राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की कार्यपद्धति, इतिहास और राष्ट्र निर्माण में उसके योगदान को अब एक ही छत के नीचे बेहद करीब से समझा जा सकेगा। इसी उद्देश्य के साथ तैयार की गई 'संघ अनुभव शाला' का भव्य लोकार्पण कर दिया गया है। इस ऐतिहासिक अवसर पर संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने शिरकत की और अपने संबोधन में इस शाला को वैचारिक दृष्टि से बेहद अनूठा करार दिया।
अपने संबोधन के दौरान डॉ. मोहन भागवत ने कहा कि यह अनुभव शाला अपने आप में 'गागर में सागर' के समान है। इसका मतलब यह है कि सीमित स्थान या दायरे में संघ की दशकों पुरानी यात्रा, उसके संघर्ष, और समाज सेवा के आयामों को इतने प्रभावी ढंग से समेटा गया है कि हर आने वाले को संगठन की पूरी कार्यप्रणाली का जीवंत अहसास हो जाएगा।
क्या है संघ अनुभव शाला और इसका उद्देश्य?
आज के दौर में जब नई पीढ़ी इतिहास और राष्ट्र सेवा के मूल मंत्रों को आधुनिक तरीकों से समझना चाहती है, तब इस तरह की डिजिटल और भौतिक प्रदर्शनियां बेहद कारगर साबित होती हैं। संघ अनुभव शाला को पूरी तरह से आधुनिक तकनीक, चित्रों, और मल्टीमीडिया के माध्यम से डिजाइन किया गया है ताकि लोग केवल पढ़े नहीं, बल्कि संघ के अनुशासन और सेवा भाव को 'महसूस' कर सकें।
इस शाला में आने वाले आगंतुकों को निम्नलिखित मुख्य बिंदु देखने को मिलेंगे:
- ऐतिहासिक यात्रा: संघ की स्थापना से लेकर वर्तमान समय तक की विकास यात्रा के दुर्लभ संस्मरण।
- सेवा कार्य: देश भर में आपदा प्रबंधन, शिक्षा, स्वास्थ्य और ग्रामीण विकास के क्षेत्र में किए गए कार्यों की झलक।
- विचार और दर्शन: डॉ. हेडगेवार से लेकर वर्तमान समय तक के सरसंघचालकों के विचार और उनके दूरदर्शी निर्णय।
- दैनिक शाखा का स्वरूप: एक सामान्य शाखा से लेकर राष्ट्रव्यापी संगठन बनने तक की पूरी जीवन शैली का सजीव चित्रण।
गागर में सागर: मोहन भागवत के शब्दों के मायने
संघ प्रमुख ने अपने उद्बोधन में स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को केवल बयानों या राजनीतिक चश्मे से नहीं समझा जा सकता। संघ को समझने के लिए इसके स्वयंसेवकों के त्याग, तपस्या और समर्पण को देखना जरूरी होता है। यह अनुभव शाला उसी समर्पण का एक आईना है।
उन्होंने कहा कि जब कोई व्यक्ति इस शाला में प्रवेश करता है, तो उसे कुछ ही घंटों में यह अहसास हो जाता है कि राष्ट्र प्रथम की भावना के साथ कैसे अनगिनت लोगों ने अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया। यही कारण है कि इसे 'गागर में सागर' कहा गया है, क्योंकि इसमें एक विराट संगठन के अंतरमन की थाह लेने का प्रयास किया गया है.
आधुनिक तकनीक और पारंपरिक मूल्यों का संगम
इस अनुभव शाला की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें प्राचीन भारतीय संस्कृति और आधुनिक युग की तकनीक का अद्भुत समन्वय देखने को मिलता है। युवा वर्ग को अपनी ओर आकर्षित करने के लिए इसमें इंटरैक्टिव टच स्क्रीन, वर्चुअल रियलिटी (VR) टूर्स और डॉक्यूड्रामा जैसी सुविधाओं का समावेश किया गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के केंद्र सामाजिक और वैचारिक जागरूकता फैलाने में मील का पत्थर साबित होते हैं। आज के डिजिटल युग में जब भ्रामक सूचनाओं की भरमार है, ऐसे में प्रामाणिक इतिहास और संस्थागत कार्यों को सामने लाने के लिए यह एक सराहनीय पहल है।
आम जनता और युवाओं के लिए खुला रहेगा द्वार
लोकार्पण के बाद इस शाला को आम नागरिकों, शोधकर्ताओं, विद्यार्थियों और विशेषकर युवाओं के लिए खोल दिया गया है। यहां आने वाले युवा यह जान सकेंगे कि कैसे बिना किसी प्रचार के लगातार एक सदी से राष्ट्र निर्माण का कार्य चल रहा है।
संघ के कार्यकर्ताओं का कहना है कि यह केवल एक प्रदर्शनी नहीं है, बल्कि यह प्रेरणा का एक ऐसा स्रोत है जो हर भारतीय के भीतर देश के प्रति कुछ कर गुजरने की भावना को जागृत करेगा। आने वाले दिनों में यहां स्कूलों और कॉलेजों के छात्रों के विशेष दौरे आयोजित किए जाने की भी योजना है।
निष्कर्ष
संघ अनुभव शाला का यह लोकार्पण निश्चित रूप से वैचारिक और सांस्कृतिक गलियारों में एक बड़ी चर्चा का विषय बन गया है। डॉ. मोहन भागवत के मार्गदर्शन में शुरू हुई यह शाला आने वाले समय में इतिहास के पन्नों को पलटने और राष्ट्र सेवा के नए आयामों को गढ़ने का एक प्रमुख केंद्र बनेगी।