क्रिकेट के मैदान पर रोज नए रिकॉर्ड बनते और टूटते हैं, लेकिन कभी-कभी कुछ ऐसे आंकड़े सामने आ जाते हैं जिन पर यकीन करना मुश्किल हो जाता है। हाल ही में समाप्त हुई इंग्लैंड और पाकिस्तान के बीच तीन मैचों की टेस्ट सीरीज ने क्रिकेट प्रेमियों को एक ऐसा ही हैरान करने वाला और अनोखा रिकॉर्ड दिया है, जिसकी चर्चा पूरी दुनिया के खेल गलियारों में हो रही है।
149 साल के टेस्ट इतिहास में कभी नहीं हुआ ऐसा करिश्मा
जो रूट की कप्तानी वाली इंग्लैंड टीम ने पाकिस्तान को इस रोमांचक टेस्ट सीरीज में 3-0 से करारी शिकस्त दी। सीरीज के तीनों ही मुकाबलों में मेहमान पाकिस्तानी टीम पूरी तरह बेबस नजर आई और एक भी मैच जीतने में कामयाब नहीं हो सकी। बाबर आजम की अगुवाई वाली टीम को इस हार के साथ ही कई शर्मनाक रिकॉर्ड्स का सामना भी करना पड़ा। लेकिन इन सबके बीच जिस बात ने सबसे ज्यादा सुर्खियां बटोरीं, वह था इस सीरीज का एक बेहद अजीब बल्लेबाजी ट्रेंड।
क्रिकेट के 149 साल के लंबे इतिहास में यह पहला मौका है जब कम से कम तीन मैचों की किसी टेस्ट सीरीज में कुल 20 अर्धशतक (Fifties) तो जड़े गए, लेकिन एक भी बल्लेबाज शतक (Century) का जादुई आंकड़ा नहीं छू सका। जी हां, यह सुनने में भले ही अजीब लगे लेकिन यह एक दम सच है। सीरीज के दौरान दोनों टीमों के बल्लेबाजों ने पिच पर टिककर रन बनाने की पूरी कोशिश की, पचास का आंकड़ा भी पार किया, लेकिन तीन अंकों के स्कोर तक पहुंचने में हर कोई नाकामयाब रहा।
जो रूट और बाबर आजम जैसे दिग्गजों का भी शतक से सूखा
इस सीरीज में इंग्लैंड के बल्लेबाजों का दबदबा पूरी तरह कायम रहा, लेकिन वे भी बड़ी पारियों को शतक में तब्दील करने से महरूम रह गए। आधुनिक दौर के महान बल्लेबाजों में शुमार और टेस्ट क्रिकेट में सबसे ज्यादा अर्धशतक लगाने के मामले में दिग्गजों को टक्कर देने वाले जो रूट भी इस सीरीज में एक भी शतक नहीं लगा पाए। रूट ने इस पूरी सीरीज की 5 पारियों में शानदार बल्लेबाजी करते हुए 2 अर्धशतक अपने नाम किए, लेकिन वे तिहरे अंकों के स्कोर तक नहीं पहुंच पाए।
पाकिस्तान की ओर से भी कई बल्लेबाजों ने अच्छी शुरुआत की और फिफ्टी जड़ी, मगर वे उसे बड़ी पारी में बदलने का दबाव नहीं झेल सके। पाकिस्तान के युवा बल्लेबाज सऊद शकील ने इस सीरीज में सबसे बड़ा व्यक्तिगत स्कोर बनाया। शकील ने ऐतिहासिक लॉर्ड्स मैदान पर खेले गए दूसरे टेस्ट मैच की चौथी पारी में बेहतरीन बल्लेबाजी करते हुए 97 रनों की नाबाद पारी खेली। वह अपने पहले और ऐतिहासिक शतक से मात्र 3 रन से चूक गए, जिससे पूरा पाकिस्तानी खेमा निराश हो गया। हालांकि, इस शानदार पारी के साथ उन्होंने लॉर्ड्स के मैदान पर टेस्ट मैच की चौथी पारी में किसी भी पाकिस्तानी बल्लेबाज द्वारा सबसे बड़ा व्यक्तिगत स्कोर बनाने का रिकॉर्ड जरूर अपने नाम कर लिया।शान मसूद और हैरी ब्रूक भी चूके
सिर्फ सऊद शकील ही नहीं, बल्कि पाकिस्तान के पूर्व टेस्ट कप्तान शान मसूद ने भी बर्मिंघम में खेले गए तीसरे टेस्ट मैच की पहली पारी में गजब का संयम दिखाया और 95 रनों की शानदार पारी खेली। वह भी शतक के बेहद करीब पहुंचकर अपना विकेट गंवा बैठे। दूसरी ओर, इंग्लैंड की तरफ से विस्फोटक बल्लेबाज हैरी ब्रूक ने भी 91 रनों की बेहतरीन पारी खेली, लेकिन वह भी दर्शकों को शतक का जश्न मनाने का मौका नहीं दे सके।
आंकड़ों पर नजर डालें तो इस सीरीज में कुल 20 बार बल्लेबाजों ने 50 या उससे अधिक रन बनाए, लेकिन एक भी शतक नहीं आया। इससे पहले भी कुछ ऐसी सीरीज देखने को मिली हैं जहां शतकों का सूखा रहा हो, लेकिन इस पैमाने पर यह अपने आप में एक अनोखा विश्व रिकॉर्ड बन गया है। साल 1993 में पाकिस्तान और जिम्बाब्वे के बीच खेली गई टेस्ट सीरीज के दौरान भी 18 अर्धशतक लगे थे और कोई शतक नहीं आया था। इसके अलावा 1969 में भारत और न्यूजीलैंड के बीच हुई टेस्ट सीरीज में भी 9 फिफ्टी तो बनी थीं, पर सेंचुरी एक भी नहीं लगी थी। इस तरह की अनचाही लिस्ट में पाकिस्तान का नाम अब तीन बार दर्ज हो चुका है, जो टीम की बल्लेबाजी की कमजोरियों को भी उजागर करता है।
72 साल बाद इंग्लैंड की धरती पर पाकिस्तान का क्लीन स्वीप
इस सीरीज में 0-3 से हारने के बाद पाकिस्तान क्रिकेट टीम के नाम एक और बेहद शर्मनाक रिकॉर्ड जुड़ गया है। इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है जब पाकिस्तान की टीम को इंग्लैंड की जमीन पर किसी टेस्ट सीरीज में पूरी तरह से क्लीन स्वीप (सूपड़ा साफ) का सामना करना पड़ा हो। इससे पहले पिछले 72 सालों के इतिहास में कभी ऐसा नहीं हुआ था।
पाकिस्तान ने इंग्लैंड में अपनी पहली टेस्ट सीरीज साल 1954 में खेली थी। तब से लेकर अब तक, भले ही पाकिस्तान ने कई मैच गंवाए हों या सीरीज हारी हों, लेकिन कभी भी ऐसा नहीं हुआ था कि उन्हें सीरीज के सभी के सभी मैचों में हार का मुंह देखना पड़ा हो। इस लिहाज से मौजूदा पाकिस्तानी टीम के लिए यह दौरा बेहद निराशाजनक और चिंताजनक रहा है।
यह टेस्ट सीरीज आंकड़ों के लिहाज से भले ही अजीबोगरीब रिकॉर्ड्स के लिए याद रखी जाएगी, लेकिन यह इस बात का भी प्रमाण है कि आधुनिक टेस्ट क्रिकेट में बल्लेबाज क्रीज पर टिककर शुरुआत तो पा रहे हैं, लेकिन मानसिक दबाव और गेंदबाजों के कड़े आक्रमण के आगे वे अपनी पारियों को बड़े मुकाम तक पहुंचाने में नाकाम साबित हो रहे हैं। क्रिकेट के गलियारों में इस अनोखे रिकॉर्ड की चर्चा आने वाले लंबे समय तक होती रहेगी।