग वॉक करने, एक्सरसाइज करने और परिवार के साथ समय बिताने आते हैं।
इस सनसनीखेज खुलासे के बाद से स्थानीय नागरिकों और आरडब्ल्यूए (Resident Welfare Associations) में भारी रोष देखा जा रहा है। लोगों का कहना है कि शाम ढलते ही कई पार्क असामाजिक तत्वों का अड्डा बन जाते हैं, और वहां पर्याप्त रोशनी या सुरक्षा गार्ड न होने के कारण किसी भी अनहोनी की आशंका हमेशा बनी रहती है।
ऑडिट रिपोर्ट में क्या सामने आया?
प्राप्त जानकारी के अनुसार, दिल्ली के विभिन्न इलाकों में डीडीए के हजारों पार्क फैले हुए हैं। रखरखाव और सुरक्षा के लिहाज से किए गए इस आंतरिक ऑडिट में यह बात सामने आई कि सुरक्षा निगरानी के सबसे बुनियादी साधन यानी इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस (CCTV) की पहुंच इन पार्कों तक लगभग न के बराबर है।
- महज 2% कवरेज: ऑडिट के आंकड़ों के मुताबिक, जितने पार्कों में सुरक्षा उपकरणों की जरूरत है, उसके मुकाबले केवल दो फीसदी पार्कों में ही कैमरे एक्टिव स्थिति में पाए गए।
- अंधेरे कोने और सुनसान रास्ते: कई बड़े पार्कों में चारदीवारी टूटी हुई है और लाइटिंग की उचित व्यवस्था नहीं है, जिससे रात के समय वहां गुजरना जोखिम भरा हो जाता है।
- गार्ड्स की कमी: अधिकांश पार्कों में ट्रेंड सुरक्षा गार्ड्स की भारी कमी है, जिससे असामाजिक तत्वों पर लगाम लगाना मुश्किल हो रहा है।
अधिकारियों की सफाई और आगामी योजनाएं
बढ़ते हंगामे और आलोचनाओं के बाद, दिल्ली विकास प्राधिकरण ने इस मामले पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। एक आधिकारिक बयान में प्राधिकरण की ओर से कहा गया है कि हाई-रिस्क वाले पार्कों की पहचान कर ली गई है और वहां सुरक्षा व्यवस्था को तुरंत प्रभाव से दुरुस्त किया जा रहा है।
“अधिकारियों का कहना है कि जिन पार्कों में महिलाओं और वरिष्ठ नागरिकों का आना-जाना ज्यादा है और जिन्हें संवेदनशील श्रेणी में रखा गया है, वहां प्राथमिकता के आधार पर सीसीटीवी कैमरे लगाए जा रहे हैं। इस पूरी प्रक्रिया को युद्धस्तर पर पूरा किया जाएगा।”
हालांकि, जनता का मानना है कि इस तरह के आश्वासन पहले भी दिए जा चुके हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर बदलाव देखने को नहीं मिलता है। लोगों की मांग है कि सिर्फ चुनिंदा पार्कों ही नहीं, बल्कि हर एक पार्क में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम होने चाहिए।
बढ़ता अपराध और जनता की चिंता
दिल्ली जैसे महानगर में पार्कों का खुला होना और वहां सुबह-शाम सैर करना आम आदमी की दिनचर्या का हिस्सा है। ऐसे में यदि पार्कों के भीतर ही लोग खुद को सुरक्षित महसूस न करें, तो यह प्रशासनिक व्यवस्था पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न लगाता है। पास्ट में हुई कुछ घटनाओं को याद करते हुए नागरिक संगठनों ने मांग की है कि प्रशासन को कागजी कार्रवाई से बाहर निकलकर जल्द से जल्द ठोस कदम उठाने चाहिए।
विशेषज्ञों का भी मानना है कि आधुनिक तकनीक और सीसीटीवी कैमरों की मदद से अपराधों को रोकने में काफी हद तक मदद मिलती है। यदि पार्कों के एंट्री और एग्जिट गेट्स पर हाई-डेफिनिशन कैमरे लगे हों और उनकी लगातार मॉनिटरिंग हो, तो आपराधिक किस्म के लोग पार्क में घुसने से बचेंगे।
आगे की राह: क्या होगा बदलाव?
फिलहाल, डीडीए के इस नए बयान के बाद लोगों की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जमीनी स्तर पर यह काम कब तक शुरू होता है और कब तक सभी पार्कों को सुरक्षित जोन में बदला जाता है। आने वाले दिनों में यदि इन दावों पर अमल नहीं हुआ, तो बड़े पैमाने पर प्रदर्शन भी देखने को मिल सकते हैं। राजधानी की जनता अब सिर्फ आश्वासनों से संतुष्ट होने के मूड में नहीं है, उन्हें अब ठोस और परिणामदायक कार्रवाई चाहिए।