राजस्थान की आबोहवा में पिछले कुछ समय से एक सकारात्मक बदलाव साफ महसूस किया जा रहा है। कभी प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक होने की खबरों से आहत रहने वाला प्रदेश का युवा आज एक नए आत्मविश्वास के साथ अपनी किताबों में जुटा है। राज्य की बागडोर संभालने के बाद मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने जिस जीरो टॉलरेंस की नीति के साथ प्रशासनिक कसावट शुरू की थी, उसके परिणाम अब धरातल पर दिखने लगे हैं। पिछले ढाई वर्षों के दौरान एक भी पेपर लीक न होना इस बात का पुख्ता प्रमाण है कि सिस्टम की मशीनरी अब पूरी तरह दुरुस्त हो चुकी है।
जीरो टॉलरेंस और एसआईटी का कड़ा एक्शन
साल 2023 के आखिर में जब नई सरकार का गठन हुआ था, तब युवाओं के सामने सबसे बड़ा संकट भविष्य की अनिश्चितता का था। लगातार पेपर लीक होने से मेहनतकश छात्रों का सिस्टम से भरोसा उठ चुका था। इस नासूर को जड़ से खत्म करने के लिए मुख्यमंत्री ने कार्यभार संभालते ही सबसे पहले स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) का गठन किया। इस टीम ने ताबड़तोड़ कार्रवाई करते हुए नकल माफियाओं के नेटवर्क को नेस्तनाबूद कर दिया।
अगस्त 2026 तक के आधिकारिक आंकड़ों पर गौर करें तो एसआईटी ने इस दौरान कुल 569 आरोपियों को सलाखों के पीछे पहुंचाया। इस बड़ी कार्रवाई ने संगठित नकल गिरोहों की कमर तोड़कर रख दी। नतीजा यह रहा कि पिछले ढाई साल में प्रदेशभर में 400 से अधिक बड़ी परीक्षाएं पूरी पारदर्शिता और सुचिता के साथ संपन्न कराई गईं, जिससे लाखों मेधावी छात्रों का हक सुरक्षित हुआ।
सरकारी नौकरियों का महा-अभियान: आंकड़े बयां कर रहे हैं तस्वीर
भजनलाल सरकार केवल नकल रोकने तक ही सीमित नहीं रही, बल्कि उसने युद्ध स्तर पर रोजगार के नए द्वार भी खोले हैं। वर्तमान स्थिति यह है कि राज्य के विभिन्न विभागों में 1 लाख 22 हजार से अधिक पदों पर भर्ती प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ रही है। इसके अलावा, आने वाले समय के लिए 70 हजार से अधिक नए पदों पर भर्तियों की रूपरेखा तैयार की जा रही है।
इस कड़ी में केंद्र और राज्य के तालमेल का असर भी देखने को मिला। इसी साल 4 जुलाई को देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राजस्थान के लगभग 54 हजार युवाओं को अपने हाथों से सरकारी नौकरी के नियुक्ति पत्र सौंपे थे। वह पल राज्य के युवाओं के लिए एक ऐतिहासिक क्षण था, जिसने यह साबित कर दिया कि अब योग्यता ही सफलता का एकमात्र पैमाना है।
शिक्षा विभाग ने रचा इतिहास, भरे गए हजारों पद
- राज्य के शिक्षा विभाग ने पिछले डेढ़ साल में जो मुकाम हासिल किया है, उसने अपने आप में एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। विभाग ने लगभग 84 हजार पदों पर नियुक्तियों का खाका खींचकर स्कूलों में शिक्षकों की वर्षों पुरानी कमी को दूर करने की दिशा में ऐतिहासिक कदम उठाया है।डेढ़ साल की उपलब्धि: इस अवधि के दौरान 48,470 पदों पर योग्य युवाओं को नियुक्तियां दी जा चुकी हैं।
- प्रक्रियाधीन भर्तियां: वर्तमान में लगभग 35 हजार पदों पर भर्ती प्रक्रिया अलग-अलग चरणों में जारी है।
- प्रमुख पद शामिल: इसमें हेडमास्टर के 4,625 पद, सीनियर टीचर के 9,664 पद, टीचर लेवल-1 के 7,000 पद और जूनियर असिस्टेंट के 3,619 पद प्रमुख रूप से शामिल हैं।
इतनी बड़ी संख्या में पारदर्शी तरीके से शिक्षकों और कर्मचारियों का चयन होना इस बात का गवाह है कि शिक्षा के मंदिर अब पूरी तरह योग्य हाथों को सौंपे जा रहे हैं।
निजी क्षेत्र में भी खुल रहे हैं रोजगार के नए रास्ते
सरकारी नौकरियों के साथ-साथ राज्य सरकार का फोकस युवाओं को प्राइवेट सेक्टर में भी आत्मनिर्भर बनाने पर है। हाल ही में राजस्थान फाउंडेशन के 8 चैप्टर्स के प्रतिनिधियों के साथ हुई उच्चस्तरीय बैठक में मुख्यमंत्री ने खुलासा किया कि प्रदेश में निवेश के अनुकूल बेहतरीन माहौल तैयार किया गया है।
बुनियादी ढांचे (Infrastructure) को मजबूत करने के सरकार के निरंतर प्रयासों का नतीजा है कि आज देश-विदेश की बड़ी कंपनियां राजस्थान में निवेश करने के लिए आगे आ रही हैं। इन तमाम कॉरपोरेट और औद्योगिक निवेशों के जरिए निजी क्षेत्र में करीब साढ़े चार लाख रोजगार के नए अवसर सृजित किए गए हैं। इससे उन युवाओं को भी बड़ा संबल मिला है जो कॉरपोरेट जगत में अपना करियर बनाना चाहते हैं।
युवाओं की आंखों में चमक और भविष्य की उम्मीद
आज राजस्थान का युवा डरा हुआ नहीं है, बल्कि वह लाइब्रेरी और कोचिंग संस्थानों में पूरी शिद्दत के साथ अपनी तैयारी में जुटा है। उसे यह विश्वास है कि उसकी मेहनत का फल उसे ही मिलेगा, किसी बिचौलिए या नकलची को नहीं। भजनलाल सरकार की इस सख्त प्रशासनिक इच्छाशक्ति ने यह साबित कर दिया है कि अगर नीयत साफ हो, तो सिस्टम को पूरी तरह सुधारा जा सकता है। आने वाले दिनों में राजस्थान का यह मॉडल देश के अन्य राज्यों के लिए भी एक नजीर बनता जा रहा है, जहां सुशासन और पारदर्शिता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है।