उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले से एक बेहद अहम और राहत भरी खबर सामने आ रही है। जिले में आर्थिक रूप से कमजोर और मेहनत-मजदूरी कर अपने परिवार का पेट पालने वाले निर्माण श्रमिकों के जीवन को सुरक्षित बनाने के लिए प्रशासन ने कमर कस ली है। 'जीरो पॉवर्टी अभियान' के तहत अब जिले के हजारों निर्माण श्रमिक परिवारों को मुफ्त और बेहतरीन स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। हाल ही में कलेक्ट्रेट कार्यालय में हुई एक उच्चस्तरीय बैठक में जिला प्रशासन ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि पंजीकृत निर्माण श्रमिकों के आयुष्मान कार्ड प्राथमिकता के आधार पर बनाए जाएं, ताकि उन्हें किसी भी मेडिकल इमरजेंसी के दौरान आर्थिक तंगी का सामना न करना पड़े।
कलेक्ट्रेट सभागार में हुई अहम बैठक, कार्ययोजना पर चर्चा
शुक्रवार को देवरिया कलेक्ट्रेट कार्यालय में जिलाधिकारी मधुसूदन हुल्गी की अध्यक्षता में एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित की गई। इस बैठक का मुख्य एजेंडा भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड (BOCW) के तहत पंजीकृत श्रमिकों और उनके आश्रितों के शत-प्रतिशत आयुष्मान कार्ड तैयार करना था। बैठक में श्रम विभाग, स्वास्थ्य विभाग और ग्राम्य विकास विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
जिलाधिकारी ने अधिकारियों के साथ विस्तार से चर्चा करते हुए निर्देश दिया कि इस अभियान को हल्के में न लिया जाए। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि यह सुनिश्चित किया जाए कि कोई भी पात्र श्रमिक परिवार स्वास्थ्य सुरक्षा जैसी महत्वपूर्ण कल्याणकारी योजना से वंचित न रहने पाए। इसके लिए प्रशासन ने एक ठोस और चरणबद्ध कार्ययोजना तैयार की है, जिसके तहत जमीनी स्तर पर काम किया जा रहा है.
किन श्रमिकों को मिलेगा इस योजना का सीधा लाभ?
आपको बता दें कि इस विशेष अभियान के तहत कुल 38,736 निर्माण श्रमिक परिवारों को लक्षित किया गया है। ये वे परिवार हैं जो श्रम विभाग के पोर्टल पर विधिवत पंजीकृत हैं और निर्माण कार्यों से जुड़े हैं। दिहाड़ी मजदूरी या अन्य निर्माण कार्यों में जुटे इन परिवारों के सामने अक्सर स्वास्थ्य खराब होने पर इलाज का बड़ा संकट खड़ा हो जाता है। पर्याप्त पैसों के अभाव में कई बार ये लोग समय पर सही इलाज नहीं करा पाते हैं।
आयुष्मान भारत योजना के तहत इन परिवारों को हर साल प्रति परिवार 5 लाख रुपये तक के मुफ्त (कैशलेस) इलाज की सुविधा मिलती है। देश के सूचिबद्ध बड़े अस्पतालों में इस कार्ड के जरिए गंभीर से गंभीर बीमारियों का इलाज मुफ्त में कराया जा सकता है। सरकार का यह कदम मजदूरों के जीवन स्तर को ऊपर उठाने और उन्हें स्वास्थ्य के मोर्च पर सुरक्षा चक्र प्रदान करने की दिशा में मील का पत्थर साबित हो सकता है.
विभागीय तालमेल पर जोर: स्वास्थ्य, श्रम और ग्राम्य विकास मिलकर करेंगे काम
किसी भी सरकारी योजना की सफलता उसके जमीनी क्रियान्वयन और विभागों के बीच आपसी तालमेल पर निर्भर करती है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए जिलाधिकारी ने स्वास्थ्य, श्रम और ग्राम्य विकास विभाग के बीच आपसी समन्वय को और अधिक मजबूत करने के निर्देश दिए हैं।
निर्देशों के अनुसार, तीनों विभाग मिलकर यह सुनिश्चित करेंगे कि सूची में शामिल एक-एक श्रमिक तक इसकी जानकारी पहुंचे और उनका कार्ड समय पर जेनरेट हो सके। ग्राम्य विकास विभाग के मैदानी कर्मचारियों को भी इस काम में लगाया गया है ताकि ग्रामीण इलाकों में रह रहे श्रमिकों तक सीधी पहुंच बनाई जा सके।
कहाँ और कैसे बनेगा आयुष्मान कार्ड? जानिए पूरी प्रक्रिया
प्रशासन ने श्रमिकों की सुविधा के लिए पूरी प्रक्रिया को बेहद सरल बना दिया है ताकि किसी को भी भागदौड़ न करनी पड़े। ब्लॉकवार सूचियों को संबंधित स्तर पर उपलब्ध करा दिया गया है। यदि आप या आपके आसपास कोई ऐसा निर्माण श्रमिक है जो इस योजना का लाभ लेना चाहता है, तो वह निम्नलिखित माध्यमों से अपना आयुष्मान कार्ड बनवा सकता है:
- खंड विकास अधिकारी (BDO): पात्र निर्माण श्रमिकों की ब्लॉकवार सूची संबंधित बीडीओ कार्यालय में उपलब्ध है।
- स्वास्थ्य केंद्र: प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC), सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) या स्वास्थ्य उपकेंद्र पर तैनात कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर्स (CHO) से संपर्क किया जा सकता है।
- मैदानी स्वास्थ्य कर्मी: अपने क्षेत्र की आशा बहुओं (ASHA) और एएनएम (ANM) से मिलकर इस बारे में जानकारी ली जा सकती है।
- गाँव स्तर पर पंचायत सहायक: ग्राम पंचायत स्तर पर तैनात पंचायत सहायकों के पास भी इस योजना से जुड़ी सहायता उपलब्ध कराई गई है।
- आयुष्मान मित्र: नज़दीकी सूचीबद्ध अस्पतालों में मौजूद आयुष्मान मित्रों की मदद ली जा सकती है।
श्रमिकों को केवल अपने जरूरी दस्तावेज (जैसे पहचान पत्र, जॉब कार्ड या पंजीकरण संख्या) के साथ अपने नजदीकी केंद्र पर जाना होगा, जहाँ से उनका वेरिफिकेशन कर कार्ड बनाने की प्रक्रिया पूरी कर दी जाएगी.
अधिकारियों को सख्त निर्देश, लापरवाही बर्दाश्त नहीं
समीक्षा बैठक के दौरान जिला प्रशासन ने सभी संबंधित अधिकारियों और ग्राम पंचायत स्तर के कर्मचारियों को हिदायत दी है कि वे पूरी संवेदनशीलता के साथ इस कार्य को पूरा करें। कर्मचारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे खुद आगे बढ़कर पात्र परिवारों को योजना के प्रति जागरूक करें और उनके दस्तावेज तैयार करवाने में हरसंभव सहायता प्रदान करें।
प्रशासन का स्पष्ट मानना है कि योजनाएं कागजों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि उनका वास्तविक लाभ अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक पहुँचना चाहिए। देवरिया प्रशासन की इस पहल से आने वाले कुछ ही हफ्तों में हजारों गरीब परिवारों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। यदि आप भी इस श्रेणी में आते हैं या आपके आसपास कोई निर्माण श्रमिक रहता है, तो बिना देर किए अपने नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र या पंचायत सहायक से संपर्क कर इस सुनहरे अवसर का लाभ उठाएं।