बनारस के चितईपुर थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले विश्वकर्मा नगर कॉलोनी के बाशिंदों का सब्र आखिरकार रविवार को जवाब दे ही गया। लंबे समय से नरकीय जीवन जीने को मजबूर स्थानीय नागरिकों ने प्रशासनिक लाचारी के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए सड़कों पर जुलूस निकाला और जमकर नारेबाजी की। कॉलोनी की गलियों में गंदे पानी के सैलाब और सीवर की सड़ांध के बीच जीने को विवश लोगों का गुस्सा अब उफान पर है।
नरक में तब्दील हुई विश्वकर्मा नगर की जिंदगी
आधुनिक विकास के दावों के बीच विश्वकर्मा नगर की हकीकत बेहद दर्दनाक है। यहां के निवासियों के लिए घर से बाहर निकलना किसी जंग जीतने से कम नहीं है। खुले नाले और ओवरफ्लो होते सीवर का गंदा पानी सीधे सड़कों पर बह रहा है, जिससे पूरा इलाका तालाब में तब्दील हो चुका है। स्थिति इतनी दयनीय है कि पैदल चलना भी मुहाल हो गया है।
स्थानीय निवासी नीलम सिंह ने अपना दर्द बयां करते हुए बताया कि क्षेत्र में सीवर लाइन की समस्या लाइलाज बीमारी बन चुकी है। उन्होंने कहा, "हमने कई बार स्थानीय जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों के दरवाजे खटखटाए, गुहार लगाई, लेकिन हर बार सिर्फ कोरे आश्वासन ही मिले। ज़मीनी स्तर पर कोई ठोस काम नहीं हुआ।"
बच्चों और बुजुर्गों के लिए बढ़ा खतरा
जलजमाव और गंदगी के इस साम्राज्य से सबसे ज्यादा मुसीबत मासूम बच्चों और बुजुर्गों को झेलनी पड़ रही है। स्कूल जाने वाले बच्चों को गंदे पानी से होकर गुजरना पड़ता है, जिससे उनके कपड़ों और जूतों के खराब होने के साथ-साथ गंभीर बीमारियां होने का खतरा भी बना रहता है। बुजुर्गों के लिए तो यह स्थिति और भी ज्यादा कष्टदायक है, क्योंकि वे घरों में ही कैद रहने को मजबूर हो गए हैं।
- सड़कों पर बह रहा सीवर और नाले का गंदा पानी
- मच्छरों के प्रकोप से बढ़ रहा संक्रामक बीमारियों का खतरा
- स्कूली बच्चों और बुजुर्गों का चलना हुआ दूभर
- प्रशासनिक और जनप्रतिनिधियों की चुप्पी से लोगों में भारी आक्रोश
बारिश में और भी भयानक हो जाती है स्थिति
सामान्य दिनों में भी बदतर हाल रहने वाली इस कॉलोनी में बारिश के दौरान तबाही जैसे हालात बन जाते हैं। हल्की सी बारिश भी सीवर के पानी को घरों के अंदर तक धकेल देती है। जलजमाव के कारण पैदा होने वाली दमघोंटू बदबू और मच्छरों के भारी प्रकोप से इलाके में मलेरिया और डेंगू जैसी संक्रामक बीमारियों के फैलने की आशंका लगातार बनी हुई है।
सड़कों पर उतरा आक्रोश: निकाला गया विरोध जुलूस
प्रशासन की लगातार अनदेखी से आजिज आकर रविवार को क्षेत्रीय लोगों ने एकजुट होकर विरोध प्रदर्शन का रास्ता चुना। हाथों में तख्तियां लेकर और शासन-प्रशासन के खिलाफ जोरदार नारे लगाते हुए लोगों ने इलाके का भ्रमण किया। उनका यह जुलूस इस बात का स्पष्ट संदेश था कि अब वे इस अमानवीय स्थिति को और अधिक सहन करने के मूड में बिल्कुल नहीं हैं।
महापौर और नगर आयुक्त से तत्काल हस्तक्षेप की मांग
प्रदर्शन कर रहे नागरिकों ने सीधे तौर पर वाराणसी के महापौर और नगर आयुक्त से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने की अपील की है। लोगों का कहना है कि अब कागजी आश्वासनों से काम नहीं चलेगा, बल्कि धरातल पर कड़े कदम उठाने की जरूरत है।
जनता की ओर से प्रशासन के सामने दो प्रमुख मांगें रखी गई हैं:
- स्थायी समाधान: विश्वकर्मा नगर में जल्द से जल्द नई सीवर लाइन बिछाने का कार्य शुरू किया जाए ताकि इस समस्या का हमेशा के लिए अंत हो सके।
- तत्काल राहत: जब तक सीवर लाइन का निर्माण पूरा नहीं होता, तब तक नगर निगम की ओर से रियायती दरों पर सेप्टिक टैंक साफ करने वाले टैंकरों की नियमित सुविधा उपलब्ध कराई जाए, ताकि अस्थायी तौर पर जलनिकासी हो सके।
बड़ी चेतावनी: आंदोलन होगा और तेज
प्रदर्शन के अंत में स्थानीय लोगों ने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि नगर निगम और प्रशासन ने जल्द ही कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया, तो उन्हें मजबूरन अपने आंदोलन को और अधिक उग्र करना पड़ेगा। जनता का यह साफ कहना है कि बुनियादी सुविधाओं से वंचित रखकर उनके सब्र की परीक्षा न ली जाए, अन्यथा इसके गंभीर परिणाम सामने आएंगे। अब देखना यह होगा कि इस विरोध प्रदर्शन के बाद प्रशासनिक अमले की नींद कब खुलती है और विश्वकर्मा नगर के लोगों को इस नरक से कब मुक्ति मिलती है।