भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड यानी बीसीसीआई (BCCI) ने हाल ही में पुरुष सीनियर क्रिकेट टीम के मुख्य चयनकर्ता अजीत अगरकर के कार्यकाल के पूरा होने पर उन्हें विदाई दी। जुलाई 2023 में इस अहम जिम्मेदारी को संभालने वाले अगरकर का कार्यकाल 04 अक्टूबर 2026 को आधिकारिक तौर पर समाप्त हो गया। हालांकि बोर्ड ने उनके कार्यकाल को ऐतिहासिक और सफल बताते हुए सोशल मीडिया पर एक खास पोस्ट साझा किया, लेकिन इसके विपरीत क्रिकेट प्रेमियों और फैंस का रिएक्शन काफी अलग और तीखा देखने को मिला। फैंस ने बोर्ड की इस विदाई पोस्ट पर जमकर अपनी भड़ास निकाली और साफ तौर पर कह दिया कि उन्हें अगरकर के जाने का बिल्कुल भी गम नहीं है।
बोर्ड द्वारा गिनाई गई बड़ी उपलब्धियां
अजीत अगरकर के चयनकर्ता के रूप में कार्यकाल के दौरान भारतीय टीम ने कई बड़े मुकाबलों में शानदार प्रदर्शन किया और कई ट्रॉफियां अपने नाम कीं। बीसीसीआई ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट पर अजीत अगरकर को धन्यवाद देते हुए उनके कार्यकाल की प्रमुख सफलताओं को याद किया। बोर्ड ने लिखा कि यह सफर भारतीय क्रिकेट के लिए कुछ बेहद खास और यादगार पलों से भरा रहा।
अपने विदाई संदेश में बोर्ड ने उन उपलब्धियों का जिक्र किया, जिन्होंने इस कार्यकाल को खास बनाया:
- तीन आईसीसी (ICC) ट्रॉफियां जीतना
- दो एशिया कप (Asia Cup) के खिताब अपने नाम करना
- एशियन गेम्स में लगातार दो बार स्वर्ण पदक (Gold Medals) हासिल करना
- साल 2023 के वनडे विश्व कप (ODI World Cup) के फाइनल तक का शानदार सफर तय करना
बोर्ड ने उनके समर्पण, दृढ़ संकल्प और योगदान के लिए आभार व्यक्त करते हुए उनके भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं। हालांकि, बोर्ड की इन तमाम बातों के बावजूद सोशल मीडिया का माहौल कुछ और ही बयां कर रहा था।
फैंस का फूटा गुस्सा: 'किसी को परवाह नहीं'
जैसे ही बीसीसीआई ने अजीत अगरकर के विदाई की पोस्ट शेयर की, उस पर टिप्पणियों की बाढ़ आ गई। एक तरफ जहां अधिकारी उनके कार्यकाल को सफल बता रहे थे, वहीं दूसरी तरफ फैंस ने उनके काम करने के तौर-तरीकों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। सोशल मीडिया पर यूजर्स ने अपनी नाराजगी खुलकर जाहिर की।
एक यूजर ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए लिखा, "किसी को परवाह नहीं है कि वह जा रहे हैं।" वहीं एक अन्य यूजर ने तो अजीत अगरकर के साथ-साथ मुख्य कोच गौतम गंभीर का भी जिक्र करते हुए लिखा कि ये दोनों मिलकर भारतीय क्रिकेट को एक बेहद खराब दौर में ले जाने के जिम्मेदार रहे हैं। फैंस की इन प्रतिक्रियाओं से साफ जाहिर होता है कि वे टीम चयन की रणनीतियों से लंबे समय से असंतुष्ट चल रहे थे।
चयन प्रक्रिया और सीनियर खिलाड़ियों को नजरअंदाज करने के आरोप
अजीत अगरकर के कार्यकाल के दौरान सबसे बड़ा विवाद टीम चयन को लेकर रहा। फैंस और कई विश्लेषकों का मानना रहा कि उनके कार्यकाल में कुछ अनुभवी और सीनियर खिलाड़ियों को लगातार टीम से दूर रखा गया, जिससे टीम के संतुलन पर असर पड़ा।
सोशल मीडिया पर एक अन्य यूजर ने अपनी भड़ास निकालते हुए लिखा, "सीनियर खिलाड़ियों के करियर को नुकसान पहुंचाया गया, टेस्ट क्रिकेट में और न्यूजीलैंड तथा दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ विदेशी दौरों पर बुरी तरह हार (व्हाइटवॉश) का सामना करना पड़ा। हमेशा औसत दर्जे के खिलाड़ियों को तरजीह दी गई। विश्व कप 2027 के सपनों को कमजोर करने की कोशिश की गई और विश्व टेस्ट चैंपियनशिप (WTC) के फाइनल की दौड़ से बाहर होना पड़ा। यह सबसे ज्यादा पक्षपाती चयन समिति रही है जो अपनी मनमानी करती है।"
इस तरह के अनगिनत कमेंट्स यह बताने के लिए काफी हैं कि एक वर्ग अजीत अगरकर की चयन नीतियों से कितना आहत था। फैंस का यह भी मानना था कि कुछ चुनिंदा फैसलों की वजह से भारतीय क्रिकेट को लंबे प्रारूप (Test Cricket) में दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
क्या अगरकर ने खुद नहीं मांगा था एक्सटेंशन?
दिलचस्प बात यह रही कि अजीत अगरकर ने अपने पद के लिए भारतीय क्रिकेट बोर्ड से किसी भी प्रकार के कार्यकाल विस्तार (Extension) की मांग नहीं की थी। अक्टूबर 2026 में उनका कार्यकाल तय समय के अनुसार समाप्त हो गया और उन्होंने इसे आगे बढ़ाने में कोई रुचि नहीं दिखाई। बोर्ड के साथ उनके संबंध पेशेवर रूप से समाप्त हुए, लेकिन जनता के बीच उनकी विदाई को लेकर जो प्रतिक्रियाएं आईं, उन्होंने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि भारतीय क्रिकेट में चयनकर्ता की कुर्सी कितनी कांटों भरी होती है।
अजीत अगरकर का शानदार अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट करियर
एक चयनकर्ता के रूप में भले ही उन्हें आलोचनाओं का सामना करना पड़ा हो, लेकिन एक खिलाड़ी के तौर पर अजीत अगरकर का भारतीय क्रिकेट में अमूल्य योगदान रहा है। उनके अंतरराष्ट्रीय करियर पर नजर डाली जाए तो आंकड़े खुद उनकी काबिलियत की गवाही देते हैं:
- टेस्ट मैच: उन्होंने भारत के लिए 26 टेस्ट मैच खेले और कुल 58 विकेट अपने नाम किए।
- वनडे क्रिकेट: 191 वनडे मुकाबलों में उन्होंने शानदार गेंदबाजी करते हुए 288 विकेट चटकाए, जो उस दौर में एक बड़ा रिकॉर्ड था।
- टी20 अंतरराष्ट्रीय: इस सबसे छोटे फॉर्मेट में उन्होंने 4 मैच खेलकर 3 विकेट लिए।
अपनी तेज गेंदबाजी और निचले क्रम में ताबड़तोड़ बल्लेबाजी के दम पर उन्होंने कई मैच जिताए थे। वनडे क्रिकेट में सबसे तेज अर्धशतक बनाने का उनका रिकॉर्ड लंबे समय तक कायम रहा था।
भविष्य की ओर देखती भारतीय क्रिकेट टीम
अजीत अगरकर का कार्यकाल समाप्त होने के बाद अब भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड आगामी सीरीज और टूर्नामेंट्स के लिए नए सिरे से रणनीतियां बना रहा है। हाल ही में यह भी साफ किया गया है कि वीवीएस लक्ष्मण जैसे दिग्गजों की भूमिकाएं चयन बैठकों में अहम रहने वाली हैं। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि बोर्ड मुख्य चयनकर्ता के रूप में किसी जिम्मेदारी सौंपता है और नया चेहरा टीम इंडिया के भविष्य को किस दिशा में लेकर जाता है। फिलहाल फैंस की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या नई चयन समिति टीम में सीनियर और युवा खिलाड़ियों के बीच बेहतर संतुलन बिठा पाती है या नहीं।