राजधानी दिल्ली से एक बेहद दहला देने वाली और दिल को झकझोर देने वाली घटना सामने आई है। यहाँ के तिमारपुर इलाके के संगम विहार में आवारा कुत्तों का आतंक इस कदर बढ़ गया है कि अबोध बच्चे भी सुरक्षित नहीं हैं। एक ताजा मामले में, महज 18 महीने के एक छोटे से बच्चे पर आवारा कुत्ते ने अचानक हमला कर दिया और उसके चेहरे व गाल का मांस तक नोच डाला। इस खौफनाक घटना के बाद से पूरे इलाके में दहशत का माहौल है और स्थानीय नागरिकों में नगर निगम तथा प्रशासन के खिलाफ भारी आक्रोश देखा जा रहा है।
सीसीटीवी कैमरे में कैद हुआ खौफनाक मंजर
यह पूरी घटना पास में लगे एक सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई, जिसके फुटेज अब सोशल मीडिया और स्थानीय स्तर पर तेजी से वायरल हो रहे हैं। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि किस तरह एक आक्रामक कुत्ता अचानक से मासूम बच्चे के करीब आता है और उस पर टूट पड़ता है। घटना के वक्त बच्चा अपनी गली या घर के पास मौजूद था। कुत्ते के इस अचानक और आक्रामक हमले से बच्चा संभल नहीं पाया और कुछ ही सेकंड में कुत्ता उस पर हावी हो गया।
फुटेज में दिखाई दे रहा है कि कुत्ते ने बच्चे के चेहरे और गाल को बुरी तरह अपने जबड़े में दबोच लिया। बच्चे की चीख-पुकार सुनकर आसपास के लोग तुरंत मदद के लिए दौड़े और किसी तरह कुत्ते को भगाया गया। अगर समय रहते लोग वहां नहीं पहुंचते, तो यह हादसा और भी ज्यादा भयानक हो सकता था।
अस्पताल में चल रहा है मासूम का इलाज
घायल अवस्था में खून से लथपथ बच्चे को तुरंत नजदीकी अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों की देखरेख में उसका इलाज जारी है। डॉक्टरों के अनुसार, बच्चे के गाल पर गंभीर घाव आए हैं और उसे प्लास्टिक सर्जरी या लंबी मेडिकल प्रक्रिया से गुजरना पड़ सकता है। इस घटना के बाद से बच्चे के परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है। माता-पिता सदमे में हैं कि उनके छोटे से बच्चे को इस दर्दनाक स्थिति का सामना करना पड़ा।
स्थानीय लोगों में आक्रोश, प्रशासन पर उठे गंभीर सवाल
इस दिल दहला देने वाली घटना के बाद संगम विहार और आसपास के इलाकों के लोगों में भारी गुस्सा है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि उन्होंने कई बार स्थानीय प्रशासन और नगर निगम अधिकारियों को आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या और उनके आक्रामक स्वभाव के बारे में शिकायत की थी, लेकिन हर बार उनकी शिकायतों को अनसुना कर दिया गया।
गुस्साए निवासियों का कहना है कि:
- सड़क, गली और पार्कों में आवारा कुत्तों का झुंड खुलेआम घूम रहा है।
- स्कूल जाने वाले बच्चों और बुजुर्गों का घर से निकलना मुश्किल हो गया है।
- नगर निगम की ओर से न तो नसबंदी (Sterilization) अभियान ठीक से चलाया जा रहा है और न ही रेबीज रोधी टीके लगाने की कोई ठोस व्यवस्था है।
- शिकायत करने के बावजूद अधिकारी केवल आश्वासन देकर मामले को टाल देते हैं।
दिल्ली में लगातार बढ़ रहे हैं आवारा कुत्तों के हमले
यह कोई पहली बार नहीं है जब दिल्ली से आवारा कुत्तों के हमले की ऐसी दर्दनाक खबर सामने आई हो। पिछले कुछ महीनों में राष्ट्रीय राजधानी के अलग-अलग इलाकों से बच्चों और बुजुर्गों पर कुत्तों के हमले के कई मामले रिपोर्ट किए गए हैं। कभी किसी बच्चे को पार्क में खेलते वक्त नोंच लिया जाता है, तो कभी सुबह टहलने निकले बुजुर्गों को कुत्ते अपना शिकार बनाते हैं।
विशेषज्ञों और पशु अधिकार कार्यकर्ताओं का मानना है कि इस समस्या के समाधान के लिए व्यापक स्तर पर कार्य करने की जरूरत है। एक तरफ जहां आवारा कुत्तों की आबादी को नियंत्रित करने के लिए बड़े पैमाने पर नसबंदी कार्यक्रम चलाने की आवश्यकता है, वहीं दूसरी तरफ आक्रामक कुत्तों को शेल्टर होम में शिफ्ट करने की सख्त नीति अपनानी होगी ताकि इंसानी जिंदगियों को खतरे में पड़ने से बचाया जा सके।
क्या कहती है जनता और क्या होनी चाहिए कार्रवाई?
घटना के बाद से आम जनता में यह चर्चा जोर पकड़ रही है कि पशु प्रेम और इंसानी सुरक्षा के बीच संतुलन कैसे बैठाया जाए। कोई भी इस बात से इनकार नहीं करता कि बेजुबान जानवरों के प्रति क्रूरता नहीं होनी चाहिए, लेकिन मासूम बच्चों की जान दांव पर लग जाए, इसे भी कतई बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।
अब देखना यह होगा कि इस घटना के बाद क्या नगर निगम प्रशासन नींद से जागता है और तिमारपुर इलाके समेत पूरी दिल्ली में आवारा कुत्तों के आतंक से निपटने के लिए कोई ठोस और प्रभावी कदम उठाता है या नहीं। फिलहाल, पीड़ित परिवार और स्थानीय लोग न्याय और प्रशासन से सख्त कार्रवाई की उम्मीद लगाए बैठे हैं।